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बिना मान्यता के संचालित मिले 102 मदरसे
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बाराबंकी। जिले में संचालित गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की जांच करीब पूरी हो गई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और बीएसए की तीन सदस्यीय कमेटी ने करीब एक महीने की जांच के बाद जिले में 102 मदरसे ऐसे पाए जो बिना मान्यता के चल रहे हैं। करीब आधा दर्जन मदरसे बंद भी मिले। एक-एक मदरसे का ब्यौरा जुटाने के बाद अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग पूरी रिपोर्ट बनाकर 25 अक्टूबर से पहले शासन को भेज देगा।
जिले में करीब 320 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। शासन ने 12 बिंदुओं पर बिना मान्यता के चल रहे मदरसों का सर्वे शुरू करने का आदेश पिछले महीने ही दिया था। इसके बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और बीएसए के प्रतिनिधि को कमेटी में शामिल कर 14 सितंबर से सर्वे शुुरू कर दिया था। कमेटी ने मदरसों का सर्वे करने में 12 बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। इसमें मान्यता, संबद्घता, बच्चों की संख्या, शिक्षकों की संख्या, पाठ्यक्रम व शिक्षण सामग्री आदि शामिल थी।
करीब एक महीने के बाद कमेटी को जिले में 102 मदरसे बिना मान्यता के चलते मिले। इनमें करीब 400 शिक्षक व सात हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर मदरसे दारूल उलूम नदवा लखनऊ व देवबंद से संबद्ध कर संचालित होते पाए गए तो कई चिटफंड से कमेटियां बनाकर संचालित हो रहे थे। सर्वे में करीब आधा दर्जन मदरसे बंद भी मिले। सर्वे में कई मदरसों में बैठने की सुविधा ठीक नहीं मिली तो कहीं बच्चों के हिसाब से शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं थी। सर्वे में एक-एक मदरसे का ब्यौरा अलग-अलग रखा गया है।
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मदरसों का सर्वे पूरा होने को है। करीब 100 मदरसों में 12 बिंदुओं पर जांच हुई है। शासन द्वारा केवल सर्वे कराने का निर्देश दिया गया था। मदरसों में कमियां पाये जाने पर कार्रवाई आदि का कोई निर्देश नहीं था। पूरी रिपोर्ट 25 अक्तूबर तक शासन को भेज दी जाएगी।
-बालेंदु द्विवेदी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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जिले में करीब 320 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। शासन ने 12 बिंदुओं पर बिना मान्यता के चल रहे मदरसों का सर्वे शुरू करने का आदेश पिछले महीने ही दिया था। इसके बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और बीएसए के प्रतिनिधि को कमेटी में शामिल कर 14 सितंबर से सर्वे शुुरू कर दिया था। कमेटी ने मदरसों का सर्वे करने में 12 बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। इसमें मान्यता, संबद्घता, बच्चों की संख्या, शिक्षकों की संख्या, पाठ्यक्रम व शिक्षण सामग्री आदि शामिल थी।
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करीब एक महीने के बाद कमेटी को जिले में 102 मदरसे बिना मान्यता के चलते मिले। इनमें करीब 400 शिक्षक व सात हजार छात्र अध्ययनरत हैं। अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर मदरसे दारूल उलूम नदवा लखनऊ व देवबंद से संबद्ध कर संचालित होते पाए गए तो कई चिटफंड से कमेटियां बनाकर संचालित हो रहे थे। सर्वे में करीब आधा दर्जन मदरसे बंद भी मिले। सर्वे में कई मदरसों में बैठने की सुविधा ठीक नहीं मिली तो कहीं बच्चों के हिसाब से शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं थी। सर्वे में एक-एक मदरसे का ब्यौरा अलग-अलग रखा गया है।
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मदरसों का सर्वे पूरा होने को है। करीब 100 मदरसों में 12 बिंदुओं पर जांच हुई है। शासन द्वारा केवल सर्वे कराने का निर्देश दिया गया था। मदरसों में कमियां पाये जाने पर कार्रवाई आदि का कोई निर्देश नहीं था। पूरी रिपोर्ट 25 अक्तूबर तक शासन को भेज दी जाएगी।
-बालेंदु द्विवेदी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी