भविष्य ज्योति सम्मान समारोह: बरेली में अफसरों ने मेधावियों को दिए सफलता के मंत्र, डीएम बोले- ये पहला पड़ाव
बरेली में अमर उजाला भविष्य ज्योति सम्मान समारोह कार्यक्रम के समापन दिवस पर सेना, आईएएस व पीसीएस अधिकारी पहुंचे। अफसरों ने मेधावी छात्र-छात्राओं को सफलता के मंत्र दिए और भविष्य की राह दिखाई।
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बरेली में अमर उजाला के भविष्य ज्योति सम्मान समारोह कार्यक्रम के समापन दिवस पर सेना, आईएएस व पीसीएस अधिकारी पहुंचे। पहले सत्र में कमिश्नर भूपेंद्र एस. चौधरी और बीएसएफ के डिप्टी कमांडेट दिनेश सिंह ने छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। दूसरे सत्र में जिलाधिकारी अविनाश सिंह, एसएसपी अनुराग आर्य, क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी शैलेंद्र सिंह, आईटीबीपी तृतीय वाहिनी बुखारा कैंप के उप सेनानी मोहित वर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता पहुंचीं।
जिलाधिकारी ने विद्यार्थियों से कहा कि ये सम्मान पाना मात्र पहला पड़ाव है। जीवन में कितना भी आगे पहुंच जाएं लेकिन अपनी जड़ों को कभी न भूलें। सभी विद्यार्थी ऐसे मुकाम पर अवश्य पहुंचे जहां से लोगों की सहायता कर सकें। उन्होंने छात्रों को असफलता से निराश न होने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि असफलता से दोस्ती करो, जब ये आती है तो अवश्य कुछ सिखा कर जाती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि मां पहली गुरु हैं, तो शिक्षक दूसरे गुरु हैं। हमें असफलताओं से हार नहीं माननी चाहिए, किसी की नकल नहीं करनी चाहिए।
एसएसपी अनुराग आर्य ने कहा कि अमर उजाला की ये पहल छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद करने का अवसर देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि हरके विद्यार्थी को ऑलराउंडर होना चाहिए। जिसमें तीन बुनियादी बातें सबसे आवश्यक हैं, इसमें अनुशासन, सत्यनिष्ठा और हार नहीं मानने की भावना हमेशा होनी चाहिए। इससे वह छात्र या छात्रा जीवन में कुछ न कुछ बेहतर अवश्य कर सकता है।
आईटीबीपी तृतीय वाहिनी बुखारा कैंप के उप सेनानी मोहित वर्मा ने कहा कि ये सम्मान छात्र-छात्राओं को उनकी मेहनत का परिणाम है। जो शिक्षकों व अभिभावकों के मार्गदर्शन से ही प्राप्त होता है। जीवन में अनुशासन बेहद जरूरी है। इस परिश्रम को यहीं नहीं रोकना है बल्कि आगे लेकर जाना है, क्योंकि सफलता एक यात्रा की तरह हैं, जिसे चलते जाना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पारंपरिक कॅरिअर से हटकर भी कई अवसर हैं, जैसे सेना में लड़के व लड़कियों के लिए भविष्य बनाने के बेहतर अवसर हैं। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कहा कि भगवत गीता में लिखा है कि हम कर्म और ज्ञान से ही कुछ पा सकते हैं। हमारे लिए आवश्यक है कि हम अपने कर्म को पहचानें, स्वयं से प्रतिस्पर्धा करें, जीवन का मंत्र है कर्म करिए, पढ़िए और जीतिए, यदि असफलता भी आए तो उससे निराश हों, आगे बढ़ते रहें।
ये सम्मान सभी मेधावियों के लिए अनमोल
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. विनीता ने कहा कि हमारी मेहनत को जब सम्मान मिलता है तो वह क्षण सबसे प्रिय होता है, ये सम्मान सभी छात्र-छात्राओं के लिए अनमोल है। लेकिन यदि कुछ अंकों से जीवन में कभी लक्ष्य से चूकें तो मन छोटा न होने दें, न ही कभी तनाव लें। उन्होंने स्वयं का उदाहरण देते हुए कहा कि ये मेरी छठी नौकरी है, जो कई सफलताओं और विफलताओं के बाद मैं कर रही हूं।
एडीएम वित्त एवं राजस्व संतोष कुमार सिंह ने कहा कि अमर उजाला की पहल छात्र-छात्राओं को सीधा अधिकारियों से जोड़ती है, इससे विद्यार्थियों को भी कॅरिअर में क्या कर सकते हैं और कहां तक पहुंच सकते हैं, का मार्ग दर्शन मिलता है। एडीएम सिटी अविनाश त्रिपाठी ने भी छात्र-छात्राओं को सम्मान में उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी।