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गोवंशीय पशुओं की मौत कैसे हुई... रखा जाएगा रिकॉर्ड
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बरेली। गोवंश आश्रय स्थलों में रहने वाले पशुओं की मौत कब और कैसे हुई.. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ पूरा ब्योरा रजिस्टर में लिखा जाएगा। जिले के सभी पशुओं की अब जियो टैगिंग भी कराई जाएगी। गौवंश आश्रय स्थलों की समीक्षा बैठक में डीएम ने कई निर्देश दिए।
कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 169 गौ आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं। 144 ग्रामीण क्षेत्र के हैं और 25 शहरी क्षेत्र के हैं। डीएम ने कहा कि उन पशु पालकों पर प्रतिदिन 50 रुपए के हिसाब से जुर्माना वसूला जाए, जिनके पशु खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दते हैं। बोले कि- जिन गोशालाओं में पशुओं की संख्या कम है, वहां दूसरी गौशालाओं से पशु स्थानांतरित किया जाए। ताकि हर गौशाला में गौवंश की समुचित देखरेख हो सके। उन्होंने कहा कि उपचार न होने की वजह से गोवंश की मौत पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी । डीएम ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत पर तीन से पांच गौ आश्रय स्थल होने चाहिए। डीएम ने सीडीओ सत्येंद्र कुमार को हर सप्ताह इसकी समीक्षा का भी निर्देश दिया। उन्होंने मृृत पशुओं के मामले को लेकर कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इसके वास्तविक आंकड़े रखे जाने चाहिए कि किस तिथि में कितने पशुओं की मृृत्यु किस वजह से हुई है। उनका इलाज किस प्रकार हुआ है। गौशालाओं में पशुओं के लिए भूसे की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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कलक्ट्रेट सभागार में हुई बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि जिले में कुल 169 गौ आश्रय स्थल संचालित हो रहे हैं। 144 ग्रामीण क्षेत्र के हैं और 25 शहरी क्षेत्र के हैं। डीएम ने कहा कि उन पशु पालकों पर प्रतिदिन 50 रुपए के हिसाब से जुर्माना वसूला जाए, जिनके पशु खेतों में खड़ी फसलों को बर्बाद कर दते हैं। बोले कि- जिन गोशालाओं में पशुओं की संख्या कम है, वहां दूसरी गौशालाओं से पशु स्थानांतरित किया जाए। ताकि हर गौशाला में गौवंश की समुचित देखरेख हो सके। उन्होंने कहा कि उपचार न होने की वजह से गोवंश की मौत पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी । डीएम ने कहा कि प्रत्येक ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत पर तीन से पांच गौ आश्रय स्थल होने चाहिए। डीएम ने सीडीओ सत्येंद्र कुमार को हर सप्ताह इसकी समीक्षा का भी निर्देश दिया। उन्होंने मृृत पशुओं के मामले को लेकर कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इसके वास्तविक आंकड़े रखे जाने चाहिए कि किस तिथि में कितने पशुओं की मृृत्यु किस वजह से हुई है। उनका इलाज किस प्रकार हुआ है। गौशालाओं में पशुओं के लिए भूसे की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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