प्यार का 'खेल' और फिर मौत: युवती ने खेला ऑनलाइन गेम, दोस्ती कर किया ब्लैकमेल, युवक ने दी जान
बरेली के एक युवक को ऑनलाइन गेम खेलने के दौरान युवती ने अपने प्रेमजाल में फंसा लिया। वह उसे ब्लैकमेल करने लगी। युवती ने लाखों रुपये हड़प लिए। जब युवक ने और रुपये देने से इनकार किया तो उसे दुष्कर्म के मामले में फंसाने की धमकी दी। इससे अवसाद में आए युवक ने आत्महत्या कर ली।
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ऑनलाइन गेम के जरिये राजस्थान की युवती और उसके दोस्त ने मिलकर बरेली के प्रेमनगर क्षेत्र के युवक को प्रेमजाल में फंसा लिया। उसे ब्लैकमेल कर लाखों रुपये ले लिए। ब्लैकमेलिंग से परेशान युवक ने आत्महत्या कर ली। एसएसपी के आदेश पर प्रेमनगर थाने में मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई है।
शास्त्रीनगर निवासी प्रतिमा सिंह ने बताया कि एक साल पहले उनके 22 वर्षीय बेटे दीपांश की दोस्ती ऑनलाइन गेम के जरिये राजस्थान में पाली की निवासी लीसा कंसारा से हुई थी। दोनों फोन पर बातें करते थे। लीसा ने दीपांश को प्रेमजाल में फंसाकर साढ़े तीन लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।
रुपये न देने पर दी थी ये धमकी
लीसा ने दीपांश से और रुपये मांगे। रुपये नहीं देने पर दुष्कर्म के केस में फंसाने की धमकी दी। इससे दीपांश अवसाद में रहने लगा। काफी पूछने पर दीपांश ने बताया कि लीसा ब्लैकमेल कर रुपये वसूलती है। अवसाद में आकर दीपांश ने 31 जुलाई को फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उनकी शिकायत पर प्रेमनगर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम तो कराया पर रिपोर्ट लिखने की बात टाल दी।
प्रतिमा ने बताया कि लीसा, लीसा के दोस्त मुकुल और आयुष ने उनके बेटे को आत्महत्या के लिए मजबूर किया था। सुनवाई न होने पर मंगलवार को प्रतिमा सिंह ने एसएसपी अनुराग आर्य से शिकायत की। एसएसपी के आदेश पर प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
मां बोलीं- किसी और के साथ न हो घटना
प्रतिमा सिंह ने बताया कि उनके पति आयुर्वेदिक अस्पताल में कर्मचारी थे। उनकी मौत के बाद उन्हें नौकरी मिल गई। दीपांश उनका इकलौता बेटा था। उससे छोटी एक बेटी है। दोनों बच्चों को वह शहर में किराये पर रहकर पढ़ा रही थीं। बेटे ने बीए और कंप्यूटर का डिप्लोमा कर रखा था। वह नौकरी का प्रयास कर रहा था।
इसी दौरान गिरोह के चक्कर में आ गया। बताया कि इन लोगों ने दीपांश को पबजी और बीडीजी गेम की लत लगा दी। उसी में फंसकर उसकी जिंदगी तबाह हो गई। उनके बेटे की जान चली गई और उनके परिवार की बचत भी गिरोह ने झपट ली। वह चाहती हैं कि किसी और परिवार के बच्चे ऐसे गिरोह या गेम के चक्कर में जान न गंवाए।