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Bareilly News: पंडालों और मंदिरों में पूजी गईं योग की अधिष्ठात्री महागौरी
Mon, 23 Oct 2023 12:43 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Mon, 23 Oct 2023 12:43 AM IST
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बरेली। शारदीय नवरात्र के आठवें दिन रविवार को पंडालों और मंदिरों में मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की गई। योग की अधिष्ठात्री महागौरी की पूजा अर्चना के लिए भोर से भक्तों की कतार लगनी शुरू हो गई थी। सुबह से ही चौरासी घंटा, ललिता देवी, काली मां मंदिर समेत अन्य दुर्गा मंदिरों में भक्तों की लंबी कतार लगी रही।
शहर में मनोरंजन सदन उत्तर रेलवे, दुर्गाबाड़ी रामपुर गार्डन, रोड नंबर चार इज्जतनगर, दादू का मंदिर इज्जतनगर स्टेशन के सामने, कृष्णा नगर कालीबाड़ी, चौपुला मनोरंजन सदन, बीआई बाजार कैंट व कुदेशिया फाटक के पास पंडाल सजाए गए हैं। मनोरंजन सदन उत्तर रेलवे में सजे पंडाल में सुबह आठ बजे से पूजा प्रारंभ हुई। बंगाली कल्चरल एवं वेलफेयर सोसाइटी के मीडिया प्रभारी ध्रुव चटर्जी ने बताया कि चार दिन की दुर्गा पूजा में महाअष्टमी की पूजा अधिक महत्वपूर्ण होती है। मान्यता है कि इस दिन श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले 108 कमल के पुष्प से मां दुर्गा की पूजा की थी। एक पुष्प कम पड़ने पर वह तलवार से अपनी आंख निकालने जा रहे थे। तभी मां ने प्रसन्न होकर श्रीराम को लंका पर विजय का वरदान दिया था। इसी मान्यता के चलते सप्तमी व अष्टमी के बीच का जो समय होता है। उसको संधी पूजा कहते हैं। इसमें 108 कमल पुष्प मां को अर्पित किए जाते हैं। शाम को अष्टमी की महाआरती हुई। धनूची प्रतियोगिता के बाद मिठू गोराई के निर्देशन में उल्लास प्रथम वर्ष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान रविंद्र नाथ ठाकुर के नाटक का मंचन किया गया। इस दौरान असीम बनर्जी, शुभ्रा चटर्जी, शुभम बागची व अन्य बाल कलाकार मौजूद रहे। रामपुर गार्डन दुर्गा बाड़ी में महाअष्टमी पूजा की गई। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई।
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शहर में मनोरंजन सदन उत्तर रेलवे, दुर्गाबाड़ी रामपुर गार्डन, रोड नंबर चार इज्जतनगर, दादू का मंदिर इज्जतनगर स्टेशन के सामने, कृष्णा नगर कालीबाड़ी, चौपुला मनोरंजन सदन, बीआई बाजार कैंट व कुदेशिया फाटक के पास पंडाल सजाए गए हैं। मनोरंजन सदन उत्तर रेलवे में सजे पंडाल में सुबह आठ बजे से पूजा प्रारंभ हुई। बंगाली कल्चरल एवं वेलफेयर सोसाइटी के मीडिया प्रभारी ध्रुव चटर्जी ने बताया कि चार दिन की दुर्गा पूजा में महाअष्टमी की पूजा अधिक महत्वपूर्ण होती है। मान्यता है कि इस दिन श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले 108 कमल के पुष्प से मां दुर्गा की पूजा की थी। एक पुष्प कम पड़ने पर वह तलवार से अपनी आंख निकालने जा रहे थे। तभी मां ने प्रसन्न होकर श्रीराम को लंका पर विजय का वरदान दिया था। इसी मान्यता के चलते सप्तमी व अष्टमी के बीच का जो समय होता है। उसको संधी पूजा कहते हैं। इसमें 108 कमल पुष्प मां को अर्पित किए जाते हैं। शाम को अष्टमी की महाआरती हुई। धनूची प्रतियोगिता के बाद मिठू गोराई के निर्देशन में उल्लास प्रथम वर्ष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान रविंद्र नाथ ठाकुर के नाटक का मंचन किया गया। इस दौरान असीम बनर्जी, शुभ्रा चटर्जी, शुभम बागची व अन्य बाल कलाकार मौजूद रहे। रामपुर गार्डन दुर्गा बाड़ी में महाअष्टमी पूजा की गई। रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई।
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