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बरेली में बाजार बंदी पर व्यापारी संगठनों में टकराव

Sat, 04 Jul 2020 02:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2020 02:21 AM IST
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Conflict between business organizations over market closure in Bareilly
डीएम से वार्ता करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

एक गुट का सात जुलाई से 15 दिन की  बंदी का एलान, दूसरा विरोध पर उतरा
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दोनों गुटों की ओर से डीएम को दिए गए ज्ञापन, शहर भर के व्यापारियों के बीच भी बहस का माहौल

बरेली। शहर का बाजार 15 दिन के लिए बंद करने की अपील के पीछे कोरोना संक्रमण की दहशत है या व्यापारी संगठनों की राजनीति, शुक्रवार को उठे ऐसे सवालों के बीच संयुक्त व्यापार मंडल ने सात जुलाई से 15 दिन के लिए बाजार बंद करने का एलान कर दिया। हाथ के हाथ व्यापारियों का दूसरा संगठन उद्योग व्यापार मंडल इस एलान के विरोध में उतर आया। दोनों संगठनों की ओर से अपने-अपने तर्कों के साथ डीएम को ज्ञापन भी दे दिए गए। दो प्रमुख व्यापारी संगठनों के इस मुद्दे पर आमने-सामने आने के बाद शहर भर के व्यापारियों के बीच भी समर्थन और विरोध की सुगबुगाहट शुरू हो गई।
कोरोना संक्रमण जब तक प्रवासियों तक सीमित था तब तक शहर में बेफिक्री का माहौल था लेकिन करीब हफ्ता भर से शहर में कई प्रमुख लोगों के संक्रमित होने के साथ संक्रमण के एकाएक बढ़े मामलों ने इस बहस की शुरुआत करा दी कि कोरोना के लिए शहर के बाजारों में भीड़भाड़ का माहौल खतरनाक हो चुका है। कुछ व्यापारी नेताओं की ओर से यह खतरा कम करने के लिए 15 दिन के लिए बाजार बंद रखने का प्रस्ताव सोशल मीडिया पर बृहस्पतिवार को व्यापारियों के बीच रखा तो समर्थन और विरोध के बीच गर्मागर्मी भी बढ़ गई। इसी बीच शुक्रवार को संयुक्त व्यापार मंडल ने बैठक की जिसमें 15 दिन के लिए बाजार बंद रखने का निर्णय ले लिया गया। इसके बाद संयुक्त व्यापार मंडल के पदाधिकारी डीएम से मिलने कलक्ट्रेट पहुंचे और ज्ञापन की शक्ल में अपना फैसला उनके सुपुर्द कर दिया।
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जिला प्रशासन की ओर से तो इस ज्ञापन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई लेकिन बाजार बंद करने के निर्णय की जानकारी दूसरे प्रमुख संगठन उद्योग व्यापार मंडल तक पहुंची तो वह इसके विरोध में उतर आया। उद्योग व्यापार मंडल की ओर से भी डीएम को एक ज्ञापन देकर बाजार बंदी के फैसले पर विरोध जताया गया। इसके साथ व्यापारियों से भी अपील की कि आपसी दूरी और सफाई-सैनिटाइजेशन का ख्याल रखते हुए वे अपनी दुकानें खोलते रहें। उद्योग व्यापार मंडल के नेताओं ने कहा कि लॉकडाउन में पहले ही कारोबार काफी पिछड़ गया है। अब अगर फिर कारोबार बंद करा दिया गया तो हालात खराब हो जाएंगे। इस बीच कुछ और संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की कि वह सभी दिन सभी दिशाओं में बाजार खोलने की अनुमति दे। कुछ संगठनों 15 दिन तक बंदी को अव्यवहारिक बताया है।
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स्वेच्छा से बाजार बंद करना चाहते हैं व्यापारी, अनुमति दे प्रशासन

संयुक्त व्यापार मंडल ने डीएम को दिए ज्ञापन में कहा है कि कोरोना का संक्रमण तेजी से फैलता जा रहा है। इसलिए सभी व्यापारी और संगठन सात जुलाई से 15 दिन के लिए स्वेच्छा से बाजार बंद करना चाहते हैं। खतरा देखते हुए प्रशासन भी इसमें सहयोग करे। डीएम के पास पहुंचे व्यापारी नेताओं में विशाल मेहरोत्रा, शोभित सक्सेना, रामकृष्ण शुक्ला, देवेंद्र जोशी, अमरजीत सिंह आदि शामिल थे। इससे पहले चौपुला पर संगठन कार्यालय में हुई बैठक में सभी संगठन के सभी घटकों ने अपने सुझाव रखे और सात जुलाई से 15 दिन के लिए बाजार बंद रखने पर सहमति जताई। 

