{"_id":"693733fb23be5106d00c7698","slug":"saryu-valley-is-becoming-prosperous-due-to-guava-cultivation-barabanki-news-c-315-slko1012-153542-2025-12-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: अमरूद की खेती से समृद्ध हो रही सरयू की तराई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: अमरूद की खेती से समृद्ध हो रही सरयू की तराई
Tue, 09 Dec 2025 01:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 09 Dec 2025 01:54 AM IST
विज्ञापन
नपे खेत में ताइवानी अमरुद दिखाते सिरौलीगौसपुर तहसील के कोठीडीहा गांव निवासी संतप्रसाद सिंह।
कोटवाधाम। बाढ़ से बेहाल रहने वाली सरयू नदी की तराई के किसानों ने गन्ना व अन्य फसलों का विकल्प निकाल लिया है। कई किसान अब तालिबानी अमरूद की खेती करने लगे हैं, जो समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही है।
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के सरयू नदी के किनारे बसा कोठीडीहा गांव के किसान संत प्रसाद सिंह के जिन खेतों में बाढ़ के पानी से फसलें बर्बाद होती थी, उन खेतों में अब अमरूद के पेड़ लहलहा रहे हैं। सीपेज वाली जमीन में करीब दो बीघा ताइवानी अमरूद की खेती शुरू की है, जो अब फल देकर उन्हें मालामाल कर रही है।
उन्होंने बताया कि पहले वह एक बीघा ताइवानी अमरूद लगाया था, जिसमें करीब 35 हजार का खर्च आया था। इसके बाद यह पौधे तीन वर्ष में फल देने लायक तैयार हो गए। अब वर्ष में दो बार फल देते हैं। एक बार में करीब 30 हजार से ज्यादा का मुनाफा होता है। अमरूद के पौधों में सीपेज और बाढ़ के पानी का असर नहीं होता है। रामनगरी अयोध्या और गोरखपुर की मंडी में अमरूद 110 रुपये किलो तक बिक जाता है। इसके अलावा स्थानीय बाजारों में भी इसकी मांग रहती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र के सरयू नदी के किनारे बसा कोठीडीहा गांव के किसान संत प्रसाद सिंह के जिन खेतों में बाढ़ के पानी से फसलें बर्बाद होती थी, उन खेतों में अब अमरूद के पेड़ लहलहा रहे हैं। सीपेज वाली जमीन में करीब दो बीघा ताइवानी अमरूद की खेती शुरू की है, जो अब फल देकर उन्हें मालामाल कर रही है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पहले वह एक बीघा ताइवानी अमरूद लगाया था, जिसमें करीब 35 हजार का खर्च आया था। इसके बाद यह पौधे तीन वर्ष में फल देने लायक तैयार हो गए। अब वर्ष में दो बार फल देते हैं। एक बार में करीब 30 हजार से ज्यादा का मुनाफा होता है। अमरूद के पौधों में सीपेज और बाढ़ के पानी का असर नहीं होता है। रामनगरी अयोध्या और गोरखपुर की मंडी में अमरूद 110 रुपये किलो तक बिक जाता है। इसके अलावा स्थानीय बाजारों में भी इसकी मांग रहती है।
विज्ञापन