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Barabanki News: सच होगा सपना, टीकाराम घाट पर पुल के लिए 32.31 करोड़ मंजूर
Sun, 21 Dec 2025 01:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 21 Dec 2025 01:23 AM IST
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श्रुतिमान शुक्ल
बाराबंकी। आजादी के बाद से जिले की सबसे पुरानी और बहुप्रतीक्षित मांगों में से एक गोमती नदी के बाजपुरा-टीकाराम घाट पर पक्के पुल का सपना आखिरकार हकीकत में बदलने जा रहा है। करीब 50 वर्षों तक यह मुद्दा चुनावी सभाओं में गूंजा, आंदोलन हुए और यहां तक ग्रामीणों ने महीनों तक पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह तक किया। पुल के लिए मंजूरी मिलते ही राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने हैदरगढ़ के विधायक दिनेश रावत को बधाई दी।
हैदरगढ़ क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे संत टीकाराम का धाम है। यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बिंदु है। नदी के दक्षिण किनलारे पर टीकाराम धाम है, तो उस पार उत्तर की ओर बाजपुरा गांव। अब तक यहां नदी पार करने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा थी। नदी के किनारे बसे करीब 250 गांव-मजरों के लाखों ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय और जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए करीब 15 से 25 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। मरीजों को अस्पताल ले जाना हो, छात्रों को स्कूल-कॉलेज पहुंचना हो या किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जानी हो, हर काम में समय, पैसा और जोखिम तीनों बढ़ जाते हैं। कई बार नाव से नदी पार करना जानलेवा साबित हुआ।
साल 2016 में सेतु निर्माण संघर्ष समिति का गठन हुआ और 21 जुलाई 2016 को सैकड़ों ग्रामीणों ने गोमती नदी में उतरकर ऐतिहासिक जल सत्याग्रह शुरू किया। जल सत्याग्रह की गूंज इतनी दूर तक पहुंची कि सांसद व मंत्री ही नहीं सरकार के आला अफसर भी मौके पर पहुंचे। सभी ने पक्के पुल का भरोसा दिलाया। सपा शासनकाल में नवंबर 2016 में गोमती नदी पर पीपे का अस्थायी पुल बनाया गया। हर साल बरसात में यह पुल लगभग चार महीने बंद रहता है, और वही पुरानी समस्या फिर सिर उठा लेती है।
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वर्षों से कठिनाइयों का सामना कर रहे गांव
पक्के पुल के अभाव में गोमती के दोनों किनारों पर बसे करीब 250 गांवों के लोग वर्षों से कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ताला, बेहटा, रुकनुद्दीनपुर, मोहम्मदपुर, जोंधी, शिवराजपुर, नरौली, हरपालपुर, बीजापुर, बरावां, बैरिहा, सालपुर, दुर्गापुरवा, कमेला जैसे गांव हों या नदी पार के बाजपुरा, भेड़िया, पलौली, चकतारा, मेनहुआ, कादीपुर, नई सड़क, बबुरिया सभी की कहानी लगभग एक जैसी है।
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गोमती नदी पर टीकाराम घाट का यह पुल आने वाले वर्षों में बाराबंकी के इतिहास में उस फैसले के रूप में दर्ज होगा, जिसने 75 गांवों को न सिर्फ जोड़ा, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा से रूबरू भी कराया।
- दिनेश रावत, विधायक
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बाराबंकी। आजादी के बाद से जिले की सबसे पुरानी और बहुप्रतीक्षित मांगों में से एक गोमती नदी के बाजपुरा-टीकाराम घाट पर पक्के पुल का सपना आखिरकार हकीकत में बदलने जा रहा है। करीब 50 वर्षों तक यह मुद्दा चुनावी सभाओं में गूंजा, आंदोलन हुए और यहां तक ग्रामीणों ने महीनों तक पानी में खड़े होकर जल सत्याग्रह तक किया। पुल के लिए मंजूरी मिलते ही राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने हैदरगढ़ के विधायक दिनेश रावत को बधाई दी।
हैदरगढ़ क्षेत्र में गोमती नदी के किनारे संत टीकाराम का धाम है। यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बिंदु है। नदी के दक्षिण किनलारे पर टीकाराम धाम है, तो उस पार उत्तर की ओर बाजपुरा गांव। अब तक यहां नदी पार करने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा थी। नदी के किनारे बसे करीब 250 गांव-मजरों के लाखों ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय और जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए करीब 15 से 25 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। मरीजों को अस्पताल ले जाना हो, छात्रों को स्कूल-कॉलेज पहुंचना हो या किसानों को अपनी उपज मंडी तक ले जानी हो, हर काम में समय, पैसा और जोखिम तीनों बढ़ जाते हैं। कई बार नाव से नदी पार करना जानलेवा साबित हुआ।
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साल 2016 में सेतु निर्माण संघर्ष समिति का गठन हुआ और 21 जुलाई 2016 को सैकड़ों ग्रामीणों ने गोमती नदी में उतरकर ऐतिहासिक जल सत्याग्रह शुरू किया। जल सत्याग्रह की गूंज इतनी दूर तक पहुंची कि सांसद व मंत्री ही नहीं सरकार के आला अफसर भी मौके पर पहुंचे। सभी ने पक्के पुल का भरोसा दिलाया। सपा शासनकाल में नवंबर 2016 में गोमती नदी पर पीपे का अस्थायी पुल बनाया गया। हर साल बरसात में यह पुल लगभग चार महीने बंद रहता है, और वही पुरानी समस्या फिर सिर उठा लेती है।
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वर्षों से कठिनाइयों का सामना कर रहे गांव
पक्के पुल के अभाव में गोमती के दोनों किनारों पर बसे करीब 250 गांवों के लोग वर्षों से कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ताला, बेहटा, रुकनुद्दीनपुर, मोहम्मदपुर, जोंधी, शिवराजपुर, नरौली, हरपालपुर, बीजापुर, बरावां, बैरिहा, सालपुर, दुर्गापुरवा, कमेला जैसे गांव हों या नदी पार के बाजपुरा, भेड़िया, पलौली, चकतारा, मेनहुआ, कादीपुर, नई सड़क, बबुरिया सभी की कहानी लगभग एक जैसी है।
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गोमती नदी पर टीकाराम घाट का यह पुल आने वाले वर्षों में बाराबंकी के इतिहास में उस फैसले के रूप में दर्ज होगा, जिसने 75 गांवों को न सिर्फ जोड़ा, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा से रूबरू भी कराया।
- दिनेश रावत, विधायक