बाजार बंदी कोई विकल्प नहीं, ग्राहक के साथ व्यापारी भी होंगे प्रभावित

उद्योग व्यापार मंडल के नेताओं ने भी डीएम को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा है कि 15 दिन तक बाजार बंद करना कोरोना संक्रमण से बचाव का कोई विकल्प नहीं है। प्रांतीय महामंत्री राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि बाजार बंदी से व्यापार और ग्राहक दोनों पर खराब असर पड़ेगा। कुछ लोग बाजार बंद करने की अफवाह फैला रहे हैं। इससे बाजार में भ्रम जैसी स्थिति बनी हुई। इसे साफ करना जरूरी है। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रशासन की ओर से तय रोस्टर से ही बाजार खुलेगा। इस मौके पर दुर्गेश खटवानी, संजीव चांदना, मनमोहन सब्बरबाल आदि मौजूद रहे।

बाजार बंद कराने वालों पर प्रशासन कार्रवाई करे

व्यापार सेवा संघ की नैनीताल मार्ग स्थित संगठन कार्यालय पर हुई बैठक में बाजार बंद कराने के लिए अफवाहें फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई। प्रशासन से आग्रह किया गया कि 15 दिन तक बाजार बंद कराने पर आमादा लोगों पर कार्रवाई के साथ अब हर दिन बाजार खुलने की अनुमति दी जानी चाहिए। बैठक में व्यापारी नेता नदीम शम्सी, अमित खनेजा, अमित सरपाल, नावेद, दीपक अग्रवाल आदि ने विचार रखे।

बंदी पर व्यापारी गुट आमने-सामने व्हाट्सएप पर भी शुरू हुई जंग

कोरोना संक्रमण के खतरे से बचने के लिए 15 दिन बाजार बंद कराने की पहल पर शुरू हुए विवाद के बाद अब समर्थन और विरोध को लेकर व्यापारियों के बीच व्हाट्सएप ग्रुपों पर भी जंग शुरू हो गई है। क्या 15 दिन बाजार बंद होने से कोरोना भाग जाएगा और व्यापारी नेता अगर कोई न कोई शगूफा नहीं छोड़ेंगे तो अपनी ‘दुकान’ कैसे चलाएंगे जैसी टिप्पणियों के साथ बृहस्पतिवार से ही इन ग्रुपों में गरमागरम बहस जारी है। यह भी कहा जा रहा है कि व्यापारी बाजार को अपने हिसाब से चलाएंगे। प्रशासन जो रोस्टर लागू करेगा, उसका पालन किया जाएगा। अलग-अलग ग्रुप में दोनों पक्षों की ओर से जारी अपीलें और डीएम को सौंपे ज्ञापन की कॉपी भी डाली गई हैं। कुछ लोग यह भी टिप्पणी कर रहे हैं कि ये सब व्यापारी संगठनों का आपसी झगड़ा है इसलिए इस पर कोई ध्यान नहीं देना चाहिए।

बंदी किसी समस्या का हल नहीं, उल्टे मुश्किलें बढ़ेंगी

रोस्टर ही ऐसा है कि बाजार महीने में 12 दिन खुल पा रहा है। अब 15 दिन बंदी का एलान समझ से बाहर है। अब तक बाजार में कोरोना एक भी केस सामने नहीं आया। प्रशासन को इसकी समीक्षा कर सभी दिन सभी दिशा में दुकानें खुलवानी चाहिए। व्यापारी अपनी दुकान अपनी मर्जी से कभी भी बंद कर सकते हैं। इसके लिए दहशत का माहौल बनाने की क्या जरूरत है। - सतीश अग्रवाल, वरिष्ठ व्यापारी नेता
बाजार 15 दिन तक जबरन बंद करने का माहौल नहीं बनना चाहिए। अगर व्यापारी बाजार बंद करेंगे तो उनके स्टाफ का वेतन और अपना घर चलाने की समस्या कैसे हल होगी। लॉकडाउन में खराब हुई स्थिति से अब तक व्यापारी नहीं उबर पाए हैं। अब ऐसी अफवाहों से बाजार और कारोबार दोनों और प्रभावित होंगे। - राजीव अग्रवाल, किराना व्यापारी
लॉकडाउन में ही कारोबार इतना ज्यादा प्रभावित हो चुका है कि इसकी भरपाई अब तक नहीं हो पाई है। अब भी हर दिन सिर्फ आधा बाजार खुल रहा है। इसके बावजूद 15 दिन के लिए अगर दुकाने बंद कर दी जाएंगी तो देनदारियाें का बोझ हावी हो जाएगा। हमारे कारोबार में वैसे ही कुछ दिन और काम हो पाएगा क्योंकि बारिश का सीजन शुरू हो गया है। - सौरभ भसीन, विद्युत उपकरण विक्रेता


15 दिन के लिए बाजार बंद करने का बेवजह प्रचार हो रहा है। इससे भय और भ्रम का माहौल बन गया है। शुक्रवार को स्थिति साफ हो गई। स्वेच्छा से कोई भी अपना प्रतिष्ठान बंद कर सकता है लेकिन इसके लिए दबाव नहीं बनाना चाहिए। प्रशासन को सभी दिन दुकानों को खोलने की अनुमति देनी चाहिए। - संदीप अग्रवाल मिंटू, अध्यक्ष सराफा एसोसिएशन

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