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Banda News: सात साल से बनी ओटी पर ताला, नई के लिए मांग लिए ढाई करोड़
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फोटो-14-ट्रॉमा सेंटर में प्रथम तल पर बनी ओटी के मुख्य गेट पर लगा ताला। अमर उजाला
-ट्रॉमा सेंटर की अत्याधुनिक ओटी का इस्तेमाल तक नहीं
-अब पुरानी व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश पर रुका नया प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में बनाई गई अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (ओटी) सात साल में शुरू नहीं हो सकी। मशीनें और जरूरी व्यवस्थाएं होने के बावजूद इसका ताला तक नहीं खुला। धीरे-धीरे ओटी कबाड़ में तब्दील हो गई। अब अस्पताल प्रशासन ने नई ओटी स्थापित करने के लिए शासन से करीब ढाई करोड़ रुपये मांग लिए। निरीक्षण करने पहुंचे अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. अभय सिंह ने इस पर ब्रेक लगा दिया है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2019 में ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हुआ था। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को तत्काल उपचार देने के उद्देश्य से यहां जरूरी व्यवस्थाएं की गई थीं। भूतल पर माइनर ओटी और प्रथम तल पर अत्याधुनिक मेजर ओटी बनाई गई थी। ऑपरेशन के लिए मशीनों समेत अन्य जरूरी इंतजाम भी किए गए थे। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन सात साल में ओटी का संचालन शुरू नहीं करा सका। नतीजा यह हुआ कि मरीजों के काम आने वाली व्यवस्था धीरे-धीरे कबाड़ में बदलती गई।
वर्तमान में जिला अस्पताल की जनरल ओटी में ऑर्थो और जनरल सर्जरी दोनों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इससे ऑपरेशन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी आधार पर अस्पताल प्रशासन ने नई ओटी स्थापित करने के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा। प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले अपर निदेशक के निरीक्षण और रिपोर्ट को जरूरी बताया गया। जांच में सामने आया कि अस्पताल में पहले से अत्याधुनिक ओटी मौजूद है, लेकिन उसका संचालन शुरू कराने के बजाय उसे अनुपयोगी होने दिया गया। इसके बाद अपर निदेशक ने नई ओटी के प्रस्ताव पर रोक लगाते हुए पुरानी ओटी की मरम्मत कराकर उसे चालू कराने के निर्देश दिए।
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टेक्नीशियन नहीं तो सात साल तक किसका इंतजार
ओटी शुरू नहीं होने पर अस्पताल प्रशासन ने टेक्नीशियन की कमी का हवाला दिया। सवाल है कि जब टेक्नीशियन के अभाव में सात साल से तैयार ओटी का संचालन नहीं हो सका तो नई ओटी बनाने के बाद उसका संचालन कैसे होगा। क्या नई ओटी के लिए ढाई करोड़ रुपये खर्च करने से पहले जरूरी मानव संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिए थी। अपर निदेशक ने ओटी टेक्नीशियन की तैनाती के लिए लिखित पत्र देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सीएमओ के अधीन कार्यरत ओटी टेक्नीशियन को जिला अस्पताल में तैनात करने की बात कही गई है।
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ट्रॉमा सेंटर का मकसद अधूरा, गंभीर मरीज मेडिकल कॉलेज रेफर
ट्रॉमा सेंटर का उद्देश्य दुर्घटनाओं में घायल गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन की सुविधा देना है। लेकिन जिला अस्पताल में इसकी व्यवस्था प्राथमिक उपचार तक सिमटी हुई है। बुखार, पेट दर्द और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल के वार्ड में भेजा जाता है, जबकि गंभीर मरीजों को तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में सात साल से बंद पड़ी ओटी सिर्फ संसाधनों की बर्बादी का उदाहरण नहीं, बल्कि ट्रॉमा सेंटर के मूल उद्देश्य पर भी सवाल है। अब देखना है कि पुरानी ओटी को दुरुस्त कर चालू कराने के निर्देश पर अमल होता है या मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
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वर्जन
जिला अस्पताल की ओर से नई ओटी के लिए ढाई करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था। पुरानी ओटी आज तक शुरू न होने से खराब हो रही है। ऐसे में नए प्रस्ताव को रोक दिया गया है। टेक्नीशियन की मांग करने के लिए निर्देशित किया गया है। बंद पड़ी ओटी को ही संचालित कराया जाएगा। -डॉ. अभय सिंह, अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं
