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Barabanki News: जिला अस्पताल में हो रहा स्ट्रेचर पर इलाज
Fri, 19 Jul 2024 05:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Fri, 19 Jul 2024 05:07 AM IST
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बाराबंकी के जिला अस्पताल इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर मरीजों का हो रहा इलाज। संवाद
बाराबंकी। जिला अस्पताल में बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने के बजाय दिनोंदिन बदतर होती जा रही हैं। यहां आने वाले गंभीर मरीजों के लिए न बेड की सुविधा है और न ही दवा की। मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जाता है एवं बाहर से दवा व इंजेक्शन लाने की पर्ची थमा दी जाती है। ओपीडी में पर्चा बनवाने से लेकर दवा पाने तक मारामारी की स्थिति रहती है।
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ज्यादातर बेड फुल होने के कारण मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा था। मरीजाें को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा था। ज्यादातर मरीजों को धड़ल्ले से बाहर से दवा-इंजेक्शन लाने के लिए पर्ची थमाई जा रही थी।
100 रुपये तक की कीमत वाले सेफ्लोस्पोरिन एंटीबायोटिक इंजेक्शन के एवज में तीमारदारों को 500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। कुछ डॉक्टर बाकायदा मेडिकल स्टोर के नाम वाली पर्चियां तक दवा लाने के लिए देते हैं।
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रेफर होते ही सक्रिय हो जाते हैं दलाल
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से मरीजों के रेफर होते ही दलाल सक्रिय हो जाते हैं। ये दलाल मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराते हैं जहां उनसे इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। दलालों का नेटवर्क बाराबंकी से लेकर राजधानी तक के अस्पतालों से जुड़ा है।
ओपीडी में लगी रही मरीजों की कतार
जिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार सुबह से ही मरीजों की कतार लगी हुई थी। पर्चा बनवाने से लेकर दवा पाने तक मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। भयंकर गर्मी के बीच दोपहर दो बजे तक मरीजों की भीड़ उमड़ती रही।
इलाज करने से पहले लिखा बाहरी इंजेक्शन
हरख ब्लाॅक क्षेत्र के गाढ़ा मऊ से आए सूरज मिश्रा की पत्नी को खून की उल्टी व सांस लेने में दिक्कत हो रही है। बृहस्पतिवार को इमरजेंसी में दिखाने पहुंचे तो बाहर से खरीदने पर इंजेक्शन 480 रुपये में मिला।
सुनवाई न होने पर प्राइवेट अस्पताल में दिखाया
गल्हामऊ से जनऔषधि केंद्र पर दवा लेने आए शिवराज सिंह पीलिया से पीड़ित अपने पुत्र का इलाज कराने आए थे। सुनवाई न होने पर प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना पड़ा। इसके पहले इमरजेंसी में 480 रुपये का इंजेक्शन लगवाया।
जिला अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। बाहर से इंजेक्शन लिखे जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. ब्रजेश कुमार, सीएमएस
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बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ज्यादातर बेड फुल होने के कारण मरीजों को स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा था। मरीजाें को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा था। ज्यादातर मरीजों को धड़ल्ले से बाहर से दवा-इंजेक्शन लाने के लिए पर्ची थमाई जा रही थी।
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100 रुपये तक की कीमत वाले सेफ्लोस्पोरिन एंटीबायोटिक इंजेक्शन के एवज में तीमारदारों को 500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। कुछ डॉक्टर बाकायदा मेडिकल स्टोर के नाम वाली पर्चियां तक दवा लाने के लिए देते हैं।
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रेफर होते ही सक्रिय हो जाते हैं दलाल
जिला अस्पताल की इमरजेंसी से मरीजों के रेफर होते ही दलाल सक्रिय हो जाते हैं। ये दलाल मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराते हैं जहां उनसे इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। दलालों का नेटवर्क बाराबंकी से लेकर राजधानी तक के अस्पतालों से जुड़ा है।
ओपीडी में लगी रही मरीजों की कतार
जिला अस्पताल की ओपीडी में बृहस्पतिवार सुबह से ही मरीजों की कतार लगी हुई थी। पर्चा बनवाने से लेकर दवा पाने तक मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ा। भयंकर गर्मी के बीच दोपहर दो बजे तक मरीजों की भीड़ उमड़ती रही।
इलाज करने से पहले लिखा बाहरी इंजेक्शन
हरख ब्लाॅक क्षेत्र के गाढ़ा मऊ से आए सूरज मिश्रा की पत्नी को खून की उल्टी व सांस लेने में दिक्कत हो रही है। बृहस्पतिवार को इमरजेंसी में दिखाने पहुंचे तो बाहर से खरीदने पर इंजेक्शन 480 रुपये में मिला।
सुनवाई न होने पर प्राइवेट अस्पताल में दिखाया
गल्हामऊ से जनऔषधि केंद्र पर दवा लेने आए शिवराज सिंह पीलिया से पीड़ित अपने पुत्र का इलाज कराने आए थे। सुनवाई न होने पर प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना पड़ा। इसके पहले इमरजेंसी में 480 रुपये का इंजेक्शन लगवाया।
जिला अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। बाहर से इंजेक्शन लिखे जाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. ब्रजेश कुमार, सीएमएस