Bareilly: कोर्ट ने गर्भपात कराने के दोषी को सुनाई उम्रकैद की सजा, पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पुलिस को पहले से पता था कि दुष्कर्म का आरोप संदिग्ध है। इसके बाद भी आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म के मामले में भी आरोपपत्र दाखिल किया गया। कोर्ट ने आदेश की कॉपी एसएसपी को भेजते हुए विवेचक और सीओ के खिलाफ कार्रवाई की अपेक्षा की है।
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बरेली के अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम रवि कुमार दिवाकर ने एक बार फिर विवेचक की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। दुष्कर्म और गर्भपात के मुकदमे में कोर्ट ने कहा कि पुलिस को पहले से दुष्कर्म का आरोप संदिग्ध होने की जानकारी थी, फिर भी आरोपपत्र पेश कर दिया। अदालत में दुष्कर्म का आरोप साबित न हो सका। कोर्ट ने अभियुक्त को गर्भपात कराने और धमकाने का दोषी करार देते हुए उम्रकैद व 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
भोजीपुरा थाना क्षेत्र की महिला ने थाना क्षेत्र के ही दभौरा गांव निवासी यूसुफ उर्फ यूसुब शाह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महिला के अनुसार उसके पति की दो साल पहले मौत हो गई थी। गुजारा करने के लिए वह एक फैक्टरी में नौकरी करने लगी। वहां पहले से नौकरी कर रहे यूसुफ उसे निकाह करने का झांसा दिया। इस पर वह किराये का मकान लेकर अपने छोटे बच्चे के साथ रहने लगी। यूसुफ भी वहां आता था। छह महीने तक वह उसके साथ संबंध बनाता रहा।
वह गर्भवती हुई तो यूसुफ ने कहा कि ऐसी दशा में निकाह नहीं हो सकता। इसके बाद यूसुफ ने तीन अगस्त 2023 को एकतानगर के एक केंद्र पर उसका अल्ट्रासाउंड कराया। यूसुफ अपने रिश्तेदार ताहिर और जाबिर के साथ उसे हवाई अड्डे के पास एक अस्पताल में ले गया। वहां उसे गर्भपात की दवा खिला दी। इससे उसका गर्भपात हो गया। कुछ दिन बाद ताहिर और जाबिर के साथ यूसुफ के पिता उसके कमरे पर धमकाने आए।
समझौते के बाद मुकरा गया था यूसुफ
उसने उच्चाधिकारियों से शिकायत की तो आरोपी पक्ष ने 25 अगस्त 2023 को भोजीपुरा थाने में समझौता कर लिया। तय हुआ कि यूसुफ उससे जल्द निकाह करेगा। बाद ने वह मुकर गया। उसे और उसके बच्चे को मारने की धमकी दी। कोर्ट ने अभियोजन और बचाव पक्ष के वकीलों, गवाहों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद यूसुफ को गर्भपात कराने और धमकाने के मामले में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
विवेचक और सीओ पर कार्रवाई के लिए एसएसपी को लिखा
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि पुलिस को पहले से पता था कि दुष्कर्म का आरोप संदिग्ध है। इसके बाद भी आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म के मामले में भी आरोपपत्र दाखिल किया गया। तत्कालीन सीओ ने भी अपनी पर्यवेक्षण शक्तियों का सही इस्तेमाल नहीं किया। कोर्ट का काम पीड़ित को न्याय देने के साथ ही अभियुक्त के अधिकारों की रक्षा करना भी है। कोर्ट ने आदेश की कॉपी एसएसपी को भेजते हुए विवेचक और सीओ के खिलाफ आईपीसी की धारा 219 के तहत कार्रवाई की अपेक्षा की है।