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Bareilly News: बरेली में समस्याएं बेशुमार... शहर की नई सरकार के सामने चुनौतियों के पहाड़
Sat, 27 May 2023 06:38 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 27 May 2023 06:38 PM IST
सार
शपथ ग्रहण करने के बाद मेयर उमेश गौतम का दूसरा कार्यकाल शुरू हो गया है। ऐसे में संसाधन और काम समझने जैसी दिक्कतें उनके सामने नहीं होंगी। लेकिन शहर को शासन की मंशा के अनुरूप स्मार्ट बनाने की दिशा में उनके सामने चुनौतियां तमाम हैं।
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बरेली के मेयर उमेश गौतम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बरेली में शहर की नई सरकार का गठन हो गया है। शनिवार को बरेली क्लब मैदान में मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने महापौर उमेश गौतम को शपथ दिलाई। इसके बाद महापौर ने नवनिर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलाई। महापौर उमेश गौतम की यह दूसरा कार्यकाल है।
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पहले पांच साल तक शहर की तमाम समस्याओं को बखूबी समझने और दूर करने के प्रयास के बाद अब उन्हें जड़ से खत्म करने का दबाव रहेगा। हालांकि शहर को शासन की मंशा के अनुरूप स्मार्ट बनाने की दिशा में उनके सामने चुनौतियां तमाम हैं। मगर सबसे पहले सड़कों से अतिक्रमण हटवाने, बेतरतीब यातायात को सुधरवाने और बाकरगंज से कूड़े के पहाड़ को हटवाने की दरकार है।
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पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने सभी नवनिर्वाचित मेयरों से मुलाकात की थी। उन्हें कुछ काम भी सौंपे थे और प्राथमिकता से करने के लिए कहा था। इसमें प्रमुख रूप से कूड़े का निस्तारण, अतिक्रमण मुक्त सड़कें और छुट्टा पशुओं से निजात शामिल थी।
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मेयर ने मुख्यमंत्री से वादा भी किया कि इन सभी मुद्दों पर प्रमुखता से काम किया जाएगा। उमेश गौतम का यह लगातार दूसरा कार्यकाल है। ऐसे में संसाधन और काम समझने जैसी दिक्कतें उनके सामने नहीं होंगी। हालांकि, यह मेयर पर निर्भर करेगा कि वह कितनी जल्दी इन सभी मुद्दों पर अमल करते हैं।
सड़क किनारे जलता कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
ये मुद्दे होंगे चुनौती
1- बाकरगंज में कूड़े का पहाड़ बड़ी समस्याबाकरगंज में कूड़े के पहाड़ में करीब छह लाख मीट्रिक टन कूड़ा है। शहर में रोजाना 450 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। यह पिछले करीब 20 सालों से बाकरगंज में जमा हो रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कूड़ा जमा होने से आसपास के क्षेत्र का पेयजल भी दूषित हो चुका है। कई लोग बीमारी के शिकार हो चुके हैं। कूड़ा हटने से उन्हें राहत मिलेगी और क्षेत्र को दुर्गंध से भी निजात मिलेगी।
वर्ष 2021 में इसे हटाने के लिए टेंडर हो चुका है, लेकिन अभी तक इसे यहां से हटाया नहीं जा सका है। पिछले दो दशक से सभी मेयरों ने इसे हटाने का वादा किया, लेकिन पहाड़ अभी तक जस का तस है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अब तो मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में भी शामिल है। इधर, रजऊ परसपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनकर तैयार हो चुका है। उसे जितना जल्द शुरू किया जाएगा, उतनी ही आसानी होगी।
