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सामान खरीद में लाखों की टैक्स चोरी

Sat, 22 Nov 2014 05:30 AM IST
Bareilly
Bareilly Updated Sat, 22 Nov 2014 05:30 AM IST
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बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय को सप्लाई करने वाली फर्में वहां के प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ कर सालों से वाणिज्य कर की चोरी कर रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के टैक्स डिडक्शन नंबर (टीडीएन) लेने के बाद वाणिज्य कर विभाग की शुरुआती जांच में यह जानकारी मिली है। विभाग ने विवि प्रशासन को नोटिस जारी कर 25 नवंबर तक अब तक की खरीद की सारी सूचनाएं मांगी हैं। मामले में बड़ी टैक्स चोरी का खुलासा होने की संभावना है।
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विश्वविद्यालय में स्टेशनरी, कंप्यूटर, विभिन्न उपकरण की सप्लाई और प्रिंटिंग का काम निजी फर्में करती हैं। विवि इस मद में हर वर्ष तकरीबन सवा करोड़ रुपये भुगतान करता है। सप्लाई करने वाली फर्में विश्वविद्यालय से पांच प्रतिशत की दर से वैट (वैल्यू एडेड टैक्स) वसूलती हैं। फर्मों ने टैक्स के मद में हर महीने वसूल की जा रही इस राशि का हिसाब किताब वाणिज्य कर विभाग को नहीं दिया है। सूत्रों की मानें तो विवि के कंप्यूटर प्रोग्राम विभाग में तैनात एक कर्मचारी की मिलीभगत से दिल्ली की फर्म से सप्लाई ली जा रही है। इस फर्म का यूपी में पंजीकरण ही नहीं है। बिना पंजीकरण के ये फर्में प्रदेश में लाखों रुपये का कारोबार कर रही हैं।
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अपंजीकृत फर्में कर रही हैं सप्लाई
वाणिज्य कर विभाग नियमों के तहत यूपी में सप्लाई और ठेके का काम करने वाली फर्मों का यूपी में पंजीकरण होना जरूरी है चाहे वह किसी अन्य राज्य की ही क्यों न हो। विभाग उन्हें टैक्स आईडेंटिटी नंबर (टिन) जारी करेगा। सरकारी और अर्द्ध सरकारी संस्थाओं को सामानों की सप्लाई पर वसूला गया टैक्स विभाग में जमा कराना होगा। फर्में इन संस्थाओं को टिन नंबर सहित टैक्स इनवायस भी जारी करेंगी ताकि वह अपने खाते में इस टैक्स को दिखा सकें। वहीं सरकारी और अर्द्ध सरकारी संस्थाओं को भी अपने स्तर से देय टैक्स की कटौती सुनिश्चित करनी है। इसके लिए उन्हें टीडीएन लेना जरूरी है।
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रुहेलखंड विवि प्रशासन को सामान सप्लाई करने वाली फर्में पांच प्रतिशत वैट वसूल रही हैं लेकिन विभाग में जमा नहीं कर रही हैं। बड़ी टैक्स चोरी की संभावना है। इसीलिए नोटिस जारी किया गया है और 25 नवंबर तक सारी सूचनाएं मांगी गई हैं।
प्रशांत कुमार सिंह
उपायुक्त, विशेष अनुसंधान शाखा, वाणिज्य कर

वाणिज्य कर विभाग से ठेकेदार फर्मों द्वारा टैक्स चोरी करने संबंधी नोटिस मिला है। वित्त विभाग से सभी फर्मों की जानकारी मांगी गई है।
एके सिंह
कुलसचिव, रुहेलखंड विवि
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