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Banda News: लेखक हैं तो हर शब्द की अपनी जिम्मेदारी
Sat, 20 Sep 2025 12:09 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 20 Sep 2025 12:09 AM IST
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बांदा। हम लेखक हैं तो हर शब्द की अपनी एक जिम्मेदारी है। दुनिया भर के लेखकों ने इसे निभाया है। शब्दों की ताकत से सरकारें कांप जाती हैं। लेखक का समाज से शुरू से ही गहरा रिश्ता रहा है। यह बात यहां जनवादी लेखक संघ के तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए देश के मशहूर कवि, वैज्ञानिक और फिल्मकार गौहर रजा ने कही।
शुक्रवार को बड़ोखर खुर्द गांव में प्रेम सिंह की बगिया सभागार में सम्मेलन शुरू हुआ। देश के राज्यों से आए हिंदी व उर्दू लेखक इसमें भाग ले रहे हैं। गौहर रजा ने कहा कि साहित्य विचारों के टकराहट की यात्रा है। जिसमें समानता का द्वंद शामिल है। कहा कि उर्दू और हिंदी के भीतर तीन तरह के लेखक मौजूद हैं। एक वो जो भ्रमों के दायरे में हैं दूसरे वो जो प्रगतिशील ख्वाब देखने वाले हैं तीसरे वो जो संघर्षों में हैं। हमने शब्दों की जिम्मेदारी नहीं निभाई।
सामाजिक व राजनैतिक कार्यकर्ता और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने विशिष्ट वक्ता के रूप में सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बोलियों का महत्व भाषा की व्यापकता को बढ़ाता है। विचार व्यक्त करने की आजादी हमारे सरोकारों और संस्कारों की अभिव्यक्ति है। समानता हमारी सबसे कीमती धरोहर और जरूरत है।
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उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता चंचल चौहान, रेखा अवस्थी और इब्बार रब्बी के अध्यक्ष मंडल ने की। शुरुआत में स्वागत समिति अध्यक्ष प्रेम सिंह ने लेखकों का स्वागत किया। जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज सिंह और जनवादी लेखक संघ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य फखरुद्दीन ने सम्मेलन को सराहा और शुभकामनाएं दीं। संचालन जनवादी लेखक संघ महासचिव संजीव कुमार ने किया।
सम्मेलन के अगले सत्रों को कवि संपत सरल, भंवर मेघवंशी, नितिशा खलखो ने संबोधित किया। बजरंग बिहारी तिवारी ने विचार सत्र का संचालन किया। राष्ट्रीय महासचिव सुधीर सिंह ने बताया कि सम्मेलन का समापन 21 सितंबर को होगा।
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शुक्रवार को बड़ोखर खुर्द गांव में प्रेम सिंह की बगिया सभागार में सम्मेलन शुरू हुआ। देश के राज्यों से आए हिंदी व उर्दू लेखक इसमें भाग ले रहे हैं। गौहर रजा ने कहा कि साहित्य विचारों के टकराहट की यात्रा है। जिसमें समानता का द्वंद शामिल है। कहा कि उर्दू और हिंदी के भीतर तीन तरह के लेखक मौजूद हैं। एक वो जो भ्रमों के दायरे में हैं दूसरे वो जो प्रगतिशील ख्वाब देखने वाले हैं तीसरे वो जो संघर्षों में हैं। हमने शब्दों की जिम्मेदारी नहीं निभाई।
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सामाजिक व राजनैतिक कार्यकर्ता और पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने विशिष्ट वक्ता के रूप में सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि बोलियों का महत्व भाषा की व्यापकता को बढ़ाता है। विचार व्यक्त करने की आजादी हमारे सरोकारों और संस्कारों की अभिव्यक्ति है। समानता हमारी सबसे कीमती धरोहर और जरूरत है।
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उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता चंचल चौहान, रेखा अवस्थी और इब्बार रब्बी के अध्यक्ष मंडल ने की। शुरुआत में स्वागत समिति अध्यक्ष प्रेम सिंह ने लेखकों का स्वागत किया। जन संस्कृति मंच के महासचिव मनोज सिंह और जनवादी लेखक संघ राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य फखरुद्दीन ने सम्मेलन को सराहा और शुभकामनाएं दीं। संचालन जनवादी लेखक संघ महासचिव संजीव कुमार ने किया।
सम्मेलन के अगले सत्रों को कवि संपत सरल, भंवर मेघवंशी, नितिशा खलखो ने संबोधित किया। बजरंग बिहारी तिवारी ने विचार सत्र का संचालन किया। राष्ट्रीय महासचिव सुधीर सिंह ने बताया कि सम्मेलन का समापन 21 सितंबर को होगा।