2- अतिक्रमण व अवैध टैक्सी स्टैंड का धुलना होगा दाग
स्मार्ट सिटी के तहत शहर की कुछ सड़कों का चौड़ीकरण कर दिया गया। उन पर महंगी झुमका स्ट्रीट लाइटें भी लगा दी गईं, लेकिन अतिक्रमण उन पर दाग की तरह है। इसी अतिक्रमण की वजह से वाहन दिन भर जाम फंसते हैं। ई-बसों का प्रोजेक्ट भी इसी के चलते तीन महीने में ही दम तोड़ गया।
श्यामगंज से सेटेलाइट, सेटेलाइट से पीलीभीत बाईपास, पटेल चौक से चौकी चौराहा, रेलवे रोड, पटेल चौक से सिविल लाइंस और चौपुला की ओर जाने वाली सड़कों के अलावा सौ फुटा रोड व डीडीपुरम व स्टेडियम रोड का हाल भी ऐसा ही है। इसके अलावा अवैध टैक्सी स्टैंड भी हटवाना चुनौती होगा, क्योंकि नगर निगम के कर्मचारियों व पुलिस के लिए यह भी एक अर्थव्यवस्था है।
स्मार्ट सिटी के तहत शहर की कुछ सड़कों का चौड़ीकरण कर दिया गया। उन पर महंगी झुमका स्ट्रीट लाइटें भी लगा दी गईं, लेकिन अतिक्रमण उन पर दाग की तरह है। इसी अतिक्रमण की वजह से वाहन दिन भर जाम फंसते हैं। ई-बसों का प्रोजेक्ट भी इसी के चलते तीन महीने में ही दम तोड़ गया।
श्यामगंज से सेटेलाइट, सेटेलाइट से पीलीभीत बाईपास, पटेल चौक से चौकी चौराहा, रेलवे रोड, पटेल चौक से सिविल लाइंस और चौपुला की ओर जाने वाली सड़कों के अलावा सौ फुटा रोड व डीडीपुरम व स्टेडियम रोड का हाल भी ऐसा ही है। इसके अलावा अवैध टैक्सी स्टैंड भी हटवाना चुनौती होगा, क्योंकि नगर निगम के कर्मचारियों व पुलिस के लिए यह भी एक अर्थव्यवस्था है।
बरेली नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
3- सौ फीसदी करना होगा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन
नगर निगम का दावा है कि कूड़ा कलेक्शन डोर टू डोर हो रहा है, लेकिन नगर निगम क्षेत्र के अभी कई ऐसे हिस्से हैं, जहां डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। इसके लिए करीब दो साल से प्रयास चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्राथमिकता से करने के लिए कहा है।
इसके अलावा गीला और सूखा कचरा घरों से अलग मिले, इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम करने की जरूरत है। डलाव घरों से दो बार कूड़ा उठाए जाने का नियम है, लेकिन नगर निगम में ऐसा नहीं हो रहा है। यहां डलाव घर से बाहर सड़क पर कूड़ा फैला रहता है। इज्जतनगर स्टेशन के सामने अब्दुल कलाम मार्ग पर तो नगर निगम ने सड़क पर अस्थायी डलावघर बना दिया है।
नगर निगम का दावा है कि कूड़ा कलेक्शन डोर टू डोर हो रहा है, लेकिन नगर निगम क्षेत्र के अभी कई ऐसे हिस्से हैं, जहां डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन नहीं हो पा रहा है। इसके लिए करीब दो साल से प्रयास चल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे प्राथमिकता से करने के लिए कहा है।
इसके अलावा गीला और सूखा कचरा घरों से अलग मिले, इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम करने की जरूरत है। डलाव घरों से दो बार कूड़ा उठाए जाने का नियम है, लेकिन नगर निगम में ऐसा नहीं हो रहा है। यहां डलाव घर से बाहर सड़क पर कूड़ा फैला रहता है। इज्जतनगर स्टेशन के सामने अब्दुल कलाम मार्ग पर तो नगर निगम ने सड़क पर अस्थायी डलावघर बना दिया है।
4- निगम को आत्मनिर्भर, समस्या निस्तारण पर फोकस
