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Banda News: बारिश में फसल बर्बाद, पांच हजार से अधिक को मुआवजे का इंतजार
Fri, 09 Oct 2026 11:07 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Fri, 09 Oct 2026 11:07 PM IST
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फोटो-21-खेत में बर्बाद हुई तिल की फसल को देखता किसान। आर्काइव
बांदा। बीते माह हुई जोरदार बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया।
खेतों में तिल, उड़द और ज्वार की फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों को मुआवजे से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में देरी के चलते पांच हजार से अधिक किसान इंतजार कर रहे हैं।
बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों ने मुआवजे की मांग उठाई तो जिलाधिकारी अमित आसेरी ने सर्वे कराने के निर्देश दिए। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम को नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट देनी है। हालांकि, रिपोर्ट का इंतजार लंबा होने से किसानों की परेशानी बढ़ रही है।
कृषि विभाग के टोलफ्री नंबर पर अब तक 5211 किसान फसल बर्बाद होने की शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इन किसानों को मुआवजा तभी मिल सकेगा, जब सर्वे रिपोर्ट में फसल को हुए नुकसान की पुष्टि होगी। रिपोर्ट के आधार पर ही मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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शिकायत दर्ज कराने वाले किसानों में 80 प्रतिशत से अधिक तिल की फसल वाले हैं। बाकी करीब 20 प्रतिशत किसानों ने उड़द और ज्वार की फसल को नुकसान होने की शिकायत की है। जिले में तिल की खेती 24 हजार हेक्टेयर, ज्वार 12,400 हेक्टेयर और उड़द करीब नौ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है। इन फसलों को नुकसान होने से बड़ी संख्या में किसानों की आमदनी प्रभावित होने की आशंका है।
फिलहाल किसानों की निगाहें राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने किसानों की फसल को कितना नुकसान हुआ है और उन्हें किस आधार पर मुआवजा मिल सकेगा। किसानों को उम्मीद है कि सर्वे जल्द पूरा होगा, ताकि फसल बर्बाद होने से पैदा हुए आर्थिक संकट में उन्हें राहत मिल सके।
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लागत निकालना भी मुश्किल, अगली फसल की चिंता
फसल खराब होने का असर केवल इस सीजन की कमाई तक सीमित नहीं है। किसानों ने बोआई के समय बीज, खाद और खेत की तैयारी पर जो रकम लगाई थी, उसकी भरपाई भी मुश्किल हो रही है। खेती के लिए जमा पूंजी खर्च कर चुके किसानों के सामने अब घरेलू जरूरतों, खेती से जुड़े खर्च और अगली फसल की तैयारी का संकट खड़ा हो सकता है। जिन किसानों ने उधार लेकर खेती की थी, उनकी चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में नुकसान का सही आकलन और समय पर मुआवजा मिलना उनके लिए अहम है।
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बीमित किसानों को भी राहत की आस
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में खरीफ की फसलों का बीमा यूनिवर्सल सॉम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने किया है। फसल बीमा कार्यालय और कंपनी के प्रतिनिधियों के पास भी किसान नुकसान के मुआवजे के लिए शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
कंपनी की ओर से अलग से सर्वे कराया जा रहा है। जिले में खरीफ की फसलों का 40 हजार से अधिक किसानों ने बीमा कराया है। बीमा कंपनी के अनुसार, तिल की फसल के लिए किसानों ने 578 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से प्रीमियम जमा किया है। तिल की फसल में 100 प्रतिशत नुकसान होने पर 28,900 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा निर्धारित है।
नुकसान का प्रतिशत कम होने पर मुआवजे की राशि भी उसी अनुपात में घट जाएगी। ऐसे में बीमा कराने वाले किसानों को भी सर्वे और नुकसान के आकलन के आधार पर राहत मिलने की उम्मीद है।
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वर्जन
