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नहीं थम रहा बुखार का कहर, किशोर व मासूम की जान गई
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बाराबंकी। जिले के हैदरगढ़ व त्रिवेदीगंज क्षेत्र में फैले बुखार की चपेट में आकर शुरू हुआ मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। क्षेत्र के अलग-अलग गांव में बुखार से पीड़ित नौ माह के मासूम व एक किशोर ने दम तोड़ दिया।
दोनों का निजी चिकित्सक से इलाज कराते हुए तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सीएचसी ले जाया गया था। गांव में कई अन्य लोग बुखार से ग्रसित हैं। घटना के बाद हरकत में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एसीएमओ की अगुवाई में गांव पहुंच कर जांच की।
हैदरगढ़ ब्लॉक क्षेत्र के बरांवा गांव निवासी मातादीन के पुत्र राजकुमार (14) को बुखार होने पर दस दिन से परिवारीजन निजी चिकित्सक के पास इलाज करा रहे थे। फायदा न होने पर तीन दिन पहले सीएचसी लेकर गए लेेकिन वहां भी इलाज से संतुष्टि न मिलने पर हैदरगढ़ के निजी डॉक्टर के पास पहुंचे पर वहां भी सुधार नहीं हुआ।
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बुधवार सुबह तबीयत बिगड़ने पर उसे लेकर सीएचसी गए जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। बुखार से मौत की सूचना पर पूरे गांव के लोग दुखी हैं, बुखार से पीड़ित लोगों में काफी डर है। वहीं इसी गांव में अन्य आठ लोग बुखार से पीड़ित पाए गए हैं।
उधर, धनऊ का पुरवा गांव में बुखार से पीड़ित प्रदीप कुमार के नौ माह के पुत्र अनीस कुमार का इलाज हैदरगढ़ में निजी चिकित्सक के पास हो रहा था।
मंगलवार को हालत गंभीर होने पर परिवारीजन उसे सीएचसी लेकर गए थे। जहां शाम को मासूम की मौत होने से परिवार में मातम पसरा है और हर कोई स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है।
एसीएमओ डॉ. राजाराम व सीएचसी अधीक्षक डॉ धर्मेंद्र राय की अगुवाई में स्वास्थ्य टीम ने बरांवा गांव में जांच की है। बुखार से पीड़ित मिली रूपा, काजल, गंगदेई, कृपाशंकर, रूपवती, रामतीर्थ, चंदनी व रोशनी के खून का नमूना जांच के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया है। टीम ने मृतक किशोर के परिवारीजनों से इलाज के बारे में जानकारी की तथा आस-पड़ोस के घरों में लोगों की जांच की।
हैदरगढ़ के सीएचसी अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र राय ने बताया कि बरांवा गांव के मरीज का इलाज सीएचसी पर किया गया था। निजी चिकित्सक से इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर दोबारा सीएचसी ला रहे थे कि रास्ते में मौत हो गई थी।
वहीं धनऊ का पुरवा गांव में बुखार से पीड़ित नौ माह के बच्चे का इलाज निजी चिकित्सक के पास हो रहा था। गंभीर अवस्था में सीएचसी पर इलाज किया गया था लेकिन काफी देर होने के चलते उसको बचाया नहीं जा सका। दोनो गांवों में स्वास्थ्य टीम ने जांच की है। मरीज को सीएचसी पर दिखाने तथा साफ-सफाई पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी गई है।
हैदरगढ़ तहसील क्षेत्र के गांव में छह अगस्त से बुखार ने 14 लोगों की जान ली है। गांव में बुखार फैलने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। छह अगस्त को मर्दापुर में शिवानी व आठ अगस्त को शौरभ शुक्ला तथा 24 अगस्त को बीजापुर की राधा व 29 अगस्त को दीपक की जान गई थी।
इसी तरह ग्राम चौबीसी में मानक व उमेश, भिखरा गांव में 26 अगस्त को डेढ़ वर्षीय वैशाली, लोनीकटरा के इमामअली, मोहम्मदपुर की रुचि की मौत बुखार से हुई है। सात सितंबर को कोड़वा गांव में डेढ़ वर्षीय राजदीप के बाद अब नौ माह के अनीस व राजकुमार की जान बुखार ने ली है। सभी में पहले सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया होता तो कई जाने बचाई जा सकती थीं।