मुख्यमंत्री ने सभी मेयरों को निर्देश दिए थे कि नगर निगम को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करना चाहिए। कुछ नया करेंगे तभी शहर को नया बना पाएंगे। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिए थे कि जन सहभागिता के साथ काम करने की जरूरत है। टैक्स प्रक्रिया को और सरल किया जाए।
जनसमस्याओं का प्रमुखता से निस्ताण हो। फिलहाल तो नगर निगम में ये एक भी काम नहीं हो रहे हैं। आईजीआरएस पर आने वाली आधे से अधिक शिकायतों का कोई न कोई कारण बताकर समाधान किए बिना ही निस्तारित कर दिया जाता है। इन पर काम नहीं हुआ तो आमजन सरलता से नगर निगम से जुड़ नहीं पाएगा।
मुख्यमंत्री ने सभी मेयरों को निर्देश दिए थे कि नगर निगम को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में काम करना चाहिए। कुछ नया करेंगे तभी शहर को नया बना पाएंगे। इसके लिए उन्होंने सुझाव दिए थे कि जन सहभागिता के साथ काम करने की जरूरत है। टैक्स प्रक्रिया को और सरल किया जाए।
जनसमस्याओं का प्रमुखता से निस्ताण हो। फिलहाल तो नगर निगम में ये एक भी काम नहीं हो रहे हैं। आईजीआरएस पर आने वाली आधे से अधिक शिकायतों का कोई न कोई कारण बताकर समाधान किए बिना ही निस्तारित कर दिया जाता है। इन पर काम नहीं हुआ तो आमजन सरलता से नगर निगम से जुड़ नहीं पाएगा।
5- इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम चलाना टेड़ी खीर
स्मार्ट सिटी के तहत सभी चौराहों पर ट्रैफिक लाइट सिस्टम चालू किया गया है, लेकिन करीब दो साल बीतने के बाद भी कुछ चौराहों को छोड़कर यह कहीं चल नहीं रहा है। यहां तक कि चौकी चौराहा और पटेल चौक जैसे चौराहों पर भी यह लागू नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री ने इसे हर चौराहों पर प्राथमिकता से लागू करने के लिए कहा है।
इसके अलावा स्मार्ट सिटी से बन रहे कुतुबखाना ओवरब्रिज को तय समय में पूरा करना फिलहाल नामुमकिन सा है। इससे शहर के व्यापारी और आमजन भी परेशान हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी के करीब दस प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिन्हें तय समय में मार्च तक पूरा करना है। मगर उनका अभी 50 फीसदी भी काम नहीं हो सका है।
महापौर उमेश गौतम ने कहा कि शासन की प्राथमिकता में जो भी काम हैं, उन्हें प्राथमिकता से कराया जाएगा। जल्द ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू कराया जाएगा।
स्मार्ट सिटी के तहत सभी चौराहों पर ट्रैफिक लाइट सिस्टम चालू किया गया है, लेकिन करीब दो साल बीतने के बाद भी कुछ चौराहों को छोड़कर यह कहीं चल नहीं रहा है। यहां तक कि चौकी चौराहा और पटेल चौक जैसे चौराहों पर भी यह लागू नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री ने इसे हर चौराहों पर प्राथमिकता से लागू करने के लिए कहा है।
इसके अलावा स्मार्ट सिटी से बन रहे कुतुबखाना ओवरब्रिज को तय समय में पूरा करना फिलहाल नामुमकिन सा है। इससे शहर के व्यापारी और आमजन भी परेशान हो रहे हैं। स्मार्ट सिटी के करीब दस प्रोजेक्ट ऐसे हैं जिन्हें तय समय में मार्च तक पूरा करना है। मगर उनका अभी 50 फीसदी भी काम नहीं हो सका है।
महापौर उमेश गौतम ने कहा कि शासन की प्राथमिकता में जो भी काम हैं, उन्हें प्राथमिकता से कराया जाएगा। जल्द ही सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू कराया जाएगा।