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तराई में समृद्धि की मिठास घोलेगी चीनी मिल
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बाराबंकी। प्रदेश सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को पेश किए गए बजट में जिले की बुढ़वल चीनी मिल के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। सरकार ने बुढ़वल में नई चीनी मिल लगाने के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पर मुहर लगाई है। बुढ़वल में 5000 टीसीडी क्षमता की नई चीनी मिल स्थापित की जाएगी। बीते 15 साल से 62 एकड़ से अधिक भूमि बंजर पड़ी है। मिल के कलपुर्जे चोरी चले गए या सड़ गए हैं। तीन विधानसभा चुनावों में यह मिल प्रमुख मुद्दा बनकर भी सामने आती रही।
वर्ष 1930 में कानपुर के उद्योगपतियों ने बुढ़वल चीनी मिल की स्थापना करवाई थी। शुरु में ही करीब एक हजार लोगों को रोजगार देने के साथ ही यह मिल क्षेत्र व जिले के किसानों की समृद्धि की प्रतीक बनी थी। साल 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मिल के विस्तारीकरण के लिए करीब 62 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कराया था।
इसके लिए करीब 100 किसानों से जमीन ली गई और किसानों से बताया गया कि मिल लगने से उनको भी रोजगार मिलेगा। समय बीतता गया मगर मिल का विस्तारीकरण या नवीनीकरण नहीं हुआ। वर्ष 2007-08 में तत्कालीन बसपा सरकार में पेराई बंद कर कर्मियों को जबरन वीआरएस दे दिया गया। धीरे-धीरे मिल का सामान चोरी से बिकता रहा। जो बचा वह देखरेख के अभाव में सड़ गया। करीब 62 एकड़ जमीन तब से अब तक वीरान पड़ी है।
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वर्ष 2012, 2017 व 2022 के विधानसभा चुनावों में मिल के संचालन का मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुपूरक बजट में यह घोषणा की थी कि बुढ़वल मिल का संचालन फिर से होगा। तभी से लोगों को उम्मीदें लगी थीं।
बृहस्पतिवार को योगी सरकार द्वारा जारी किए गए बजट में अन्य बिंदुओं का कार्यान्वयन के तहत हुई घोषणाओं में बुढ़वल चीनी मिल के संचालन का प्रस्ताव जारी किया गया है। इसके अनुसार बुढ़वल में 5000 टीसीडी क्षमता की नई चीनी मिल, रिफाइंड शुगर, कोलन प्लांट व आसवनी के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पारित किया गया है।
पांच हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
मिल के संचालन से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। जानकारों के अनुसार, मिल का संचालन शुरु होने पर ही एक हजार लोगों को रोजगार मिला था। धीरे-धीरे मिल चलती रही और रोजगार बढ़ता रहा। वर्तमान में जिस क्षमता की मिल की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है उससे करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने बताया कि यह चीनी मिल बाराबंकी की पहचान में शामिल थी। मुख्यमंत्री ने इस पर अपना ध्यान देकर जिले को विकास का संदेश दिया है।
गन्ना किसानों को होगा सीधा लाभ
बुढ़वल चीनी मिल के संचालन से उन किसानों को फायदा होगा जिनकी जमीनें ली गई थीं। 15 साल से इन किसानों को अधर में छोड़ दिया गया था। न तो मिल संचालित हो रही थी और न ही अधिग्रहीत जमीन के मालिक वे किसान बन सकते हैं। मिल के संचालन से क्षेत्र व जिले के हजारों गन्ना किसानों को जिले के बाहर अपना गन्ना नहीं जे जाना पड़ेगा। इससे बुढ़वल व रामनगर के विकास में भी गति आएगी। मिल के बाहर भी रोजगार के सृजन का रास्ता साफ होगा।
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वर्ष 1930 में कानपुर के उद्योगपतियों ने बुढ़वल चीनी मिल की स्थापना करवाई थी। शुरु में ही करीब एक हजार लोगों को रोजगार देने के साथ ही यह मिल क्षेत्र व जिले के किसानों की समृद्धि की प्रतीक बनी थी। साल 1989 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मिल के विस्तारीकरण के लिए करीब 62 एकड़ भूमि का अधिग्रहण कराया था।
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इसके लिए करीब 100 किसानों से जमीन ली गई और किसानों से बताया गया कि मिल लगने से उनको भी रोजगार मिलेगा। समय बीतता गया मगर मिल का विस्तारीकरण या नवीनीकरण नहीं हुआ। वर्ष 2007-08 में तत्कालीन बसपा सरकार में पेराई बंद कर कर्मियों को जबरन वीआरएस दे दिया गया। धीरे-धीरे मिल का सामान चोरी से बिकता रहा। जो बचा वह देखरेख के अभाव में सड़ गया। करीब 62 एकड़ जमीन तब से अब तक वीरान पड़ी है।
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वर्ष 2012, 2017 व 2022 के विधानसभा चुनावों में मिल के संचालन का मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अनुपूरक बजट में यह घोषणा की थी कि बुढ़वल मिल का संचालन फिर से होगा। तभी से लोगों को उम्मीदें लगी थीं।
बृहस्पतिवार को योगी सरकार द्वारा जारी किए गए बजट में अन्य बिंदुओं का कार्यान्वयन के तहत हुई घोषणाओं में बुढ़वल चीनी मिल के संचालन का प्रस्ताव जारी किया गया है। इसके अनुसार बुढ़वल में 5000 टीसीडी क्षमता की नई चीनी मिल, रिफाइंड शुगर, कोलन प्लांट व आसवनी के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पारित किया गया है।
पांच हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
मिल के संचालन से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। जानकारों के अनुसार, मिल का संचालन शुरु होने पर ही एक हजार लोगों को रोजगार मिला था। धीरे-धीरे मिल चलती रही और रोजगार बढ़ता रहा। वर्तमान में जिस क्षमता की मिल की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है उससे करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने बताया कि यह चीनी मिल बाराबंकी की पहचान में शामिल थी। मुख्यमंत्री ने इस पर अपना ध्यान देकर जिले को विकास का संदेश दिया है।
गन्ना किसानों को होगा सीधा लाभ
बुढ़वल चीनी मिल के संचालन से उन किसानों को फायदा होगा जिनकी जमीनें ली गई थीं। 15 साल से इन किसानों को अधर में छोड़ दिया गया था। न तो मिल संचालित हो रही थी और न ही अधिग्रहीत जमीन के मालिक वे किसान बन सकते हैं। मिल के संचालन से क्षेत्र व जिले के हजारों गन्ना किसानों को जिले के बाहर अपना गन्ना नहीं जे जाना पड़ेगा। इससे बुढ़वल व रामनगर के विकास में भी गति आएगी। मिल के बाहर भी रोजगार के सृजन का रास्ता साफ होगा।