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बरसात आते ही बढ़ जाती सपृदंश की घटनाएं
Updated Thu, 22 Jun 2017 01:48 AM IST
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बरसात आते ही बढ़ जातीं सर्प दंश की घटनाएं, लोग झाड़फूंक के चक्कर में गंवाते जान
छह माह के अंदर सर्प दंश ने छीनी छह जानें
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। सर्प दंश के बाद आज भी अक्सर लोग पहले झाड़ फूंक कराने के चक्कर में पड़कर जान गवां रहे हैं। जबकि सरकार ने सभी सीएचसी व जिला अस्पताल में सर्प दंश के इलाज को लेकर निशुल्क दवाएं उपलब्ध करा रखी हैं। जिससे मरीजों का तत्काल इलाज कर उनकी जान बचाई जा सके। बरसात का सीजन आते ही ऐसी घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है। प्रतिदिन कहीं न कहीं सर्प दंश का शिकार होकर मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। बीते छह माह में सिर्फ जिला अस्पताल में सांप डसने के करीब 120 मरीजों की आमद हो चुकी है, जिसमें छह की मौत हुई व अन्य को स्वस्थ किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि जिन छह मरीजों की मौत जिला अस्पताल में हुई है वह सीधा अस्पताल न आकर पहले झाड़फूंक के चक्कर में गंभीर अवस्था में आए थे। सर्प दंश के मरीजों के इलाज के लिए इमरजेंसी में हर समय एंटी स्नैक वेनम के 45 वॉयल सुरक्षित रहते हैं। वहीं अस्पताल में 660 व मुख्य औषधि भंडार में 871 वॉयल का स्टॉक होने का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा जिले की सभी कोल्ड चेन स्थापित सीएचसी पर भी स्नैक बाइट उपलब्ध होने का भी दावा विभाग कर रहा है। इसके साथ जो भी सर्प दंश के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं उन्हें एंटी स्नैक वेनम की सुविधा दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
देशी इलाज करने में गवां रहे जान
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सांप डसने के बाद पहले उसे नीम की पत्ती व नमक खिलाकर पुष्टि करते हैं। गांव में ही मंत्र के माध्यम से बिष बांधने की प्रक्रिया पूरी कराते हैं, उसके बाद जब मरीज ज्यादा गंभीर हो जाता है तो उसे लेकर सीधा अस्पताल भागते हैं। सांप डसने के बाद का जो समय फूंकझाड़ में जाता है वहीं आखिर में मौत का कारण बनता है। कई स्थानों पर झोलाछाप सांप डसने का इलाज गारंटी के साथ तक करते हैं जिनके चक्कर में फंसकर अक्सर मरीजों की मौत हो जाती है।
सात दिनमें हो चुकीं तीन मौतें
बीते एक सप्ताह के अंदर सर्प दंश से तीन लोगों की जान जा चुकी है। 14 जून को शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सेखनपुर निवासी मुनीर घर के बाहर लकड़ी उठाने गया था, जहां सांप ने उसे डस लिया था। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं 16 जून को कोठी थाना क्षेत्र के ग्राम बक्सांवा निवासी शबा परवीन (12) पुत्री इब्राहिम के पैर में घर में खाना बनाते समय सांप ने डस लिया था। जिसकी मौत हो गई थी। वहीं इसी दिन सतरिख थाना क्षेत्र के ग्राम नानमऊ निवासी सुधा (18) पुत्री बीरेंद्र की भी मौत सर्प दंश से हो चुकी है।
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सर्प दंश से बचाव के उपाय
सर्प दंश के शिकार मरीज के शरीर में चक्कते पड़ने लगते हैं, बेहोशी व उल्टी होने के साथ मुंह से झाग निकलने लगता है। जैैसे ही किसी को सांप डसे तुरंत उस स्थान को ब्लेड से चीरा मारकर थोड़ा ब्लड निकाल दें। उसके बाद घाव को साफ कर तत्काल नजदीकी सीएचसी पर मरीज को भर्ती कराए, किसी पीर, औलिया व गांव के टोटकों से बचें। मरीज को हिम्मत बधाएं और उसे सोने न दें।
