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Banda News: किसान बोले... आंधी और बारिश से फसलें बर्बाद, प्रशासन को दिखा मामूली नुकसान
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फसल समेटते किसान।
- फोटो : संवाद
बांदा। जिले में रविवार सुबह करीब चार बजे आई आंधी और बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। गेहूं की ज्यादातर फसल खेत में कटी पड़ी थी और किसान मड़ाई की तैयारी कर रहे थे। बारिश से फसलें पूरी तरह भीग गईं। खासा नुकसान हुआ है।
उधर, प्रशासन ने जिले की पांचों तहसीलों में राजस्व कर्मचारियों के माध्यम से फसलों का सर्वे कराया है। इसमें बताया बारिश से फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ। कुछ इलाकों में फसलें भीग गई हैं, जाे सूखने पर सही हो जाएंगी।
रविवार को सुबह आंधी चली और करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई। किसान फसलों की मड़ाई कर खेतों में अनाज की रखवाली कर रहे थे। बारिश और आंधी में अनाज खेतों छोड़कर घर भाग गए। आंधी और बारिश थमने के बाद जब किसान खेत गए तो फसल बर्बादी की कगार पर थी। कमासिन क्षेत्र में ज्यादा बारिश होने से कटीं फसलें पानी में डूब गईं। पैलानी तहसील क्षेत्र में भी फसलें भींग गईं। खप्टिहाकला के रामबाबू, राजू सिंह व सुनील सिंह लाला ने बताया कि गेहूं की फसल में नमी के चलते दीमक लग गए हैं। किसानों को उम्मीद थी कि फसलों को नुकसान हुआ है तो प्रशासन नरमी दिखाएगा। सर्वे कराकर उन्हें मुआवजा दिलाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रशासन ने लेखपालों से सर्वे तो कराया तो उनकी रिपोर्ट में कहीं फसलों का नुकसान नहीं दिखा।
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किसानों का कहना है कि खेतों में जाने के बजाए लेखपालों ने कुछ लोगों से फोन में पूछकर रिपोर्ट भेज दी। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
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उधर, प्रशासन ने जिले की पांचों तहसीलों में राजस्व कर्मचारियों के माध्यम से फसलों का सर्वे कराया है। इसमें बताया बारिश से फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ। कुछ इलाकों में फसलें भीग गई हैं, जाे सूखने पर सही हो जाएंगी।
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रविवार को सुबह आंधी चली और करीब एक घंटे तक तेज बारिश हुई। किसान फसलों की मड़ाई कर खेतों में अनाज की रखवाली कर रहे थे। बारिश और आंधी में अनाज खेतों छोड़कर घर भाग गए। आंधी और बारिश थमने के बाद जब किसान खेत गए तो फसल बर्बादी की कगार पर थी। कमासिन क्षेत्र में ज्यादा बारिश होने से कटीं फसलें पानी में डूब गईं। पैलानी तहसील क्षेत्र में भी फसलें भींग गईं। खप्टिहाकला के रामबाबू, राजू सिंह व सुनील सिंह लाला ने बताया कि गेहूं की फसल में नमी के चलते दीमक लग गए हैं। किसानों को उम्मीद थी कि फसलों को नुकसान हुआ है तो प्रशासन नरमी दिखाएगा। सर्वे कराकर उन्हें मुआवजा दिलाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रशासन ने लेखपालों से सर्वे तो कराया तो उनकी रिपोर्ट में कहीं फसलों का नुकसान नहीं दिखा।
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किसानों का कहना है कि खेतों में जाने के बजाए लेखपालों ने कुछ लोगों से फोन में पूछकर रिपोर्ट भेज दी। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।