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71 हजार में सिर्फ 620 ने चुना अंक सुधार के लिए परीक्षा का विकल्प
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बाराबंकी। कोविड-19 की वैश्विक महामारी के संक्रमण के बीच बिना परीक्षा पूर्व की परीक्षा के औसत अंकों के मूल्यांकन के आधार पर परीक्षा परिणाम घोषित किया गया। मगर, संक्रमण का खतरा कम हुआ तो यूपी बोर्ड ने बच्चों को अंक सुधार के लिए लिखित परीक्षा का विकल्प दिया। परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर आवेदन मांगे।
मगर, परीक्षा के अंकों को अंतिम मान कर परीक्षा परीक्षाफल तैयार करने की बाध्यता ने विद्यार्थियों के कदम रोके। परिणाम स्वरूप यूपी बोर्ड के करीब 71 हजार परीक्षार्थियों में सिर्फ 620 ने अंक सुधार का विकल्प चुन आवेदन किया। अब इनकी परीक्षा कराने के लिए दो दिनों में परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा।
कोरोना काल में संक्रमण से बचाव को लेकर स्कूल-कॉलेज बंद थे। ऐसे में परीक्षा करना आसान नहीं था। सरकार ने बिना परीक्षा के पूर्व के अंकों के औसत मूल्यांकन के आधार पर परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। इसमें हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का बेहतर परिणाम रहा। अंकों की बारिश से विद्यार्थी भी झूमें।
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मगर, उनके अंदर परीक्षा न देने का मलाल था। जिले में यूपी बोर्ड की वर्ष 2021 की परीक्षा में 71258 परीक्षार्थी शामिल थे। इसमें हाईस्कूल के 40076 व इंटरमीडिएट के 31394 परीक्षार्थी थे। मगर, जब अंक सुधार को लेकर सरकार ने 18 सितम्बर से परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर आवेदन मांगे तो विद्यार्थियों ने परीक्षा को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई।
29 अगस्त को आवेदन की तिथि बीत गई। अब दो सितम्बर तक परीक्षा केंद्रों का निर्धारण होना है। जिसमें पहले जिला फिर तहसील मुख्यालय के कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने में प्राथमिकता दी जाएगी। मगर, सिर्फ 620 विद्यार्थियों ने ही आवेदन किए।
इसमें हाईस्कूल के 280 परीक्षार्थियों में 144 बालक व 136 बालिका हैं। वहीं इंटरमीडिएट के 340 परीक्षार्थियों में 185 बालक व 155 बालिकाएं हैं। जिनकी 18 सितम्बर से कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत परीक्षा कराई जाएगी। इसमें एक विषय से सभी विषय तक की परीक्षा वह दें सकेंगे। मगर, लिखित परीक्षा के मूल्यांकन के आधार पर तैयार रिजल्ट ही अंतिम होगा।
अंक सुधार को लेकर होने वाली यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए करीब छह सौ आवेदन आए है। जिनकी परीक्षा कराने के लिए परीक्षा केंद्रों का निर्धारण दो दिनों में कर लिया जाएगा। हालांकि इस परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में रुचि कम दिखी।
-राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस
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मगर, परीक्षा के अंकों को अंतिम मान कर परीक्षा परीक्षाफल तैयार करने की बाध्यता ने विद्यार्थियों के कदम रोके। परिणाम स्वरूप यूपी बोर्ड के करीब 71 हजार परीक्षार्थियों में सिर्फ 620 ने अंक सुधार का विकल्प चुन आवेदन किया। अब इनकी परीक्षा कराने के लिए दो दिनों में परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जाएगा।
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कोरोना काल में संक्रमण से बचाव को लेकर स्कूल-कॉलेज बंद थे। ऐसे में परीक्षा करना आसान नहीं था। सरकार ने बिना परीक्षा के पूर्व के अंकों के औसत मूल्यांकन के आधार पर परीक्षा परिणाम जारी कर दिया। इसमें हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का बेहतर परिणाम रहा। अंकों की बारिश से विद्यार्थी भी झूमें।
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मगर, उनके अंदर परीक्षा न देने का मलाल था। जिले में यूपी बोर्ड की वर्ष 2021 की परीक्षा में 71258 परीक्षार्थी शामिल थे। इसमें हाईस्कूल के 40076 व इंटरमीडिएट के 31394 परीक्षार्थी थे। मगर, जब अंक सुधार को लेकर सरकार ने 18 सितम्बर से परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर आवेदन मांगे तो विद्यार्थियों ने परीक्षा को लेकर दिलचस्पी नहीं दिखाई।
29 अगस्त को आवेदन की तिथि बीत गई। अब दो सितम्बर तक परीक्षा केंद्रों का निर्धारण होना है। जिसमें पहले जिला फिर तहसील मुख्यालय के कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने में प्राथमिकता दी जाएगी। मगर, सिर्फ 620 विद्यार्थियों ने ही आवेदन किए।
इसमें हाईस्कूल के 280 परीक्षार्थियों में 144 बालक व 136 बालिका हैं। वहीं इंटरमीडिएट के 340 परीक्षार्थियों में 185 बालक व 155 बालिकाएं हैं। जिनकी 18 सितम्बर से कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत परीक्षा कराई जाएगी। इसमें एक विषय से सभी विषय तक की परीक्षा वह दें सकेंगे। मगर, लिखित परीक्षा के मूल्यांकन के आधार पर तैयार रिजल्ट ही अंतिम होगा।
अंक सुधार को लेकर होने वाली यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए करीब छह सौ आवेदन आए है। जिनकी परीक्षा कराने के लिए परीक्षा केंद्रों का निर्धारण दो दिनों में कर लिया जाएगा। हालांकि इस परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में रुचि कम दिखी।
-राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस