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शहर में नहीं होगी सदियों पुरानी रामलीला
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बाराबंकी। शहर की प्रतिष्ठित सैकड़ों वर्ष पुरानी दशहराबाग की रामलीला को लेकर समिति के सदस्यों ने रामलीला मंचन नहीं कराने का निर्णय लिया गया। दशहराबाग की रामलीला को देखने दूर दराज से लोग आते है और मेला मैदान में लाखों की भीड़ जमा होती है। लेकिन वर्तमान समय में कोविड को देखते हुए समिति द्वारा रामलीला न करने का निर्णय लिया गया है।
मुख्य संरक्षक सुधीर कुमार सिंह सिद्धू ने कहा कि सरकार ने रामलीला की मंचन की अनुमति दी है, लेकिन मेले में सैकड़ों की भीड़ रोक पाना संभव नहीं है। इस वर्ष रामलीला स्थगित की जाएगी और अग्रिम वर्षों में रामलीला की भव्यता का प्रयास किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि श्री राम लीला दशहरा मंदिर में सूक्ष्म लीला का आयोजन किया जाएगा।
समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष सिंह व महामंत्री शिवकुमार ने बताया कि बीते वर्ष मंदिर प्रांगण में लीला का आयोजन किया गया था, किंतु इस बार मंदिर प्रांगण में लीला का स्वरूप बदल कर राम कथा का आयोजन पं सुखनंदन मिश्र द्वारा किया जाएगा।
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प्रचार मंत्री संतोष जायसवाल ने बताया कि मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रमों का वर्चुअल प्रसारण फेसबुक से श्री रामलीला सेवा समिति पेज पर किया जाएगा और मंदिर प्रांगण में कोविड नियमों के अनुरूप भक्तगण दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे। बैठक में प्रबंधक राम लखन श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष सरदार भूपेंद्र सिंह, राजेश गुप्ता, राजू पटेल, रमेश निगम आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
1826 से हो रही रामलीला
रामलला जन्मस्थली अयोध्या और नवाबों की राजधानी लखनऊ के बीच स्थित इस जिले की रामलीला की बात ही कुछ और है। लालटेन की रोशनी में शुरू हुई रामलीला गैसबत्ती युग से होते हुए चकाचौंध भरी लाइट तक पहुंच गई। शहर स्थित दशहराबाग में सन 1826 ई. में पूर्वजों द्वारा डाली गई रामलीला की परंपरा वक्त के साथ मजबूत होती गई। प्रभु राम के अयोध्या छोड़ने से लेकर रावण वध करने तक की लीलाएं हर वर्ष अपनी अमिट छाप छोड़ती रही हैं, पर इस बार रामलीला मंचन नहीं होने से लोगों में मायूसी है।
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मुख्य संरक्षक सुधीर कुमार सिंह सिद्धू ने कहा कि सरकार ने रामलीला की मंचन की अनुमति दी है, लेकिन मेले में सैकड़ों की भीड़ रोक पाना संभव नहीं है। इस वर्ष रामलीला स्थगित की जाएगी और अग्रिम वर्षों में रामलीला की भव्यता का प्रयास किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि श्री राम लीला दशहरा मंदिर में सूक्ष्म लीला का आयोजन किया जाएगा।
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समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष संतोष सिंह व महामंत्री शिवकुमार ने बताया कि बीते वर्ष मंदिर प्रांगण में लीला का आयोजन किया गया था, किंतु इस बार मंदिर प्रांगण में लीला का स्वरूप बदल कर राम कथा का आयोजन पं सुखनंदन मिश्र द्वारा किया जाएगा।
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प्रचार मंत्री संतोष जायसवाल ने बताया कि मंदिर प्रांगण में आयोजित कार्यक्रमों का वर्चुअल प्रसारण फेसबुक से श्री रामलीला सेवा समिति पेज पर किया जाएगा और मंदिर प्रांगण में कोविड नियमों के अनुरूप भक्तगण दर्शन लाभ प्राप्त कर सकेंगे। बैठक में प्रबंधक राम लखन श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष सरदार भूपेंद्र सिंह, राजेश गुप्ता, राजू पटेल, रमेश निगम आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
1826 से हो रही रामलीला
रामलला जन्मस्थली अयोध्या और नवाबों की राजधानी लखनऊ के बीच स्थित इस जिले की रामलीला की बात ही कुछ और है। लालटेन की रोशनी में शुरू हुई रामलीला गैसबत्ती युग से होते हुए चकाचौंध भरी लाइट तक पहुंच गई। शहर स्थित दशहराबाग में सन 1826 ई. में पूर्वजों द्वारा डाली गई रामलीला की परंपरा वक्त के साथ मजबूत होती गई। प्रभु राम के अयोध्या छोड़ने से लेकर रावण वध करने तक की लीलाएं हर वर्ष अपनी अमिट छाप छोड़ती रही हैं, पर इस बार रामलीला मंचन नहीं होने से लोगों में मायूसी है।