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Banda News: कोहरे की मार से खर्च भी नहीं निकाल पा रहीं रोडवेज बसें
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बांदा। कोहरे की मार से परिवहन निगम नौ की लकड़ी नब्बे खर्च, जैसी कहावत से जूझ रहा है। ठंड के कारण परिवहन निगम को रीजन में प्रतिदिन लगभग 13 लाख के राजस्व का नुकसान हो रहा है। कई बसें तो खर्च भी नहीं निकाल पा रही हैं।
चित्रकूटधाम मंडल में परिवहन निगम के पास करीब 400 बसों का बेड़ा है। बांदा, राठ, महोबा, हमीरपुर डिपो की बसों का संचालन होता है। यह बसें दिल्ली, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज आदि मार्गों पर चल रही हैं। लेकिन कोहरे के कारण बसों को शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक के लिए बंद कर दिया जाता है। दिन में ही बसें संचालित हो रही हैं। जिनमें कोहरा व ठंड के कारण दिन में भी सवारियां नहीं मिल रही हैं।
ज्यादातर बसें खाली ही फर्राटा भर रही हैं। ऐसे में निगम की आय घटकर 27 लाख पहुंच गई है। जबकि दिसंबर माह में आय 40 लाख रुपये रोजाना थी। परिवहन निगम के अधिकारियों की माने तो बस में न्यूनतम 48 सवारियां होनी चाहिए। लेकिन 25 फीसदी बसें ऐसी हैं, जिनका 10 और 15 सवारी में संचालन किया जा रहा है। जो अपना खर्च भी नहीं निकाल पा रही हैं। माघ मेले का भी कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है।
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मेला स्पेशल बसों को भी सवारी नहीं मिल रही हैं। ऐसे में परिवहन निगम ने 50 फीसदी मेला स्पेशल बसों को पूर्व निर्धारित रूटों पर भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि शत प्रतिशत मेला स्पेशल बसें माघ मेला के महत्वपूर्ण स्नानों में चलाई जाएंगी, ताकि निगम को घाटे से बचाया जा सके। परिवहन निगम ने माघ मेला के लिए 210 बसों का बेड़ा लगाया है। लेकिन अब यह संख्या घटकर 110 ही रह गई है।
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चित्रकूटधाम मंडल में परिवहन निगम के पास करीब 400 बसों का बेड़ा है। बांदा, राठ, महोबा, हमीरपुर डिपो की बसों का संचालन होता है। यह बसें दिल्ली, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज आदि मार्गों पर चल रही हैं। लेकिन कोहरे के कारण बसों को शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक के लिए बंद कर दिया जाता है। दिन में ही बसें संचालित हो रही हैं। जिनमें कोहरा व ठंड के कारण दिन में भी सवारियां नहीं मिल रही हैं।
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ज्यादातर बसें खाली ही फर्राटा भर रही हैं। ऐसे में निगम की आय घटकर 27 लाख पहुंच गई है। जबकि दिसंबर माह में आय 40 लाख रुपये रोजाना थी। परिवहन निगम के अधिकारियों की माने तो बस में न्यूनतम 48 सवारियां होनी चाहिए। लेकिन 25 फीसदी बसें ऐसी हैं, जिनका 10 और 15 सवारी में संचालन किया जा रहा है। जो अपना खर्च भी नहीं निकाल पा रही हैं। माघ मेले का भी कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है।
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मेला स्पेशल बसों को भी सवारी नहीं मिल रही हैं। ऐसे में परिवहन निगम ने 50 फीसदी मेला स्पेशल बसों को पूर्व निर्धारित रूटों पर भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि शत प्रतिशत मेला स्पेशल बसें माघ मेला के महत्वपूर्ण स्नानों में चलाई जाएंगी, ताकि निगम को घाटे से बचाया जा सके। परिवहन निगम ने माघ मेला के लिए 210 बसों का बेड़ा लगाया है। लेकिन अब यह संख्या घटकर 110 ही रह गई है।