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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Leave builders , even if the defaulter is BDA

बिल्डरों की छोड़ो, यहां तो बीडीए ही डिफाल्टर है

Sat, 20 Aug 2016 01:26 AM IST
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली। Updated Sat, 20 Aug 2016 01:26 AM IST
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राज्य सरकार ने भले ही बिल्डिंग एक्ट में संशोधन कर  मल्टीस्टोरी और ग्रुप हाउसिंग में फ्लैट्स बनाकर बेचने वाले बिल्डरों पर शिकंजा कसने की बात कही हो लेकिन बरेली में मकानों के खरीददार दशकों से न केवल बिल्डर बल्कि बीडीए की मनमानी के भी शिकार हो रहे हैं। रामगंगा नगर समेत अन्य आवासीय योजनाओं में बीडीए खुद ग्राहकों को समय से प्लाट और आवास देने में नाकाम साबित हो रहा है। बीडीए की देखादेखी बिल्डर भी तय समय से न तो ग्राहकों को आवास उपलब्ध करा रहे हैं बल्कि उनमेें पहले से लोक लुभावन वादों और घोषणाओं को भी पूरा नहीं कर रहे। अब तक न तो बीडीए और न ही शासन से  किसी पर भी कार्रवाई हुई है।  
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बीडीए ने तीन दशक में शहर में सात से ज्यादा कालोनियां बसाईं। इनमें टिबरीनाथ, डीडीपुरम और प्रियदर्शनी नगर को छोड़ दें तो अधिकांश कालोनियों में  आवेदकों को न तो समय पर और न ही गुणवत्तापूर्ण आवास देने के नियमों का पालन हो पाया। रामपुर और नैनीताल हाइवे पर कालोनी बसाने की मंशा पूरी नहीं हो सकी। करगैना, लोहिया विहार और बिहारमान नगला में आवेदकों को आवास देने में नियमों का पालन नहीं किया गया। यही वजह है कि बीडीए की ये कालोनियां बदहाल स्थिति में हैं। 2004 में बीडीए ने रामगंगा नगर आवासीय योजना शुरू की थी। अब तक की सबसे बड़ी आवासीय योजना में बीडीए ने आवेदकों को प्लाट बेचकर आमदनी अर्जित कर ली लेकिन 12 साल बाद भी आवंटियों को न तो प्लाटों पर कब्जा मिल पाया और न ही आवास समय पर मिल पाए। 
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 बीडीए ने बसाईं ये हैं कालोनियां
1- दीनदयाल पुरम 2- बिहारमान नगला 3- लोहिया विहार 4- प्रियदर्श्नी नगर 5- करगैना कालोनी 6- समाजवादी आवास योजना 7- रामगंगा नगर आवासीय योजना  
 नियमों का पालन नहीं करा पाया बीडीए   
 क्रेडाई के 22 अधिकृत बिल्डर हैं।  30 से ज्यादा बिल्डर शहर में अनाधिकृत कालोनियां बनाते हैं। तीन दशक में 250 से ज्यादा कालोनियां अवैध तरीके से बस गईं। इनमें भी बिल्डरों ने खरीददारों से न बुकिंग के बाद बढ़ाकर कीमत वसूल की बल्कि निर्माण के बाद आवासों की गुणवत्ता भी वैसी नहीं थी जैसी कि बुकिंग के समय घोषणा की गई थी। 
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‘क्रेडाई के सदस्य नये बिल्डिंग रेग्यूलेटरी एक्ट का पालन करेंगे। जो भी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसे दंड भुगतना पड़ेगा। अनाधिकृत कालोनाइजर्स से नियमों का पालन कराना बीडीए का काम है।’ सुनील गुप्ता, सचिव क्रेडाई 


‘ग्राहकों को समय से आवास उपलब्ध कराने के नियम तो पहले भी थे लेकिन दंड का प्रावधान नहीं था। इसलिए सख्ती नहीं बरती जाती थी। इसीलिए पुरानी कालोनियों पर ये नियम लागू नहीं हो पाया। अब सख्ती से नियम लागू कराए जाएंगे।’ अजय सिंह, चीफ इंजीनियर बीडीए  
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