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कृत्रिम गर्भाधान से मवेशियों में बढ़ेगी दुग्ध उत्पादन की क्षमता
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बाराबंकी। जिले में पशुओं की नस्ल में सुधार लाकर दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने को लेकर करीब दो हजार मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तीसरे चरण में पूरे जिले के इच्छुक पशुपालकों के 50 हजार पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान कर नस्ल को सुधारा जाना है। एक अगस्त से 31 मई तक चलने वाले इस अभियान में पशुपालकों को नि:शुल्क लाभ दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत पहले चरण में 22 हजार तो दूसरे चरण में लगभग 36 हजार पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया गया था। एक अगस्त से शुरू हुए तीसरे चरण में अब तक लगभग दो हजार मवेशियों (गाय और भैंस) का कृत्रिम गर्भाधान पशु चिकित्सकों द्वारा किया जा चुका है। पशुपालकों को लाभ देने के लिए जिले के सभी गांवों को चिह्नित किया गया है। विभाग को 8.55 लाख में से 50 हजार पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान करने का लक्ष्य मिला है ताकि पशुओं की नस्ल में सुधार लाकर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में किसानों को फायदा मिल सके। लक्ष्य को 31 मई 2022 तक पूरा करना है।
कार्यकर्ताओं को मिलेंगे 50 रुपये
पशु चिकित्सालय ले जाकर पशुओँ में गर्भाधान कराने पर 20 रुपये पशुपालकों को देने पड़ते थे लेकिन अब योजना के तहत पशुपालकों को रुपये नहीं देने होंगे। पशुपालन विभाग के कर्मचारी पशुपालकों के घर पहुंच कर मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान करेंगे। इसके लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को प्रति गर्भाधान पर 50 रुपये मिलेंगे।
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दो माह में करीब दो हजार मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। 50 हजार मवेशियों में कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य को समय से पूरा कर लिया जाएगा। मवेशियों में नस्ल सुधार से पशुपालकों को फायदा पहुंचेगा। - डॉ. मार्कंडेय, सीवीओ।
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राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत पहले चरण में 22 हजार तो दूसरे चरण में लगभग 36 हजार पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया गया था। एक अगस्त से शुरू हुए तीसरे चरण में अब तक लगभग दो हजार मवेशियों (गाय और भैंस) का कृत्रिम गर्भाधान पशु चिकित्सकों द्वारा किया जा चुका है। पशुपालकों को लाभ देने के लिए जिले के सभी गांवों को चिह्नित किया गया है। विभाग को 8.55 लाख में से 50 हजार पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान करने का लक्ष्य मिला है ताकि पशुओं की नस्ल में सुधार लाकर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में किसानों को फायदा मिल सके। लक्ष्य को 31 मई 2022 तक पूरा करना है।
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कार्यकर्ताओं को मिलेंगे 50 रुपये
पशु चिकित्सालय ले जाकर पशुओँ में गर्भाधान कराने पर 20 रुपये पशुपालकों को देने पड़ते थे लेकिन अब योजना के तहत पशुपालकों को रुपये नहीं देने होंगे। पशुपालन विभाग के कर्मचारी पशुपालकों के घर पहुंच कर मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान करेंगे। इसके लिए प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं को प्रति गर्भाधान पर 50 रुपये मिलेंगे।
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दो माह में करीब दो हजार मवेशियों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया है। 50 हजार मवेशियों में कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य को समय से पूरा कर लिया जाएगा। मवेशियों में नस्ल सुधार से पशुपालकों को फायदा पहुंचेगा। - डॉ. मार्कंडेय, सीवीओ।