- डॉ. राजेश कुशवाहा, फिजीशिएन जिला अस्पताल
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छह माह के अंदर सर्प दंश ने छीनी छह जानें
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। सर्प दंश के बाद आज भी अक्सर लोग पहले झाड़ फूंक कराने के चक्कर में पड़कर जान गवां रहे हैं। जबकि सरकार ने सभी सीएचसी व जिला अस्पताल में सर्प दंश के इलाज को लेकर निशुल्क दवाएं उपलब्ध करा रखी हैं। जिससे मरीजों का तत्काल इलाज कर उनकी जान बचाई जा सके। बरसात का सीजन आते ही ऐसी घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है। प्रतिदिन कहीं न कहीं सर्प दंश का शिकार होकर मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। बीते छह माह में सिर्फ जिला अस्पताल में सांप डसने के करीब 120 मरीजों की आमद हो चुकी है, जिसमें छह की मौत हुई व अन्य को स्वस्थ किया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि जिन छह मरीजों की मौत जिला अस्पताल में हुई है वह सीधा अस्पताल न आकर पहले झाड़फूंक के चक्कर में गंभीर अवस्था में आए थे। सर्प दंश के मरीजों के इलाज के लिए इमरजेंसी में हर समय एंटी स्नैक वेनम के 45 वॉयल सुरक्षित रहते हैं। वहीं अस्पताल में 660 व मुख्य औषधि भंडार में 871 वॉयल का स्टॉक होने का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा जिले की सभी कोल्ड चेन स्थापित सीएचसी पर भी स्नैक बाइट उपलब्ध होने का भी दावा विभाग कर रहा है। इसके साथ जो भी सर्प दंश के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं उन्हें एंटी स्नैक वेनम की सुविधा दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
देशी इलाज करने में गवां रहे जान
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सांप डसने के बाद पहले उसे नीम की पत्ती व नमक खिलाकर पुष्टि करते हैं। गांव में ही मंत्र के माध्यम से बिष बांधने की प्रक्रिया पूरी कराते हैं, उसके बाद जब मरीज ज्यादा गंभीर हो जाता है तो उसे लेकर सीधा अस्पताल भागते हैं। सांप डसने के बाद का जो समय फूंकझाड़ में जाता है वहीं आखिर में मौत का कारण बनता है। कई स्थानों पर झोलाछाप सांप डसने का इलाज गारंटी के साथ तक करते हैं जिनके चक्कर में फंसकर अक्सर मरीजों की मौत हो जाती है।
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सात दिनमें हो चुकीं तीन मौतें
बीते एक सप्ताह के अंदर सर्प दंश से तीन लोगों की जान जा चुकी है। 14 जून को शहर कोतवाली क्षेत्र के ग्राम सेखनपुर निवासी मुनीर घर के बाहर लकड़ी उठाने गया था, जहां सांप ने उसे डस लिया था। निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं 16 जून को कोठी थाना क्षेत्र के ग्राम बक्सांवा निवासी शबा परवीन (12) पुत्री इब्राहिम के पैर में घर में खाना बनाते समय सांप ने डस लिया था। जिसकी मौत हो गई थी। वहीं इसी दिन सतरिख थाना क्षेत्र के ग्राम नानमऊ निवासी सुधा (18) पुत्री बीरेंद्र की भी मौत सर्प दंश से हो चुकी है।
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सर्प दंश से बचाव के उपाय
सर्प दंश के शिकार मरीज के शरीर में चक्कते पड़ने लगते हैं, बेहोशी व उल्टी होने के साथ मुंह से झाग निकलने लगता है। जैैसे ही किसी को सांप डसे तुरंत उस स्थान को ब्लेड से चीरा मारकर थोड़ा ब्लड निकाल दें। उसके बाद घाव को साफ कर तत्काल नजदीकी सीएचसी पर मरीज को भर्ती कराए, किसी पीर, औलिया व गांव के टोटकों से बचें। मरीज को हिम्मत बधाएं और उसे सोने न दें।
- डॉ. राजेश कुशवाहा, फिजीशिएन जिला अस्पताल