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-अब पुरानी व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश पर रुका नया प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में बनाई गई अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर (ओटी) सात साल में शुरू नहीं हो सकी। मशीनें और जरूरी व्यवस्थाएं होने के बावजूद इसका ताला तक नहीं खुला। धीरे-धीरे ओटी कबाड़ में तब्दील हो गई। अब अस्पताल प्रशासन ने नई ओटी स्थापित करने के लिए शासन से करीब ढाई करोड़ रुपये मांग लिए। निरीक्षण करने पहुंचे अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. अभय सिंह ने इस पर ब्रेक लगा दिया है।
जिला अस्पताल में वर्ष 2019 में ट्रॉमा सेंटर बनकर तैयार हुआ था। दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों को तत्काल उपचार देने के उद्देश्य से यहां जरूरी व्यवस्थाएं की गई थीं। भूतल पर माइनर ओटी और प्रथम तल पर अत्याधुनिक मेजर ओटी बनाई गई थी। ऑपरेशन के लिए मशीनों समेत अन्य जरूरी इंतजाम भी किए गए थे। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन सात साल में ओटी का संचालन शुरू नहीं करा सका। नतीजा यह हुआ कि मरीजों के काम आने वाली व्यवस्था धीरे-धीरे कबाड़ में बदलती गई।
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वर्तमान में जिला अस्पताल की जनरल ओटी में ऑर्थो और जनरल सर्जरी दोनों के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इससे ऑपरेशन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसी आधार पर अस्पताल प्रशासन ने नई ओटी स्थापित करने के लिए करीब ढाई करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा। प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले अपर निदेशक के निरीक्षण और रिपोर्ट को जरूरी बताया गया। जांच में सामने आया कि अस्पताल में पहले से अत्याधुनिक ओटी मौजूद है, लेकिन उसका संचालन शुरू कराने के बजाय उसे अनुपयोगी होने दिया गया। इसके बाद अपर निदेशक ने नई ओटी के प्रस्ताव पर रोक लगाते हुए पुरानी ओटी की मरम्मत कराकर उसे चालू कराने के निर्देश दिए।
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टेक्नीशियन नहीं तो सात साल तक किसका इंतजार
ओटी शुरू नहीं होने पर अस्पताल प्रशासन ने टेक्नीशियन की कमी का हवाला दिया। सवाल है कि जब टेक्नीशियन के अभाव में सात साल से तैयार ओटी का संचालन नहीं हो सका तो नई ओटी बनाने के बाद उसका संचालन कैसे होगा। क्या नई ओटी के लिए ढाई करोड़ रुपये खर्च करने से पहले जरूरी मानव संसाधन की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जानी चाहिए थी। अपर निदेशक ने ओटी टेक्नीशियन की तैनाती के लिए लिखित पत्र देने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद सीएमओ के अधीन कार्यरत ओटी टेक्नीशियन को जिला अस्पताल में तैनात करने की बात कही गई है।
ट्रॉमा सेंटर का मकसद अधूरा, गंभीर मरीज मेडिकल कॉलेज रेफर
ट्रॉमा सेंटर का उद्देश्य दुर्घटनाओं में घायल गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन की सुविधा देना है। लेकिन जिला अस्पताल में इसकी व्यवस्था प्राथमिक उपचार तक सिमटी हुई है। बुखार, पेट दर्द और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल के वार्ड में भेजा जाता है, जबकि गंभीर मरीजों को तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में सात साल से बंद पड़ी ओटी सिर्फ संसाधनों की बर्बादी का उदाहरण नहीं, बल्कि ट्रॉमा सेंटर के मूल उद्देश्य पर भी सवाल है। अब देखना है कि पुरानी ओटी को दुरुस्त कर चालू कराने के निर्देश पर अमल होता है या मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
वर्जन
जिला अस्पताल की ओर से नई ओटी के लिए ढाई करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था। पुरानी ओटी आज तक शुरू न होने से खराब हो रही है। ऐसे में नए प्रस्ताव को रोक दिया गया है। टेक्नीशियन की मांग करने के लिए निर्देशित किया गया है। बंद पड़ी ओटी को ही संचालित कराया जाएगा। -डॉ. अभय सिंह, अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं

फोटो-14-ट्रॉमा सेंटर में प्रथम तल पर बनी ओटी के मुख्य गेट पर लगा ताला। अमर उजाला