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कारसेवक रामगोपाल की आंखों देखी: अयोध्या में गोलीबारी के बीच आंसूगैस के गोले नाले में फेंक बढ़ते रहे आगे
Mon, 08 Jan 2024 04:03 PM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 08 Jan 2024 04:03 PM IST
सार
बरेली के रामगोपाल गुप्ता अयोध्या में कारसेवा के साक्षी रहे हैं। उन्होंने बताया कि दो नवंबर 1990 को अपने दल के साथ अयोध्या में ही थे। उस दिन को याद कर वह सिहर जाते हैं। अमर उजाला से बातचीत में रामगोपाल ने उस दिन की आंखों देखी बताई।
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कारसेवक रामगोपाल गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दो नवंबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियां बरस रही थीं। प्रशासन की बर्बर कार्रवाई के दौरान जत्थे में शामिल कई कारसेवकों को गोली लगी। आंसूगैस से बेचैन आंखों के साथ करीब डेढ़ घंटे तक मैं जन्मभूमि के नजदीक ही रहा। इस दौरान मुझसे थोड़ी दूरी पर आंसूगैस का गोला आकर गिरा तो जान की परवाह किए बिना मैं आगे बढ़ा और उसे उठाकर नाले में फेंक दिया। बरेली के कारसेवक रामगोपाल गुप्ता ने ये बातें कहीं।
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अमर उजाला के अभिषेक मिश्रा से बातचीत में रामगोपाल गुप्ता ने बताया कि दो नवंबर 1990 को कार्तिक पूर्णिमा थी। इस वजह से काफी संख्या में श्रद्धालु सरयू में स्नान करने भी पहुंचे थे। दो नवंबर को ही हमें निर्धारित कार्ययोजना के मुताबिक पांच मार्गों से आगे बढ़ने के निर्देश मिले थे। मेरे जत्थे में दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कारसेवक शामिल थे। सड़कों पर जगह-जगह पुलिस मौजूद थी।
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हनुमानगढ़ी चौराहे पर घुड़सवार पुलिस ने रास्ता रोका तो उनको धकेलकर हम आगे बढ़ गए। ठीक हनुमानगढ़ी के सामने पुलिस ने आंसूगैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए। पहला गोला मेरे सामने आकर गिरा। गोले को बुझाने की हमें ट्रेनिंग दी गई थी। मैंने उसे गीले कपड़े से पकड़कर नाले में डालकर बुझा दिया। इसी बीच दूसरा गोला मेरे हाथ में आकर लगा। वह भी मैंने बुझाया। इसी बीच गोलियां तड़तड़ाने लगीं।
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मौका देखकर मैं एक चाय की दुकान में घुस गया। वहां कई लोग पहले से मौजूद थे। करीब डेढ़ घंटे तक गोलियां चलीं। मैं देख तो नहीं पा रहा था मगर सुन रहा था। एक अधिकारी गंदी-गंदी गालियां देते हुए पुलिसकर्मियों को आदेश दे रहा था। घायल कारसेवकों को डीसीएम में फेंका जा रहा था। जैसे-तैसे मैं वहां से बचकर राधा जी मंदिर पहुंचा था। उस दिन का एक-एक मंजर आज भी मेरी आंखों में घूम रहा है।
नम आंखों के साथ ली विदा
रामगोपाल ने बताया कि भावनाओं का ऐसा ज्वार मैंने जीवन में कभी नहीं देखा। दो नवंबर को अयोध्या में जैसी बर्बरता हुई उसे याद कर आज भी सिहर उठते हैं। कई कारसेवकों को मेरे सामने ही गोली मार दी गई। पुलिस से छुपते हुए हम अगले दो दिन तक अयोध्या में रहे। चार नवंबर को वहां से नम आंखों के साथ विदा ली।
नम आंखों के साथ ली विदा
रामगोपाल ने बताया कि भावनाओं का ऐसा ज्वार मैंने जीवन में कभी नहीं देखा। दो नवंबर को अयोध्या में जैसी बर्बरता हुई उसे याद कर आज भी सिहर उठते हैं। कई कारसेवकों को मेरे सामने ही गोली मार दी गई। पुलिस से छुपते हुए हम अगले दो दिन तक अयोध्या में रहे। चार नवंबर को वहां से नम आंखों के साथ विदा ली।