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Barabanki News: नहीं लगा बूढ़े बाबा का मेला, निगरानी के बीच सन्नाटा
Thu, 15 May 2025 01:39 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 15 May 2025 01:39 AM IST
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बाराबंकी। जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी दूर स्थित सतरिख में सैयद सालार साहू गाजी रहमतुल्ला अलेह ऊर्फ बूढ़े बाबा की दरगाह पर हर साल लगने वाला पारंपरिक मेला इस बार नहीं लग सका। 14 से 18 मई तक उर्स व मेले के पांच दिवसीय मेले की प्रशासन ने अनुमति नहीं दी थी। इसके चलते बुधवार को दरगाह परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जायरीनों की चहल पहल की जगह सन्नाटा पसरा रहा। सुरक्षा के दृष्टिगत पूरे मेला परिसर की निगरानी पुलिस के साथ ही ड्रोन की मदद की जा रही है।
सतरिख का यह मेला हर साल जेठ माह के बड़े मंगल के बाद लगता था। इसमें जिले के साथ ही लखनऊ, कानपुर, सीतापुर, अंबेडकरनगर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बलरामपुर सहित अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में जायरीन शामिल होने आते थे। इस दौरान लगने वाले मेले में खानपान, कपड़े, घर गृहस्थी के सामान, खिलौने और मनोरंजन के अन्य साधनों की दुकानें सजती थी। जायरीन चादर चढ़ा कर मेले में खरीदारी करते थे।
पूर्व में भी एक आक्रमणकारी का महिमा मंडन करने का तर्क देकर मेला आयोजन रोकने की मांगे होती रहीं। बीते कुछ माह से इस मांग ने जोर पकड़ लिया। इस पर पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई। एएसपी दक्षिणी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर मेला लगता है, उस भूमि को लेकर कई आपत्तियां आई थीं। इसलिए कानून व्यवस्था की स्थिति के बिगड़ने की आशंका को देखते हुए इस बार मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई।
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महमूद गजनवी के सेनापति थे सैयद सालार साहू गाजी
बहराइच में सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले मेले को भी रद्द किया जा चुका है। सतरिख में मसूद गाजी के पिता सैयद सालार साहू गाजी की दरगाह है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सैयद सालार साहू गाजी महमूद गजनवी का सेनापति था। जिसने लूटपाट करने के साथ धर्म परिवर्तन करवाया। जबकि वास्तव में सतरिख, महर्षि वशिष्ठ से जुड़ा एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान है।
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सतरिख का यह मेला हर साल जेठ माह के बड़े मंगल के बाद लगता था। इसमें जिले के साथ ही लखनऊ, कानपुर, सीतापुर, अंबेडकरनगर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बलरामपुर सहित अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में जायरीन शामिल होने आते थे। इस दौरान लगने वाले मेले में खानपान, कपड़े, घर गृहस्थी के सामान, खिलौने और मनोरंजन के अन्य साधनों की दुकानें सजती थी। जायरीन चादर चढ़ा कर मेले में खरीदारी करते थे।
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पूर्व में भी एक आक्रमणकारी का महिमा मंडन करने का तर्क देकर मेला आयोजन रोकने की मांगे होती रहीं। बीते कुछ माह से इस मांग ने जोर पकड़ लिया। इस पर पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई। एएसपी दक्षिणी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि जिस स्थान पर मेला लगता है, उस भूमि को लेकर कई आपत्तियां आई थीं। इसलिए कानून व्यवस्था की स्थिति के बिगड़ने की आशंका को देखते हुए इस बार मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी गई।
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महमूद गजनवी के सेनापति थे सैयद सालार साहू गाजी
बहराइच में सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले मेले को भी रद्द किया जा चुका है। सतरिख में मसूद गाजी के पिता सैयद सालार साहू गाजी की दरगाह है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सैयद सालार साहू गाजी महमूद गजनवी का सेनापति था। जिसने लूटपाट करने के साथ धर्म परिवर्तन करवाया। जबकि वास्तव में सतरिख, महर्षि वशिष्ठ से जुड़ा एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान है।