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Bareilly News: बीमारी से बचाव के लिए जल सखियां कर रही पानी की जांच

Thu, 20 Aug 2026 01:44 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 01:44 AM IST
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'Jal Sakhis' are testing water to prevent disease.
बरेली। जल निगम ग्रामीण की ओर से गांवों में जल सखियों के जरिये पानी की जांच कराई जा रही है। इससे जहां बीमारी से बचाव हो रहा है, वहीं गांव की महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिल रही है।
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जल निगम ग्रामीण की तरफ से जिले की 1188 ग्राम पंचायतों में जल सखियों की तैनाती की गई है। प्रत्येक ग्राम पंचायतों में इनको हर तीन माह में पानी के 100 नमूनों की जांच करनी होती है। इसके आधार पर इनको दो हजार रुपये मिलते हैं। कुछ जल सखियां पानी की जांच करती हैं तो कई इसकी रिपोर्ट को विभाग की साइट पर अपलोड करती हैं। इसमें समूह से जुड़ी महिलाएं भी शामिल हैं।
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साल में तीन बार पानी की जांच कराई जाती है। इसमें एक बारिश के पहले, दूसरी बारिश के बाद और तीसरी जांच गर्मी में कराई जाती है। जिस हैंडपंप की रिपोर्ट गड़बड़ आती है, उस पर निशान लगा दिया जाता है कि पानी पीने योग्य नहीं है। गांव के लोगों को दूसरे स्रोतों के पानी को पीने के लिए कहा जाता है। विभाग का दावा है कि जल जीवन मिशन के तहत ट्यूबवेल से आने वाला पानी पीने योग्य है।
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ग्राम पंचायत लहबरी की एक समूह में संगीता, रजनी, कुसुम, शीतल, कुसुमलता साथ काम कर रही हैं। संगीता व रजनी ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद मौके पर ही वह बेहतर ढंग से जांच कर रही हैं। जल निगम से मिलने वाली आर्थिक सहायता से काफी मदद मिल रही है।
इन मानकों की होती है जांच
विभाग की तरफ से इनको किट उपलब्ध कराकर प्रशिक्षण दिया गया है। इससे वह मौके पर ही पानी में टीडीएस, क्लोराइड, आर्सेनिक, आयरन, कठोरता, पोटेंशियल ऑफ हाइड्रोजन की जांच करती हैं। इसमें पीने योग्य पानी में टीडीएस 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और पीएच मान 6.5 से 8.5 के बीच होना होना चाहिए। क्लोराइड 250 मिलीग्राम प्रति लीटर, फ्लोराइड 1.0 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर, आर्सेनिक 0.01 मिलीग्राम प्रति लीटर व आयरन 0.3 मिलीग्राम प्रति लीटर होना चाहिए। इनकी कमी या अधिकता दोनों दांतों व हड्डियों के लिए नुकसानदायक है।

वर्जन
ग्राम पंचायत स्तर पर जल सखियों की ओर से मौके पर पानी की जांच करके परिणाम बता दिया जाता है, ताकि ग्रामीण शुद्ध पानी पी सकें। एक जलस्रोत के पानी की साल में तीन बार जांच करनी होती है। इसके बदले इनको आर्थिक सहायता दी जाती है। - आकांक्षा सिंह, अधिशासी अभियंता, जल निगम ग्रामीण
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