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एक्सपायर्ड लाइसेंसों पर संचालित हो रहे 157 अस्पताल
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बाराबंकी। एक्सपायर्ड हो चुके लाइसेंसों पर अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है। जिले में तकरीब 157 अस्पताल ऐसे हैं जिनके लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं किया गया है। इसके बाद भी संचालक बेधड़क होकर अस्पतालों का संचालन ही नहीं कर रहे हैं बल्कि मरीजों को भर्ती कर मनमानी रकम वसूल रहे हैं। मगर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा रही है। क्योंकि इन्हें विभाग के ही कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों का खुला संरक्षण मिला हुआ है।
जिले में पंजीकृत निजी अस्पतालों की संख्या 203 है। इन सभी का लाइसेंस बीते माह 30 अप्रैल को एक्स्पायर्ड हो चुका है। इससे पहले की लाइसेंस एक्सपायर्ड हो सभी को अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण करा लेना चाहिए। परंतु अभी तक महज 46 लोगों ने ही अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण कराया है 157 निजी अस्पताल संचालक ऐसे हैं जो बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए ही अस्पताल का संचालन कर रहे हैं।
यहां पर मरीज भी भर्ती किए जा रहे हैं और उनसे इलाज के नाम पर मोटी रकम भी वसूल की जा रही है परंतु कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। अधिकारियों की टीम अस्पतालों तक जाती है और औपचारिकता निभाकर लौट आती है।
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इसके अलावा कई अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्हें विभाग के ही अधिकारियों और कर्मचारियों का खुला संरक्षण मिला हुआ है इसके चलते ये लाइसेंसों का नवीनीकरण कराने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि नियमानुसार लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना अस्पताल का संचालन किया जाना ही गलत है।
सभी निजी अस्पताल संचालकों का पहले ही निर्देश दिए गए थे कि वह अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण निर्धारित अवधि के अंदर करा लें। यदि जांच में बिना लाइसेंस नवीनीकरण कराए ही अस्पताल का संचालन होता पाया गया तो ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ
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जिले में पंजीकृत निजी अस्पतालों की संख्या 203 है। इन सभी का लाइसेंस बीते माह 30 अप्रैल को एक्स्पायर्ड हो चुका है। इससे पहले की लाइसेंस एक्सपायर्ड हो सभी को अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण करा लेना चाहिए। परंतु अभी तक महज 46 लोगों ने ही अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण कराया है 157 निजी अस्पताल संचालक ऐसे हैं जो बिना लाइसेंस का नवीनीकरण कराए ही अस्पताल का संचालन कर रहे हैं।
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यहां पर मरीज भी भर्ती किए जा रहे हैं और उनसे इलाज के नाम पर मोटी रकम भी वसूल की जा रही है परंतु कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हो रहा है। अधिकारियों की टीम अस्पतालों तक जाती है और औपचारिकता निभाकर लौट आती है।
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इसके अलावा कई अस्पताल संचालक ऐसे हैं जिन्हें विभाग के ही अधिकारियों और कर्मचारियों का खुला संरक्षण मिला हुआ है इसके चलते ये लाइसेंसों का नवीनीकरण कराने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि नियमानुसार लाइसेंस का नवीनीकरण कराए बिना अस्पताल का संचालन किया जाना ही गलत है।
सभी निजी अस्पताल संचालकों का पहले ही निर्देश दिए गए थे कि वह अपने लाइसेंसों का नवीनीकरण निर्धारित अवधि के अंदर करा लें। यदि जांच में बिना लाइसेंस नवीनीकरण कराए ही अस्पताल का संचालन होता पाया गया तो ऐसे अस्पताल संचालकों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. रामजी वर्मा, सीएमओ