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दोनों का निजी चिकित्सक से इलाज कराते हुए तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सीएचसी ले जाया गया था। गांव में कई अन्य लोग बुखार से ग्रसित हैं। घटना के बाद हरकत में आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एसीएमओ की अगुवाई में गांव पहुंच कर जांच की।
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हैदरगढ़ ब्लॉक क्षेत्र के बरांवा गांव निवासी मातादीन के पुत्र राजकुमार (14) को बुखार होने पर दस दिन से परिवारीजन निजी चिकित्सक के पास इलाज करा रहे थे। फायदा न होने पर तीन दिन पहले सीएचसी लेकर गए लेेकिन वहां भी इलाज से संतुष्टि न मिलने पर हैदरगढ़ के निजी डॉक्टर के पास पहुंचे पर वहां भी सुधार नहीं हुआ।
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बुधवार सुबह तबीयत बिगड़ने पर उसे लेकर सीएचसी गए जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। बुखार से मौत की सूचना पर पूरे गांव के लोग दुखी हैं, बुखार से पीड़ित लोगों में काफी डर है। वहीं इसी गांव में अन्य आठ लोग बुखार से पीड़ित पाए गए हैं।
उधर, धनऊ का पुरवा गांव में बुखार से पीड़ित प्रदीप कुमार के नौ माह के पुत्र अनीस कुमार का इलाज हैदरगढ़ में निजी चिकित्सक के पास हो रहा था।
मंगलवार को हालत गंभीर होने पर परिवारीजन उसे सीएचसी लेकर गए थे। जहां शाम को मासूम की मौत होने से परिवार में मातम पसरा है और हर कोई स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है।
एसीएमओ डॉ. राजाराम व सीएचसी अधीक्षक डॉ धर्मेंद्र राय की अगुवाई में स्वास्थ्य टीम ने बरांवा गांव में जांच की है। बुखार से पीड़ित मिली रूपा, काजल, गंगदेई, कृपाशंकर, रूपवती, रामतीर्थ, चंदनी व रोशनी के खून का नमूना जांच के लिए जिला चिकित्सालय भेजा गया है। टीम ने मृतक किशोर के परिवारीजनों से इलाज के बारे में जानकारी की तथा आस-पड़ोस के घरों में लोगों की जांच की।
हैदरगढ़ के सीएचसी अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र राय ने बताया कि बरांवा गांव के मरीज का इलाज सीएचसी पर किया गया था। निजी चिकित्सक से इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर दोबारा सीएचसी ला रहे थे कि रास्ते में मौत हो गई थी।
वहीं धनऊ का पुरवा गांव में बुखार से पीड़ित नौ माह के बच्चे का इलाज निजी चिकित्सक के पास हो रहा था। गंभीर अवस्था में सीएचसी पर इलाज किया गया था लेकिन काफी देर होने के चलते उसको बचाया नहीं जा सका। दोनो गांवों में स्वास्थ्य टीम ने जांच की है। मरीज को सीएचसी पर दिखाने तथा साफ-सफाई पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी गई है।
हैदरगढ़ तहसील क्षेत्र के गांव में छह अगस्त से बुखार ने 14 लोगों की जान ली है। गांव में बुखार फैलने की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। छह अगस्त को मर्दापुर में शिवानी व आठ अगस्त को शौरभ शुक्ला तथा 24 अगस्त को बीजापुर की राधा व 29 अगस्त को दीपक की जान गई थी।
इसी तरह ग्राम चौबीसी में मानक व उमेश, भिखरा गांव में 26 अगस्त को डेढ़ वर्षीय वैशाली, लोनीकटरा के इमामअली, मोहम्मदपुर की रुचि की मौत बुखार से हुई है। सात सितंबर को कोड़वा गांव में डेढ़ वर्षीय राजदीप के बाद अब नौ माह के अनीस व राजकुमार की जान बुखार ने ली है। सभी में पहले सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया होता तो कई जाने बचाई जा सकती थीं।