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विश्वविद्यालय में बनेगा ओलंपिक स्तर का स्विमिंग पूल
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में ओलंपिक गेम्स के स्तर का स्विमिंग पूल बनवाया जाएगा, ताकि यहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जा सकें। विश्वविद्यालय ने इसका प्रोजेक्ट बनाने के लिए यूपीएसआईडीसी के अफसरों से संपर्क किया है।
एसोसिएशन पर इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) की ओर से हर साल महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर तमाम प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाती हैं। सुविधाओं के अनुसार ही कॉलेजों को इन खेलों में मेजबानी का मौका मिलता है। तैराकी प्रतियोगिता के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बरेली कॉलेज का स्विमिंग पूल बंद पड़ा है और विश्वविद्यालय में कोई स्विमिंग पूल बना नहीं है। ऐसे में तैराकी प्रतियोगिता के लिए विश्वविद्यालय को स्पोर्ट्स स्टेडियम की मदद लेनी पड़ती है। वहीं, तैराकों की प्रैक्टिस भी नहीं हो पाती है। इसको देखते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन कैंपस में ही एक स्विमिंग पूल बनवाने की तैयारी कर रहा है। अफसरों का कहना है कि यह स्वीमिंग पूल ओलंपिक गेम्स के स्तर का होगा, ताकि तैराकों को यहां पर ही सारी सुविधाएं मिल सके।
दिसंबर तक तैयार हो जाएगा सिंथेटिक ट्रैक
भले ही विश्वविद्यालय से बड़े खिलाड़ी नहीं निकल पा रहे हों, लेकिन खेल सुविधाओं के नाम पर विश्वविद्यालय लगातार बड़े खर्च कर रहा है। इन दिनों विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स ग्राउंड में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक ट्रैक भी बनाया जा रहा है। यह ट्रैक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का है।
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एसोसिएशन पर इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) की ओर से हर साल महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर तमाम प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाती हैं। सुविधाओं के अनुसार ही कॉलेजों को इन खेलों में मेजबानी का मौका मिलता है। तैराकी प्रतियोगिता के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर खासी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। बरेली कॉलेज का स्विमिंग पूल बंद पड़ा है और विश्वविद्यालय में कोई स्विमिंग पूल बना नहीं है। ऐसे में तैराकी प्रतियोगिता के लिए विश्वविद्यालय को स्पोर्ट्स स्टेडियम की मदद लेनी पड़ती है। वहीं, तैराकों की प्रैक्टिस भी नहीं हो पाती है। इसको देखते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन कैंपस में ही एक स्विमिंग पूल बनवाने की तैयारी कर रहा है। अफसरों का कहना है कि यह स्वीमिंग पूल ओलंपिक गेम्स के स्तर का होगा, ताकि तैराकों को यहां पर ही सारी सुविधाएं मिल सके।
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दिसंबर तक तैयार हो जाएगा सिंथेटिक ट्रैक
भले ही विश्वविद्यालय से बड़े खिलाड़ी नहीं निकल पा रहे हों, लेकिन खेल सुविधाओं के नाम पर विश्वविद्यालय लगातार बड़े खर्च कर रहा है। इन दिनों विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स ग्राउंड में करीब सात करोड़ रुपये की लागत से सिंथेटिक ट्रैक भी बनाया जा रहा है। यह ट्रैक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का है।
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