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जिला योजना : मंजूरी से कम मिले 61 करोड़, 10 विभाग बजट को तरसे
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बरेली। पिछले साल 540 करोड़ की रकम से जिले के विकास का खाका खींचा गया था लेकिन 479 करोड़ रुपये ही मिल सके। मंजूरी से 61 करोड़ रुपये कम मिलने के चलते 10 विभागों को कोई बजट ही नहीं मिल सका। ऐसे में इन विभागों को अपने कार्यों के लिए दूसरे मदों से रकम का प्रबंध करना पड़ा। इस बार लगभग 550 करोड़ से जिले के विकास की योजना बनाई जा रही है। ज्यादातर विभागों के प्रस्ताव भी आ गए हैं, जिन्हें महीने के अंत तक होने वाली बैठक में मंजूरी देने की तैयारी है।
वित्त्ीय वर्ष 2021-22 की जिला योजना के तहत गन्ना विकास के लिए 12.47 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया लेकिन 2.61 करोड़ रुपये ही मिल सके। इसी तरह लघु एवं सीमांत किसानों की सहायता के लिए 8.64 करोड़ रुपये मंजूर हुए लेकिन खाते में तीन करोड़ रुपये ही आए। दुग्ध विकास के लिए 5.50 करोड़ में से 1.15 करोड़, वन विभाग के लिए 6.35 करोड़ में से महज नौ लाख ही रुपये मिले। ग्राम्य विकास के विशेष कार्यक्रम के लिए 15 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई थी। यह रकम भी पूरी नहीं मिल सकी। रोजगार कार्यक्रम के लिए 112 करोड़ का प्रस्ताव तैयार हुआ। इसकी भी 80 फीसदी रकम ही मिल सकी। सड़क एवं पुल के लिए 64.70 करोड़, प्राथमिक शिक्षा के लिए 70 करोड़, माध्यमिक शिक्षा के लिए 15 करोड़, प्राविधिक शिक्षा के लिए 8.80 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ था। एलोपैथी चिकित्सा के लिए 7.30 करोड़, परिवार कल्याण के लिए 71 करोड़, ग्रामीण आवासों के लिए 15 करोड़, समाज कल्याण के लिए 47.87 करोड़, महिला कल्याण के लिए 17 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिली लेकिन रकम 80 से 85 फीसदी तक ही मिल सकी।
इन विभागों को नहीं मिली रकम
सहकारिता विभाग के लिए 80 लाख, सामुदायिक विकास ग्राम्य विकास के लिए 2.41 करोड़, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 10.65 लाख, पर्यटन के लिए दो करोड़, खेलकूद के लिए 2.77 करोड़ रुपये यूनानी चिकित्सा के लिए 20 लाख, नगर विकास के लिए 8. 82 करोड़ का प्रस्ताव तैयार हुआ था लेकिन रकम इनके खाते में नहीं आई। इन विभागों ने अन्य मदों से विकास पर रकम खर्च की।
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कई विभाग खर्च नहीं कर सके पूरी रकम
जिला योजना के तहत मिली रकम में से कृषि विभाग ने 89 फीसदी रकम खर्च की। इसी तरह पशुपालन विभाग ने 99 फीसदी, प्राथमिक शिक्षा विभाग ने 99 फीसदी, प्राविधिक शिक्षा की 76 फीसदी रकम खर्च की जा सकी। परिवार कल्याण की 82 फीसदी, सेवायोजन विभाग ने 88 फीसदी रकम खर्च की। कुछ अन्य विभागों में भी खर्च का आंकड़ा कम रहा।
जिला योजना के तहत बजट तैयार करके शासन को भेजा जाता है। शासन तय करता है कि कितनी राशि जारी की जाएगी। इस वित्तीय वर्ष के लिए जिला योजना के प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं।
- चंद्र मोहन गर्ग, सीडीओ
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वित्त्ीय वर्ष 2021-22 की जिला योजना के तहत गन्ना विकास के लिए 12.47 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया लेकिन 2.61 करोड़ रुपये ही मिल सके। इसी तरह लघु एवं सीमांत किसानों की सहायता के लिए 8.64 करोड़ रुपये मंजूर हुए लेकिन खाते में तीन करोड़ रुपये ही आए। दुग्ध विकास के लिए 5.50 करोड़ में से 1.15 करोड़, वन विभाग के लिए 6.35 करोड़ में से महज नौ लाख ही रुपये मिले। ग्राम्य विकास के विशेष कार्यक्रम के लिए 15 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई थी। यह रकम भी पूरी नहीं मिल सकी। रोजगार कार्यक्रम के लिए 112 करोड़ का प्रस्ताव तैयार हुआ। इसकी भी 80 फीसदी रकम ही मिल सकी। सड़क एवं पुल के लिए 64.70 करोड़, प्राथमिक शिक्षा के लिए 70 करोड़, माध्यमिक शिक्षा के लिए 15 करोड़, प्राविधिक शिक्षा के लिए 8.80 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ था। एलोपैथी चिकित्सा के लिए 7.30 करोड़, परिवार कल्याण के लिए 71 करोड़, ग्रामीण आवासों के लिए 15 करोड़, समाज कल्याण के लिए 47.87 करोड़, महिला कल्याण के लिए 17 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिली लेकिन रकम 80 से 85 फीसदी तक ही मिल सकी।
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इन विभागों को नहीं मिली रकम
सहकारिता विभाग के लिए 80 लाख, सामुदायिक विकास ग्राम्य विकास के लिए 2.41 करोड़, अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत के लिए 10.65 लाख, पर्यटन के लिए दो करोड़, खेलकूद के लिए 2.77 करोड़ रुपये यूनानी चिकित्सा के लिए 20 लाख, नगर विकास के लिए 8. 82 करोड़ का प्रस्ताव तैयार हुआ था लेकिन रकम इनके खाते में नहीं आई। इन विभागों ने अन्य मदों से विकास पर रकम खर्च की।
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कई विभाग खर्च नहीं कर सके पूरी रकम
जिला योजना के तहत मिली रकम में से कृषि विभाग ने 89 फीसदी रकम खर्च की। इसी तरह पशुपालन विभाग ने 99 फीसदी, प्राथमिक शिक्षा विभाग ने 99 फीसदी, प्राविधिक शिक्षा की 76 फीसदी रकम खर्च की जा सकी। परिवार कल्याण की 82 फीसदी, सेवायोजन विभाग ने 88 फीसदी रकम खर्च की। कुछ अन्य विभागों में भी खर्च का आंकड़ा कम रहा।
जिला योजना के तहत बजट तैयार करके शासन को भेजा जाता है। शासन तय करता है कि कितनी राशि जारी की जाएगी। इस वित्तीय वर्ष के लिए जिला योजना के प्रस्ताव तैयार हो रहे हैं।
- चंद्र मोहन गर्ग, सीडीओ