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खतरे की जद में ले गए स्वास्थ्य विभाग के बहाने
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कम सैंपल लिए जाने के बावजूद बढ़े संक्रमण के मामले, शासन सख्त नाराज
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खुद उड़ाईं निर्देशों की धज्जियां और आईवीआरआई पर मढ़ते रहे आरोप
बरेली। जिला प्रशासन की टालमटोल और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की बहानेबाजी के बीच एक तरफ जिला सैंपल लेने के मामले में पिछड़कर प्रदेश में लगभग अंतिम पायदान पर पहुंच गया तो दूसरी तरफ इसके बावजूद कोरोना संक्रमण के मामले चौंकाने वाली सीमा तक बढ़ गए। आंकड़ों को दुरुस्त रखकर लोगों को खतरे की जद में लाने वाले अफसरों पर अब शासन ने नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य विभाग को ज्यादा से ज्यादा सैंपल लेकर उनकी जांच कराने को कहा गया है ताकि संक्रमितों को चिन्हित कर कोरोना पर काबू पाने के उपाय किए जा सकें। यहां बता दें कि हर दिन हो रही सैंपलिंग की दो जुलाई को हुई समीक्षा में बरेली 73वें पायदान पर मिला है।
आईसीएमआर के विशेषज्ञों ने कुछ समय पहले सीरो सर्विलांस के तहत जिले के अलग-अलग इलाकों के दस क्लस्टर बनाकर उनमें करीब चार सौ लोगों के रैंडम सैंपल लिए थे। मकसद यह पता लगाना था कि जिले में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति है या नहीं। इस सर्वे में तीन ऐसे लोग चिन्हित हुए जो संक्रमित होकर स्वस्थ भी हो गए। इस रिपोर्ट पर चिकित्सकों ने सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत की आशंका जताई लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इसे खारिज कर दिया। सैंपल कम लेने पर सवाल उठे तो यह कहकर आईवीआरआई पर दोष मढ़ दिया कि उसकी लैब सीमित सैंपलों की ही जांच कर पा रही है और आईवीआरआई अफसरों ने उन्हें कम सैंपल लेने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग के इस बयान पर आईवीआरआई ने आपत्ति भी जताई थी। दावा किया था कि जितने सैंपल दिए जा रहे हैं, उन सभी की जांच की जा रही है। अफसर दोषारोपण करते रहे गए और रिपोर्ट पिछड़ गई संक्रमण बढ़ रहा है।
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72 जिलों से पिछड़ गया बरेली डॉक्टर बोले- ये तो होना ही था
कोरोना से निपटने के चुनौती के बीच भी स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ और घोटालों के आरोप तो लगे लेकिन सैंपल लेने में लापरवाही बरकरार रही। प्रभारी मंत्री के साथ स्वास्थ्य राज्यमंत्री के निर्देशों का भी कोई असर नहीं हुआ। इस बीच सैंपल लेने के मामले में बरेली जिला 73वीं रैंक पर पहुंच गया। संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक सैंपल ज्यादा लिए जाते तो संक्रमित भी ज्यादा मिलते। हालांकि उन्हें आइसोलेट करके और लोगों के संपर्क में आने से बचाया जा सकता था और संक्रमण की चेन रोकी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी अपनी जगह है, लोग खुद भी सतर्क रहें। घरों से बाहर जाएं तो पूरी एहतियात बरतें। बुजुर्ग और बच्चों को बाहर न जाने दिया जाए। बाहर से आने के बाद नहाधोकर और कपड़े बदलकर ही घर में प्रवेश किया जाए।
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सैंपल बढ़ाने के लिए एमएमयूू और तीन सौ बेड अस्पताल की टीम को निर्देश दे दिए गए हैं। एमएमयू को रोज एक इलाके में सभी संदिग्ध लोगों के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ अब सभी सीएचसी पर भी सैंपल लेने का इंतजाम किया जा रहा है। लोगों से अनुरोध है कि अगर वे किसी संक्रमित के संपर्क में आए हैं तो छिपाए नहीं, यह अपराध है। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ जिला सर्विलांस अधिकारी
