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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   'No Bag Day' goes up in smoke; shoulders slump under the weight of schoolbags.

Barabanki News: हवा में उड़ा नो बैग डे, बस्ते के बोझ से झुक गए कंधे

Sun, 30 Aug 2026 12:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 12:27 AM IST
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'No Bag Day' goes up in smoke; shoulders slump under the weight of schoolbags.
 बच्चे

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बाराबंकी। शनिवार की सुबह स्कूल की घंटी बजी। ...बच्चे पहुंचे पर बस्ते का बोझ साथ था। नो बैग डे का नियम था पर जानकारी का अकाल था। दूसरा शनिवार भी बीत गया। लेकिन बदलाव नजर नहीं आया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत बच्चों को बस्ते के बोझ से आजादी देनी थी। 830 परिषदीय स्कूलों में हुनर सिखाने की तैयारी थी। प्रति स्कूल 6,500 रुपये का बजट भी दिया गया। मकसद था रोबोटिक्स, माटी कला और व्यावहारिक ज्ञान। मगर प्रचार का पहिया घूम न सका। अभिभावक अनजान रहे। शिक्षक जानकारी देना भूल गए। नतीजा यह रहा कि खिलखिलाने का दिन फिर भारी बस्ते में दब गया।
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जमीनी हकीकत पर गौर करें तो कंपोजिट विद्यालय कोटवाधाम के बाहर बच्चे भारी बैग लादे स्कूल से घर लौट रहे थे। साक्षी, आलोक और गुड्डू ने बताया कि किताबें न लाने पर मास्टर साहब की डांट का डर था। सिद्धौर के प्राथमिक विद्यालय के बाहर कक्षा तीन की छात्रा रोशनी भी बस्ते के वजन से झुकी नजर आईं। अभिभावक रामकुमार ने बताया कि स्कूल से नो बैग डे की कोई जानकारी ही नहीं मिली थी।
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दरियाबाद के प्राथमिक विद्यालय तृतीय की सावरीन और दीपिका सहित सभी बच्चे हुनर सीखने के बजाय किताबों के पन्ने पलटते रहे। प्रति स्कूल मिला 6,500 रुपये का बजट धरातल पर उतरने के बजाय कागजी फाइलों में सिमट कर रह गया। विभागीय सुस्ती के कारण न तो शिक्षकों ने बच्चों को सचेत किया और न ही अभिभावकों को जागरूक किया गया। प्रचार-प्रसार के इसी अभाव में बच्चों का खेलकूद और व्यावहारिक ज्ञान सीखने का शनिवार भी भारी-भरकम बस्ते की भेंट चढ़ गया।

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बीईओ के साथ प्रधानाध्यापकों को आदेश का पालन कराने के निर्देश दिए गए थे। दूसरे शनिवार को भी बच्चों के बैग लेकर आने की बात सामने आई है। प्रधानाध्यापकों को कड़े निर्देश जारी किए जा रहे हैं। पीटीएम के जरिये अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा, ताकि तय शनिवार को बच्चे बिना बस्ते के स्कूल आएं।
नवीन कुमार पाठक, बीएसए

 बच्चे

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