Alvida Jumma 2024: अलविदा जुमा की नमाज आज, बरेली की जामा मस्जिद में आज होगी सबसे बड़ी जमात
शाही जामा मस्जिद कमेटी की ओर से अलविदा की नमाज को लेकर तैयारी की जा रही है। अधिक नमाजी होने की संभावना को देखते हुए मस्जिद, मदरसे और हाउज की छतों पर भी नमाज अदा करने की व्यवस्था रहेगी।
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माह-ए-रमजान का आखिरी जुमा यानी अलविदा आज (शुक्रवार) है। इसमें सबसे बड़ी जमात शहर की शाही जामा मस्जिद में होगी। यहां 15 से 20 हजार लोगों के नमाज अदा करने की संभावना है।
मस्जिद कमेटी के सचिव डॉ. नफीस खान ने बताया कि अलविदा की नमाज को लेकर तैयारी की जा रही है। अधिक नमाजी होने की संभावना को देखते हुए मस्जिद, मदरसे और हाउज की छतों पर भी नमाज अदा करने की व्यवस्था रहेगी। इसके लिए टेंट आदि लगवाए जा रहे हैं। मस्जिद के मुख्य हिस्से में सात हजार नमाजी आ जाते हैं। छत पर करीब पांच हजार लोग नमाज पढ़ लेते हैं।
मदरसे व हाउज आदि को लेकर 15 हजार लोग नमाज अदा कर सकते हैं। इससे अधिक हुए तो मोहल्ले वालों के सहयोग से उनके घरों की छतों पर व्यवस्था की जाती है। इस तरह लगभग बीस हजार लोग यहां नमाज अदा कर लेते हैं। इसके अलावा दरगाह आला हजरत, शिया जामा मस्जिद, पुराना शहर की मिर्जा मस्जिद में बड़ी तादात में लोग नमाज अदा करते हैं।
जरूरतमंदों तक पहुंचाएं जकात : अहसन मियां
दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी (अहसन मियां) ने मालदार मुसलमानों से कहा कि अल्लाह ने जकात फर्ज की है। लिहाजा मालदार मुसलमान अपने माल की जकात व सदका-ए-फित्र की रकम जल्द अदा कर दें, ताकि गरीब मुसलमान भी ईद की खुशियां मना सकें।
उन्होंने कहा कि जकात की अहमियत इस बात से भी समझी जा सकती है कि समाज में आर्थिक बराबरी के मकसद से कुरान में नमाज के साथ जकात का जिक्र आया है। जकात निकालने से इंसान का माल पाक हो जाता है। उसमें बरकत होती है।
मालदार मुसलमानों की जिम्मेदारी है कि वे यतीम, बेवा, बीमार, मदारिस-ए- इस्लामिया और जरूरतमंदों तक ये रकम पहुंचा दें। मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी के मुताबिक दरगाह स्थित टीटीएस मुख्यालय में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अहसन मियां ने ये बातें कहीं। इसमें तमाम मुरीद और टीटीएस के पदाधिकारी मौजूद रहे।