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Bareilly News: सलीम बने ओमप्रकाश को पहचान दिलाने के लिए परिवार रजिस्टर की ली जाएगी मदद
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शाही। सलीम बने ओम प्रकाश को पहचान दिलाने के लिए परिवार रजिस्टर की मदद ली जाएगी। इसके बाद ग्राम प्रधान और परिजन उनका एसआईआर फॉर्म भरवाने में मदद करेंगे। शनिवार को वापस दिल्ली जाने के बाद मंगलवार तक परिवार सहित ओमप्रकाश के गांव वापस आने की उम्मीद है।
ग्राम प्रधान वीरेंद्र राजपूत ने बताया कि ओमप्रकाश (55) जब शुक्रवार को दिल्ली से वापस गांव आए थे, तब उनके साथ कोई भी डॉक्यूमेंट नहीं था, अब गांव की आईडी से ही एसआईआर फॉर्म भरवाने में मदद की जाएगी। इसके लिए वह बरेली तहसील में परिवार रजिस्टर तक का रिकॉर्ड निकलवाएंगे। मंगलवार तक ओमप्रकाश ने परिवार के साथ गांव आने के लिए कहा है।
शुक्रवार को शाही के काशीपुर गांव पहुंचे ओम प्रकाश ने बताया कि वह 15 साल की उम्र में ही घर में अनबन होने के बाद गांव छोड़कर चले गए थे। बरेली में कुछ समय काम करने के बाद वह दिल्ली पहुंच गए। दिल्ली में उस्मानपुर में उनकी पहचान वोटर आईडी में सलीम पुत्र ताहिर हुसैन की कर दी गई। अब एसआईआर फॉर्म भरने के लिए वोटर आईडी में दर्ज पिता ताहिर हुसैन की कोई भी आईडी न मिलने पर वह वापस गांव आने पर मजबूर हो गए। चार दिन पूर्व 28 नवंबर को अपने छोटे बेटे जुम्मन के साथ ओमप्रकाश उर्फ सलीम जब काशीपुर गांव वापस आए तो खुशी में लोगों ने फूल माला पहनकर ढोल नगाड़ों के साथ गांव में घुमाकर स्वागत किया।
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ओमप्रकाश के दिल्ली से गांव आने के बाद पत्नी शाहरबानो परेशान हो गई। बार-बार फोन करके ओम प्रकाश को उन्होंने दिल्ली बुला लिया। शनिवार को वह कुछ दिनों में परिवार के साथ वापस आने की बात कह कर दिल्ली चले गए।
कुछ खुश तो कुछ संपत्ति के बंटवारे को लेकर परेशान
ग्रामीण प्रेमगिरी, गंगा सहाय, चमेली देवी ने बताया कि ओमप्रकाश के चालीस साल के बाद वापस गांव आने पर उनके भाई रोशन लाल भी खुश हुए। लेकिन, कुछ परिजन संपत्ति के बंटवारे की आशंका में परेशान हो गए। कुछ लोगों ने वापसी जाते समय उनको गांव अब फिर से न आने की हिदायत भी दी गई। संवाद
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ग्राम प्रधान वीरेंद्र राजपूत ने बताया कि ओमप्रकाश (55) जब शुक्रवार को दिल्ली से वापस गांव आए थे, तब उनके साथ कोई भी डॉक्यूमेंट नहीं था, अब गांव की आईडी से ही एसआईआर फॉर्म भरवाने में मदद की जाएगी। इसके लिए वह बरेली तहसील में परिवार रजिस्टर तक का रिकॉर्ड निकलवाएंगे। मंगलवार तक ओमप्रकाश ने परिवार के साथ गांव आने के लिए कहा है।
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शुक्रवार को शाही के काशीपुर गांव पहुंचे ओम प्रकाश ने बताया कि वह 15 साल की उम्र में ही घर में अनबन होने के बाद गांव छोड़कर चले गए थे। बरेली में कुछ समय काम करने के बाद वह दिल्ली पहुंच गए। दिल्ली में उस्मानपुर में उनकी पहचान वोटर आईडी में सलीम पुत्र ताहिर हुसैन की कर दी गई। अब एसआईआर फॉर्म भरने के लिए वोटर आईडी में दर्ज पिता ताहिर हुसैन की कोई भी आईडी न मिलने पर वह वापस गांव आने पर मजबूर हो गए। चार दिन पूर्व 28 नवंबर को अपने छोटे बेटे जुम्मन के साथ ओमप्रकाश उर्फ सलीम जब काशीपुर गांव वापस आए तो खुशी में लोगों ने फूल माला पहनकर ढोल नगाड़ों के साथ गांव में घुमाकर स्वागत किया।
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ओमप्रकाश के दिल्ली से गांव आने के बाद पत्नी शाहरबानो परेशान हो गई। बार-बार फोन करके ओम प्रकाश को उन्होंने दिल्ली बुला लिया। शनिवार को वह कुछ दिनों में परिवार के साथ वापस आने की बात कह कर दिल्ली चले गए।
कुछ खुश तो कुछ संपत्ति के बंटवारे को लेकर परेशान
ग्रामीण प्रेमगिरी, गंगा सहाय, चमेली देवी ने बताया कि ओमप्रकाश के चालीस साल के बाद वापस गांव आने पर उनके भाई रोशन लाल भी खुश हुए। लेकिन, कुछ परिजन संपत्ति के बंटवारे की आशंका में परेशान हो गए। कुछ लोगों ने वापसी जाते समय उनको गांव अब फिर से न आने की हिदायत भी दी गई। संवाद