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बिना दवा हो गया 4.5 लाख पशुओं का इलाज
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 05 Mar 2016 02:48 AM IST
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याोजना
जिला विकास योजना में स्वीकृत होने वाले काम वास्तविक धरातल पर नहीं कराए जाते, इस सच की पुष्टि के लिए लीजिए एक और विभाग की कहानी- पशुपालन विभाग को देखते हैं, ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सालय, और पशु सेवा केंद्रों पर इलाज को आने वाले जानवरों की दवाइयों के लिए जिला योजना में 1.95 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत हुए। ये दवाइयां अभी तक नहीं पहुंची और मार्च की क्लोजिंग आते ही 4.5 लाख पशुओं का इलाज करने के आंकड़े दुरुस्त कर लिए गए। अब बजट की बाकी रकम मार्च के आखिरी सप्ताह में मिलेगी। उसका खर्च कहां और कैसे दिखाया जाएगा, इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है।
66 पशु चिकित्सालयों और पशु सेवा केंद्रों के लिए पांच करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव रखे थे। इसमें 1.95 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत हो गए। इससे पशु दवाइयों की खरीद होनी थी। जनवरी तक विभाग को 74.76 लाख रुपये अवमुक्त किए गए। इसमें से 51.96 लाख रुपये खर्च भी दर्शा दिया गया। वित्तीय वर्ष 2015-16 में 4.52 लाख पशुओं के इलाज का लक्ष्य था। जनवरी तक के आंकड़ों पर गौर करें तो विभाग ने 4.50 लाख जानवरों के इलाज का लक्ष्य प्राप्त भी कर लिया। वह भी तब, जब अभी तक जिला योजना के स्वीकृत बजट से पशुओं की दवाइयां चिकित्सालयों और पशु सेवा केंद्रों तक पहुंची नहीं। 35 पशु चिकित्सालयों, पांच डी श्रेणी के पशु चिकित्सालयों और 26 पशु सेवा केंद्रों में से आधे से ज्यादा स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। कई अस्पताल और पशु सेवा केंद्र महीने में कभी-कभार ही खुलते हैं। फिर भी फाइलों में सब कुछ ठीक चल रहा है।
‘कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। जिला योजना में हमारे जो भी प्रस्ताव स्वीकृत हुए, उतना बजट खर्च कर लिया गया। अब अगले वर्ष की जिला योजना के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।’
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- डा. शैलेंद्र कुमार वर्मा, सीवीओ
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66 पशु चिकित्सालयों और पशु सेवा केंद्रों के लिए पांच करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव रखे थे। इसमें 1.95 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत हो गए। इससे पशु दवाइयों की खरीद होनी थी। जनवरी तक विभाग को 74.76 लाख रुपये अवमुक्त किए गए। इसमें से 51.96 लाख रुपये खर्च भी दर्शा दिया गया। वित्तीय वर्ष 2015-16 में 4.52 लाख पशुओं के इलाज का लक्ष्य था। जनवरी तक के आंकड़ों पर गौर करें तो विभाग ने 4.50 लाख जानवरों के इलाज का लक्ष्य प्राप्त भी कर लिया। वह भी तब, जब अभी तक जिला योजना के स्वीकृत बजट से पशुओं की दवाइयां चिकित्सालयों और पशु सेवा केंद्रों तक पहुंची नहीं। 35 पशु चिकित्सालयों, पांच डी श्रेणी के पशु चिकित्सालयों और 26 पशु सेवा केंद्रों में से आधे से ज्यादा स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। कई अस्पताल और पशु सेवा केंद्र महीने में कभी-कभार ही खुलते हैं। फिर भी फाइलों में सब कुछ ठीक चल रहा है।
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‘कहीं कोई गड़बड़ी नहीं है। जिला योजना में हमारे जो भी प्रस्ताव स्वीकृत हुए, उतना बजट खर्च कर लिया गया। अब अगले वर्ष की जिला योजना के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।’
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- डा. शैलेंद्र कुमार वर्मा, सीवीओ