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खुद उड़ाईं निर्देशों की धज्जियां और आईवीआरआई पर मढ़ते रहे आरोप बरेली। जिला प्रशासन की टालमटोल और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की बहानेबाजी के बीच एक तरफ जिला सैंपल लेने के मामले में पिछड़कर प्रदेश में लगभग अंतिम पायदान पर पहुंच गया तो दूसरी तरफ इसके बावजूद कोरोना संक्रमण के मामले चौंकाने वाली सीमा तक बढ़ गए। आंकड़ों को दुरुस्त रखकर लोगों को खतरे की जद में लाने वाले अफसरों पर अब शासन ने नाराजगी जताई है। स्वास्थ्य विभाग को ज्यादा से ज्यादा सैंपल लेकर उनकी जांच कराने को कहा गया है ताकि संक्रमितों को चिन्हित कर कोरोना पर काबू पाने के उपाय किए जा सकें। यहां बता दें कि हर दिन हो रही सैंपलिंग की दो जुलाई को हुई समीक्षा में बरेली 73वें पायदान पर मिला है।
आईसीएमआर के विशेषज्ञों ने कुछ समय पहले सीरो सर्विलांस के तहत जिले के अलग-अलग इलाकों के दस क्लस्टर बनाकर उनमें करीब चार सौ लोगों के रैंडम सैंपल लिए थे। मकसद यह पता लगाना था कि जिले में सामुदायिक संक्रमण की स्थिति है या नहीं। इस सर्वे में तीन ऐसे लोग चिन्हित हुए जो संक्रमित होकर स्वस्थ भी हो गए। इस रिपोर्ट पर चिकित्सकों ने सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत की आशंका जताई लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने इसे खारिज कर दिया। सैंपल कम लेने पर सवाल उठे तो यह कहकर आईवीआरआई पर दोष मढ़ दिया कि उसकी लैब सीमित सैंपलों की ही जांच कर पा रही है और आईवीआरआई अफसरों ने उन्हें कम सैंपल लेने को कहा है। स्वास्थ्य विभाग के इस बयान पर आईवीआरआई ने आपत्ति भी जताई थी। दावा किया था कि जितने सैंपल दिए जा रहे हैं, उन सभी की जांच की जा रही है। अफसर दोषारोपण करते रहे गए और रिपोर्ट पिछड़ गई संक्रमण बढ़ रहा है।
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72 जिलों से पिछड़ गया बरेली डॉक्टर बोले- ये तो होना ही था
कोरोना से निपटने के चुनौती के बीच भी स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़ और घोटालों के आरोप तो लगे लेकिन सैंपल लेने में लापरवाही बरकरार रही। प्रभारी मंत्री के साथ स्वास्थ्य राज्यमंत्री के निर्देशों का भी कोई असर नहीं हुआ। इस बीच सैंपल लेने के मामले में बरेली जिला 73वीं रैंक पर पहुंच गया। संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक सैंपल ज्यादा लिए जाते तो संक्रमित भी ज्यादा मिलते। हालांकि उन्हें आइसोलेट करके और लोगों के संपर्क में आने से बचाया जा सकता था और संक्रमण की चेन रोकी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी अपनी जगह है, लोग खुद भी सतर्क रहें। घरों से बाहर जाएं तो पूरी एहतियात बरतें। बुजुर्ग और बच्चों को बाहर न जाने दिया जाए। बाहर से आने के बाद नहाधोकर और कपड़े बदलकर ही घर में प्रवेश किया जाए।
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सैंपल बढ़ाने के लिए एमएमयूू और तीन सौ बेड अस्पताल की टीम को निर्देश दे दिए गए हैं। एमएमयू को रोज एक इलाके में सभी संदिग्ध लोगों के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ अब सभी सीएचसी पर भी सैंपल लेने का इंतजाम किया जा रहा है। लोगों से अनुरोध है कि अगर वे किसी संक्रमित के संपर्क में आए हैं तो छिपाए नहीं, यह अपराध है। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ जिला सर्विलांस अधिकारी