सर्वे रिपोर्ट के लिए सभी तहसीलों में कर्मचारी काम कर रहे हैं। अधिकांश काम पूरा हो चुका है। जल्द ही रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर मुआवजे के कार्रवाई की जाएगी।
-एके यादव, उप निदेशक कृषि बांदा
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खेतों में तिल, उड़द और ज्वार की फसल को नुकसान पहुंचने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। किसानों को मुआवजे से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन सर्वे रिपोर्ट में देरी के चलते पांच हजार से अधिक किसान इंतजार कर रहे हैं।
बारिश से फसलों को हुए नुकसान के बाद किसानों ने मुआवजे की मांग उठाई तो जिलाधिकारी अमित आसेरी ने सर्वे कराने के निर्देश दिए। राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम को नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट देनी है। हालांकि, रिपोर्ट का इंतजार लंबा होने से किसानों की परेशानी बढ़ रही है।
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कृषि विभाग के टोलफ्री नंबर पर अब तक 5211 किसान फसल बर्बाद होने की शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इन किसानों को मुआवजा तभी मिल सकेगा, जब सर्वे रिपोर्ट में फसल को हुए नुकसान की पुष्टि होगी। रिपोर्ट के आधार पर ही मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
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शिकायत दर्ज कराने वाले किसानों में 80 प्रतिशत से अधिक तिल की फसल वाले हैं। बाकी करीब 20 प्रतिशत किसानों ने उड़द और ज्वार की फसल को नुकसान होने की शिकायत की है। जिले में तिल की खेती 24 हजार हेक्टेयर, ज्वार 12,400 हेक्टेयर और उड़द करीब नौ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है। इन फसलों को नुकसान होने से बड़ी संख्या में किसानों की आमदनी प्रभावित होने की आशंका है।
फिलहाल किसानों की निगाहें राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त सर्वे रिपोर्ट पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने किसानों की फसल को कितना नुकसान हुआ है और उन्हें किस आधार पर मुआवजा मिल सकेगा। किसानों को उम्मीद है कि सर्वे जल्द पूरा होगा, ताकि फसल बर्बाद होने से पैदा हुए आर्थिक संकट में उन्हें राहत मिल सके।
लागत निकालना भी मुश्किल, अगली फसल की चिंता
फसल खराब होने का असर केवल इस सीजन की कमाई तक सीमित नहीं है। किसानों ने बोआई के समय बीज, खाद और खेत की तैयारी पर जो रकम लगाई थी, उसकी भरपाई भी मुश्किल हो रही है। खेती के लिए जमा पूंजी खर्च कर चुके किसानों के सामने अब घरेलू जरूरतों, खेती से जुड़े खर्च और अगली फसल की तैयारी का संकट खड़ा हो सकता है। जिन किसानों ने उधार लेकर खेती की थी, उनकी चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में नुकसान का सही आकलन और समय पर मुआवजा मिलना उनके लिए अहम है।
बीमित किसानों को भी राहत की आस
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिले में खरीफ की फसलों का बीमा यूनिवर्सल सॉम्पो जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने किया है। फसल बीमा कार्यालय और कंपनी के प्रतिनिधियों के पास भी किसान नुकसान के मुआवजे के लिए शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।
कंपनी की ओर से अलग से सर्वे कराया जा रहा है। जिले में खरीफ की फसलों का 40 हजार से अधिक किसानों ने बीमा कराया है। बीमा कंपनी के अनुसार, तिल की फसल के लिए किसानों ने 578 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से प्रीमियम जमा किया है। तिल की फसल में 100 प्रतिशत नुकसान होने पर 28,900 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा निर्धारित है।
नुकसान का प्रतिशत कम होने पर मुआवजे की राशि भी उसी अनुपात में घट जाएगी। ऐसे में बीमा कराने वाले किसानों को भी सर्वे और नुकसान के आकलन के आधार पर राहत मिलने की उम्मीद है।
वर्जन
सर्वे रिपोर्ट के लिए सभी तहसीलों में कर्मचारी काम कर रहे हैं। अधिकांश काम पूरा हो चुका है। जल्द ही रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर मुआवजे के कार्रवाई की जाएगी।
-एके यादव, उप निदेशक कृषि बांदा