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Aditya L1: चांद के बाद अब सूरज के राज खोलेगा ये मिशन, इसरो वैज्ञानिक विवेक कुमार दिए इन सवालों के जवाब

Sun, 03 Sep 2023 03:56 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 03 Sep 2023 03:56 PM IST
सार

इसरो वैज्ञानिक विवेक कुमार सिंह ने कहा कि आदित्य एल-1 मिशन सूर्य तक जाने के लिए नहीं, बल्कि सूर्य को जानने के लिए है। इस मिशन का उद्देश्य एक तय दूरी से सूर्य के बारे में समझ को विकसित करना है।

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Aditya L1 mission will open the secrets of sun says ISRO Scientist Vivek Kumar Singh
इसरो वैज्ञानिक विवेक कुमार सिंह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिक विवेक कुमार सिंह शनिवार को एक कार्यक्रम में बरेली आए। उन्होंने आदित्य एल-1 मिशन के बारे में बताया। कहा कि यह मिशन सूर्य तक जाने के लिए नहीं, बल्कि सूर्य को जानने के लिए है। इस मिशन का उद्देश्य एक तय दूरी से सूर्य के बारे में समझ को विकसित करना है। सौर ऊर्जा, सूर्य के तापमान, आस-पास के विशेष पदार्थों, सतह पर होने वाली हलचल का अध्ययन करने के लिए इस यान में सात उपकरण लगाए गए हैं। अंतरिक्ष के क्षेत्र में अनुसंधान को लेकर किए गए सवालों का उन्होंने बेबाकी से जवाब दिए। 

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सवालों के दिए जवाब 

सवाल : विद्यालयों में विज्ञान के लिए प्रयोग आधारित शिक्षण में क्या बदलाव होने चाहिए?
जवाब : किसी खास बदलाव की जरूरत नहीं है। विद्यार्थियों को निष्ठा से पढ़ाने और पाठ्यक्रम समझाने की जरूरत है। कक्षा नौवीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में विज्ञान में जितने प्रयोग दिए गए हैं, विद्यार्थियों को उन्हें करना और सीखना चाहिए। मैं समझता हूं कि यह पर्याप्त होगा। 

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सवाल : अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को क्या सुझाव देना चाहेंगे? 
जवाब : मैं महज अंतरिक्ष विज्ञान में कॅरिअर बनाने की बात नहीं करूंगा। विद्यार्थियों को अपनी पसंद के अनुरूप कॅरिअर का चुनाव करना चाहिए। उससे जुड़ी पढ़ाई और अन्य चीजों को भी आनंद लेकर करिए। जब आपको पसंद के क्षेत्र में किए गए छोटे-छोटे प्रयासों में भी मजा आने लगेगा तो निश्चित रूप से एक दिन यह बड़ी सफलता में परिवर्तित होगा। 
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सवाल : वैज्ञानिकों का परिवार के साथ संवाद और जीवनशैली आम व्यक्ति के जीवन से किस प्रकार अलग है? 
जवाब : एक वैज्ञानिक का जीवन आम व्यक्ति के जीवन से बिल्कुल भी अलग नहीं है। हम काम करते हैं। वक्त मिलने पर परिवार से बातें भी करते हैं। परिवार और देश का इतना प्यार मिलता है कि दूरियों का एहसास ही नहीं होता। हमारा ज्यादातर समय चर्चाओं में बीतता है। हां, यह जरूर कह सकते हैं कि वैज्ञानिक जल्दी संतुष्ट नहीं होते। वह संभावनाओं की तलाश में लगे रहते हैं। 

सवाल : किसी मिशन पर शुरुआती चर्चा से सफलता तक कितना समय लगता है, उस अवधि में धैर्य की क्या भूमिका होती है? 
जवाब : किसी मिशन को चर्चा से सफलता तक ले जाने में 12-15 वर्ष लगते हैं। इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति व अपार धैर्य वाली टीम की जरूरत होती है। छोटी-छोटी असफलताओं से हर दिन सीखना होता है। यही सीख एक साधारण से विचार को महान मिशन में बदलने में अहम भूमिका निभाती है।
सवाल : चंद्रयान-3 की सफलता और आदित्य एल-1 की लॉन्चिंग का आम जनमानस पर क्या प्रभाव देखते हैं? 
जवाब : चंद्रयान-3 की सफलता के दौरान देशवासियों में जो खुशी दिखी, ऐसा पहले कभी नहीं देखा। यह दिखाता है कि इसरो के अभियानों की सफलता से आमजन में विज्ञान और नवाचारों के प्रति नई चेतना का विकास हो रहा है। युवा, विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में संभावनाएं देख रहे हैं। यह आने वाले समय में देश के लिए बड़ी सफलता का द्योतक है। 
सवाल : अंतरिक्ष मिशन की सफलता का अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव होगा? 
जवाब : अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कह सकता। इसरो जनकल्याण की भावना से काम कर रहा है। अभियानों की सफलता, भविष्य में देश की आर्थिक समृद्धि की वजह बनेगी। यह देश को विकसित राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

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