Bareilly: बेंत की घटी लचक, फीकी हुई जरी-जरदोजी की चमक, राजनीतिक दलों के एजेंडे से गायब हैं स्थानीय मुद्दे
प्रदेश सरकार ने बरेली के जरी-जरदोजी, बेंत के फर्नीचर और सुनारी को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल किया है, लेकिन यहां के उद्यमी इस विश्व विख्यात कला की बदहाली को दूर किए जाने और इसे नया कलेवर दिए जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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जरी-जरदोजी और बेंत के फर्नीचर के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान बनाने वाली बरेली के स्थानीय मुद्दे इस बार लोकसभा चुनाव के शोर में अभी तक गायब हैं। राजनीतिक दलों के एजेंडे में बरेली में होने वाली सोने की कढ़ाई और बेंत की बुनाई के काम को बढ़ावा देने की प्राथमिकता नजर नहीं आ रही। इससे इस कारोबार से जुड़े उद्यमी मायूस हैं।
प्रदेश सरकार ने बरेली के जरी-जरदोजी, बेंत के फर्नीचर और सुनारी को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल किया है, लेकिन यहां के उद्यमी इस विश्वविख्यात कला की बदहाली को दूर किए जाने और इसे नया कलेवर दिए जाने की आस लगाए हैं। वे चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में इन कलाओं के उत्थान की गूंज उठे। इससे जब चुनाव पूरा होगा तो वह अपने सांसद से भी उनके वादों का हिसाब-किताब कर पाएंगे।
अंतरराष्ट्रीय उत्पादों से मिल रही चुनौती
उद्यमियों का कहना है कि जीएसटी की उलझन, कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों, अंतिम उत्पादों की लगभग स्थिर कीमत, कई निषेध और अंतरराष्ट्रीय उत्पादों से मिल रही चुनौती ने यहां की जरी-जरदोजी और बेंत के फर्नीचर की चमक को कमजोर किया है।
पिछले कुछ समय से जरी-जरदोजी के कच्चे माल जैसे रेशम, करदाना मोती, कोरा कसाब, मछली के तार, नक्शी, नग, मोती, ट्यूब, चनाला, जरकन नोरी, पत्तियां, दर्पण, सोने की चेन आदि की कीमतों में वृद्धि हुई है। वहीं तैयार माल की कीमतें जस की तस हैं। ऐसा ही हाल बेंत के फर्नीचर का भी है।
जरी-जरदोजी कारोबारी शाकिर अली ने कहा कि हमारी लंबे समय से मांग है कि सरकार की ओर से इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बजट जारी किया जाए। सरकार की ओर से ऐसा कोई केंद्र खुलना चाहिए, जिसमें कारीगरों के लिए नए-नए डिजाइन उपलब्ध हों। वर्तमान में डिजाइनर के तैयार डिजाइन बहुत महंगे होते हैं, जो आम करीगरों की पहुंच से दूर हैं।
जरी-जरदोजी कारोबारी हिमकत अली ने कहा कि बरेली की वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी जरी-जरदोजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार से हमें बहुत उम्मीद है। मगर, इसके लिए स्थानीय स्तर पर ध्यान आकृष्ट कराना होगा। हमें उम्मीद है कि इस चुनाव में लोग हमारी बात समझेंगे और इस क्षेत्र के लिए काम करेंगे।
इस नियम में बदलाव की मांग
बरेली सराफ एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में 50 हजार रुपये से ऊपर की सोने की खरीद पर आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है, जबकि 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 70 हजार रुपये है। इस नियम में बदलाव के लिए हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं। ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं है।
बेंत फर्नीचर कारोबारी नत्थू हुसैन ने कहा कि बेंत के फर्नीचर को चीन सहित अन्य देशों से भी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ऐसे में बेंत उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी की भी जरूरत है। इसके लिए हम लंबे समय से सरकार से मांग भी कर रहे हैं।
बरेली सराफ एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने बताया कि सरकार की कुछ योजनाएं आती हैं, लेकिन उनका लाभ चुनिंदा लोगों को ही मिलता है। अगर स्थानीय स्तर पर पहल हो व सुनारी उद्योग के लिए एक नीति बने तो यह उद्योग नए कलेवर में आ सकता है।