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15 दिन में तैयार होगा कोर्स वर्क का सिलेबस
Bareilly
Updated Thu, 06 Feb 2014 05:43 AM IST
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पीएचडी की पंजीकरण प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है। कुलपति ने डीन की बैठक लेकर इस संबंध में कई फैसले लिए। इस दौरान 2009 के बाद की पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट देने, 15 दिन के अंदर कोर्स वर्क और रिसर्च सेंटर तैयार करने की सहमति बनी।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पांच सालों से पीएचडी में पंजीकरण न होने की वजह से विश्वविद्यालय का रिसर्च वर्क शून्य हो रहा है। बैठक में तय किया गया कि कॉलेजों से भी खाली पीएचडी की सीटों का ब्योरा लिया जाएगा। शोध के पंजीकरण में आरक्षण नियमों का भी पालन किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि डीन की कमेटी बनाकर विद्यार्थियों से नियमों के पालन का सर्टिफिकेट लिया जाए। गाइड, हेड से होते हुए डीन के पास विद्यार्थियों के सर्टिफिकेट का आवेदन जाएगा। डीन विद्यार्थियों के रिसर्च के नियमों के पालन की जांच कर जितने भी नियमों का वे पालन कर रहे हैं, उतने का सर्टिफिकेट डीन की कमेटी कुलपति के सामने रखेगी। कुलपति उस पर अंतिम फैसला लेकर रिसर्च कर चुके स्कॉलर्स को सर्टिफिकेट देगी।
बता दें कि 2009 के बाद पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को 11 में छह नियमों को अनिवार्य रूप से पालन करने के सर्टिफिकेट देने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। विद्यार्थी लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन से यूजीसी के जिन नियमों का पालन करते हुए उनका शोध हुआ, उतने नियमों के हवाले के साथ उन्हें सर्टिफिकेट देने की मांग कर रहे हैं।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में पांच सालों से पीएचडी में पंजीकरण न होने की वजह से विश्वविद्यालय का रिसर्च वर्क शून्य हो रहा है। बैठक में तय किया गया कि कॉलेजों से भी खाली पीएचडी की सीटों का ब्योरा लिया जाएगा। शोध के पंजीकरण में आरक्षण नियमों का भी पालन किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि डीन की कमेटी बनाकर विद्यार्थियों से नियमों के पालन का सर्टिफिकेट लिया जाए। गाइड, हेड से होते हुए डीन के पास विद्यार्थियों के सर्टिफिकेट का आवेदन जाएगा। डीन विद्यार्थियों के रिसर्च के नियमों के पालन की जांच कर जितने भी नियमों का वे पालन कर रहे हैं, उतने का सर्टिफिकेट डीन की कमेटी कुलपति के सामने रखेगी। कुलपति उस पर अंतिम फैसला लेकर रिसर्च कर चुके स्कॉलर्स को सर्टिफिकेट देगी।
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बता दें कि 2009 के बाद पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को 11 में छह नियमों को अनिवार्य रूप से पालन करने के सर्टिफिकेट देने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। विद्यार्थी लगातार विश्वविद्यालय प्रशासन से यूजीसी के जिन नियमों का पालन करते हुए उनका शोध हुआ, उतने नियमों के हवाले के साथ उन्हें सर्टिफिकेट देने की मांग कर रहे हैं।
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