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फर्जी अभिलेखों से बेची जा रही थी बेशकीमत जमीन,पांच गिरफ्तार

Sat, 28 Nov 2020 12:24 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 28 Nov 2020 12:24 AM IST
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Five arrested selling fake land
बाराबंकी। लखनऊ से सटे रेंदुआ पल्हरी स्थित एक बेशकीमती जमीन को बेचने की साजिश करने वाले गिरोह के सरगना समेत पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं जालसाजों द्वारा जमीन का मालिक बनाए गए एक वृद्ध का आधार कार्ड, पैन कार्ड व बैंक खाते की पासबुक भी बरामद की। इसका खुलासा शुक्रवार को पुलिस लाइन सभागार में एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने किया।
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एसपी ने बताया कि चंदौली जिले के मूल निवासी अरुण कुमार सिंह भारतीय समुद्रीय विश्वविद्यालय कोलकाता में वैज्ञानिक हैं। वैज्ञानिक अरुण ने देवा कोतवाली क्षेत्र के रेंदुआ पल्हरी में वर्ष 1989 में 66 हजार स्क्वायर फीट जमीन भगवानदीन, गुरुचरन और संतराम से खरीदी थी। कुछ दिन पहले उनके पास एक फोन पहुंचा कि आप अपनी जमीन बेच रहे हैं क्या? इस पर उन्होंने पहले तो ना किया।
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बाद में कारण पूछा तो फोन करने वाले ने बताया कि कुछ लोग आपकी जमीन बेच रहे हैं और मै उसे खरीदना चाह रहा हूं। जमीन बेचने वालों के पास आपके नाम के अभिलेख व बैंक पासबुक तक हैं। मगर, मुझे शक हुआ तो आपका नंबर जुटाकर कॉल किया।
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इसके बाद जमीन के असली मालिक अरुण कुमार सिंह ने पुलिस व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को फोन कर इसकी शिकायत की। वैज्ञानिक ने बताया कि उनके सभी अभिलेख कोलकाता के पते पर बने हैं। इस पर देवा कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। इस पर मामले को गंभीरता से लेते हुए एएसपी उत्तरी आरएस गौतम के निर्देशन व सीओ सिटी सीमा यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम का गठन किया गया।
एसपी ने बताया कि इसके बाद टीम ने अथक प्रयास के बाद भौतिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के अलावा डिजिटल साक्ष्यों को जुटाया तो यह सफलता हाथ लगी। इसके बाद देवा कोतवाली के थानाध्यक्ष प्रकाश चंद्र शर्मा की टीम ने गिरोह के सरगना व पेशे से अधिवक्ता रामनगर थाने के गुंदौरा निवासी सुशील कुमार मिश्रा, जमीन के मालिक बने किसान बहराइच जिले के जरवल थाना क्षेत्र निवासी सालिक राम व इसी गांव के निवासी झोलाछाप वीरेंद्र, नगर कोतवाली के कोठी डीह निवासी जितेंद्र व देवा के मलूकपुर निवासी अशोक कुमार को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए सुशील कुमार मिश्र के पास से अरुण के नाम का फर्जी आधार कार्ड व पैन कार्ड बरामद किया। इस मौके पर एएसपी उत्तरी आर एस गौतम, सीओ सिटी सीमा यादव मौजूद थी।
पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि आधार कार्ड किसी व्यक्ति के पते व फोटो आदि के प्रमाण को स्वीकृति नहीं देता है। इसलिए आधार कार्ड में दिए भौतिक पते को पहचान का आधार नहीं बनाना चाहिए। आधार डाटा बेस किसी व्यक्ति को फिंगर प्रिंट अथवा आइरिस के आधार पर पहचान देते हैं। ऐसे में इसकी जांच इसी के आधार होनी चाहिए। इस बारे में आधार मुख्यालय से भी बात की गई। भारत सरकार को पत्र भी लिखा जाएगा ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों।

एसपी ने बताया कि फर्जी अरुण कुमार बना वृद्ध जूते-मोजे पहनकर व सिर पर पगड़ी बांधकर जमीन के खरीदारों से मिलने जाता था। मगर, इतनी बड़ी भूमि का मालिक बुलाने पर खरीदारों की गाड़ी में बैठकर जाने लगा तो शक को गहराता गया।
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