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चंदे के अनाज से अन्ना मवेशियों से मुक्त हुआ गांव
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ड़ढवामानपुर ग्राम समाज की जमीन पर रखे गए अन्ना मवेशी।
- फोटो : BANDA
अतर्रा। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जो काम सरकारी मशीनरी नहीं कर पा रही है, उसे ग्राम पंचायत डढ़वामानपुर ने सिर्फ एक किलो अनाज के चंदे पर कर दिया। इस अनूठी पहल से ग्राम पंचायत के 13 मजरे अन्ना प्रथा से मुक्त हो गए। यह सब संभव हुआ डीएम हीरालाल के आह्वान और गांव की प्रधान सारिका गुप्ता की पहल से। अब यहां के किसानों को अपनी फसल की निगरानी नहीं करनी पड़ती है। गांव में बने अस्थायी आश्रय केंद्र में लगभग 300 अन्ना पशु बंद हैं। एसडीएम ने भी माना की गांव अन्ना प्रथा मुक्त तकरीबन मुक्त है।
मध्य प्रदेश की सरहद से सटी तकरीबन दस हजार आबादी और 13 मजरों वाली ग्राम पंचायत डढ़वामानपुर में अन्ना मवेशियों ने किसानों की हालत बिगाड़ दी थी। तमाम किसानों ने खेत परती छोड़ दिए। जहां फसल होती थी, अन्ना मवेशी उसे चट कर जाते थे। इस गांव की प्रधान सारिका गुप्ता स्नातक हैं और इनके पिता किसान और समाजसेवी हैं। किसानों और पिता का दर्द देख प्रधान ने करीब 15 दिन पहले बैठक बुलाई। इसमें किसानों को राजी किया कि हर परिवार महीने में एक किलो अनाज दे और अन्ना गायों के लिए ग्राम सभा की जमीन पर अस्थायी आश्रय केंद्र बनाया जाए।
गोवंश की देखरेख के लिए चरवाहों की व्यवस्था की जाए। ग्राम प्रधान ने गांव के नजदीक ग्राम समाज की भूमि में घेराबंदी कराकर पिछले माह अस्थायी गो आश्रय केंद्र बना दिया। अब इसमें लगभग तीन सैकड़ा अन्ना गाय हैं। प्रधान के पिता ओमप्रकाश भी गोशाला की देखरेख में हाथ बटा रहे हैं।
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गायों की देखरेख के लिए 10 चरवाहे रखे गए हैं। किसान अब खेतों में बुवाई कर रहे हैं। प्रधान सारिका गुप्ता का कहना है कि डीएम हीरालाल से उन्हें यह प्रेरणा मिली। इसी ग्राम पंचायत के किसान रमेश वर्मा, भोला यादव और पप्पू यादव ने बताया कि अस्थायी गो आश्रय केंद्र बनने के बाद यहां खेतीबाड़ी का रास्ता आसान हो गया है। लगभग सभी किसान खरीफ फसल के लिए खेत तैयार कर रहे हैं।
प्रधान के प्रयासों पर एसडीएम की मुहर
अतर्रा। डढ़वामानपुर ग्राम पंचायत को अन्ना गायों से मुक्ति मिल जाने का दावा एसडीएम जेपी यादव ने भी किया है। उन्होंने ग्राम प्रधान सारिका गुप्ता को इसका श्रेय देते हुए उनके प्रयासों को सराहा है। एसडीएम ने बताया कि उन्होंने खुद ग्राम पंचायत क्षेत्र में जाकर देखा है। लगभग 300 अन्ना पशु गोशाला में रखे हैं। एसडीएम ने कहा कि डढ़वामानपुर अन्ना पशुओं को लेकर मॉडल गांव है।
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मध्य प्रदेश की सरहद से सटी तकरीबन दस हजार आबादी और 13 मजरों वाली ग्राम पंचायत डढ़वामानपुर में अन्ना मवेशियों ने किसानों की हालत बिगाड़ दी थी। तमाम किसानों ने खेत परती छोड़ दिए। जहां फसल होती थी, अन्ना मवेशी उसे चट कर जाते थे। इस गांव की प्रधान सारिका गुप्ता स्नातक हैं और इनके पिता किसान और समाजसेवी हैं। किसानों और पिता का दर्द देख प्रधान ने करीब 15 दिन पहले बैठक बुलाई। इसमें किसानों को राजी किया कि हर परिवार महीने में एक किलो अनाज दे और अन्ना गायों के लिए ग्राम सभा की जमीन पर अस्थायी आश्रय केंद्र बनाया जाए।
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गोवंश की देखरेख के लिए चरवाहों की व्यवस्था की जाए। ग्राम प्रधान ने गांव के नजदीक ग्राम समाज की भूमि में घेराबंदी कराकर पिछले माह अस्थायी गो आश्रय केंद्र बना दिया। अब इसमें लगभग तीन सैकड़ा अन्ना गाय हैं। प्रधान के पिता ओमप्रकाश भी गोशाला की देखरेख में हाथ बटा रहे हैं।
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गायों की देखरेख के लिए 10 चरवाहे रखे गए हैं। किसान अब खेतों में बुवाई कर रहे हैं। प्रधान सारिका गुप्ता का कहना है कि डीएम हीरालाल से उन्हें यह प्रेरणा मिली। इसी ग्राम पंचायत के किसान रमेश वर्मा, भोला यादव और पप्पू यादव ने बताया कि अस्थायी गो आश्रय केंद्र बनने के बाद यहां खेतीबाड़ी का रास्ता आसान हो गया है। लगभग सभी किसान खरीफ फसल के लिए खेत तैयार कर रहे हैं।
प्रधान के प्रयासों पर एसडीएम की मुहर
अतर्रा। डढ़वामानपुर ग्राम पंचायत को अन्ना गायों से मुक्ति मिल जाने का दावा एसडीएम जेपी यादव ने भी किया है। उन्होंने ग्राम प्रधान सारिका गुप्ता को इसका श्रेय देते हुए उनके प्रयासों को सराहा है। एसडीएम ने बताया कि उन्होंने खुद ग्राम पंचायत क्षेत्र में जाकर देखा है। लगभग 300 अन्ना पशु गोशाला में रखे हैं। एसडीएम ने कहा कि डढ़वामानपुर अन्ना पशुओं को लेकर मॉडल गांव है।