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सांसदों की निधि को लेकर भी लापरवाही
Updated Sun, 15 Apr 2018 10:04 AM IST
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टुल्ला-सांसद निधि प्रकरण
15 करोड़ की रकम अटकी
हेडिंग-पुराने विकास कार्य पूरे नहीं, इसलिए नए का पेमेंट नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सरकारी सिस्टम इतनी मनमानी पर उतर आया है कि सांसद निधि से स्वीकृत कार्य पूरे कराने में भी अफसर कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे है। सांसदों के पूर्व में स्वीकृत सीसी रोड निर्माण सहित कई काम कार्यदायी संस्था आरईएस और समाज कल्याण निर्माण निगम के पास अटके हैं। इनके पूरा न होने से जिले के दोनों ही सांसद संतोष गंगवार और धर्मेंद्र कश्यप की 15 करोड़ की निधि लटकी हुई है। सांसद निधि के कार्यों को लेकर हीलाहवाली करने वाले अफसरों पर भी कोई शिकंजा नहीं कसा जा रहा है।
2015-16 में दोनों ही सांसदों की काफी निधि खर्च होने से रह गई थी। लिहाजा सरकार ने साल 2016-17 में दोनों ही सांसदों को पांच-पांच करोड़ की जगह केवल पचास फीसदी निधि ही जारी की। सांसद निधि से स्वीकृत सीसी रोड, खड़ंजा सहित अन्य निर्माण काम कार्यदायी संस्थाओं के पास अटके हुए हैं। इतना ही नहीं, पिछले वर्ष दोनों ही सांसदों को निधि ही जारी नहीं हो सकी है। इधर, सांसद निधि का काम करने वाली कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ जटिलताओं की वजह से ठेकेदारों को काम पूरा करने में दिक्कत हो रही है। इस साल सांसदों के कार्यकाल का अंतिम वर्ष है। ऐसे में अगर पूरी निधि एक साथ खर्च करने का दबाव भी आएगा तो उस आपाधापी में निधि के कार्यों में गड़बड़ी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
विधायक निधि के मामलों की जांच फिर ठंडी
वर्ष 2016-17 में कई विधायकों की निधि में काफी गोलमाल हुआ था। इसमें कार्यदायी संस्था आईपीसीएल की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू कराते हुए नोडल अधिकारियों की तैनाती भी कर दी थी। बाद में प्रेशर में आकर अधिकारियों ने इस प्रकरण की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इससे इस मामले में किसी पर कोई कार्रवाई होती भी नहीं दिखाई दे रही है।
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वर्जन
सांसदों की जितनी निधि मिली है, उसे खर्च करने के लिए समीक्षा की जा रही है। जल्द ही अटके हुए कामों को शीघ्र पूरा कराने की तैयारी चल रही है।
- वीरेंद्र कुमार, पीडी, डीआरडीए
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15 करोड़ की रकम अटकी
हेडिंग-पुराने विकास कार्य पूरे नहीं, इसलिए नए का पेमेंट नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। सरकारी सिस्टम इतनी मनमानी पर उतर आया है कि सांसद निधि से स्वीकृत कार्य पूरे कराने में भी अफसर कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे है। सांसदों के पूर्व में स्वीकृत सीसी रोड निर्माण सहित कई काम कार्यदायी संस्था आरईएस और समाज कल्याण निर्माण निगम के पास अटके हैं। इनके पूरा न होने से जिले के दोनों ही सांसद संतोष गंगवार और धर्मेंद्र कश्यप की 15 करोड़ की निधि लटकी हुई है। सांसद निधि के कार्यों को लेकर हीलाहवाली करने वाले अफसरों पर भी कोई शिकंजा नहीं कसा जा रहा है।
2015-16 में दोनों ही सांसदों की काफी निधि खर्च होने से रह गई थी। लिहाजा सरकार ने साल 2016-17 में दोनों ही सांसदों को पांच-पांच करोड़ की जगह केवल पचास फीसदी निधि ही जारी की। सांसद निधि से स्वीकृत सीसी रोड, खड़ंजा सहित अन्य निर्माण काम कार्यदायी संस्थाओं के पास अटके हुए हैं। इतना ही नहीं, पिछले वर्ष दोनों ही सांसदों को निधि ही जारी नहीं हो सकी है। इधर, सांसद निधि का काम करने वाली कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ जटिलताओं की वजह से ठेकेदारों को काम पूरा करने में दिक्कत हो रही है। इस साल सांसदों के कार्यकाल का अंतिम वर्ष है। ऐसे में अगर पूरी निधि एक साथ खर्च करने का दबाव भी आएगा तो उस आपाधापी में निधि के कार्यों में गड़बड़ी होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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विधायक निधि के मामलों की जांच फिर ठंडी
वर्ष 2016-17 में कई विधायकों की निधि में काफी गोलमाल हुआ था। इसमें कार्यदायी संस्था आईपीसीएल की भूमिका पर सवाल खड़े हुए थे। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू कराते हुए नोडल अधिकारियों की तैनाती भी कर दी थी। बाद में प्रेशर में आकर अधिकारियों ने इस प्रकरण की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इससे इस मामले में किसी पर कोई कार्रवाई होती भी नहीं दिखाई दे रही है।
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वर्जन
सांसदों की जितनी निधि मिली है, उसे खर्च करने के लिए समीक्षा की जा रही है। जल्द ही अटके हुए कामों को शीघ्र पूरा कराने की तैयारी चल रही है।
- वीरेंद्र कुमार, पीडी, डीआरडीए