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हाथ तोड़ा, नसें काटीं फिर गला घोंटकर बच्चे को मार दिया

Tue, 10 Feb 2015 11:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Tue, 10 Feb 2015 11:40 PM IST
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Throttled children killed

पड़ोस में आई बारात देखने गए बालक की बहशियाना तरीके से हत्या कर दी गई। उसका शव घर के पास एक निर्माणाधीन मकान में बालू में दबा मिला। जिसने भी शव देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए। बालक का एक हाथ टूटा था। कलाई की नसें कटी थीं। गले पर रस्सी से कसने के निशान थे। पेट पर घाव था। जबड़ा समेत दो दांत टूटे थे।

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हत्या की सूचना मिलते ही लोगों का भारी हुजूम लग गया। एसपी राकेश शंकर ने मौके पर पहुंचकर घटना स्थल का जायजा लिया। पिता ने पड़ोस के एक युवक पर हत्या का आरोप लगाया गया है।
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शहर के मर्दननाका पुलिस चौकी क्षेत्र के निम्नीपार मोहल्ला निवासी बाबू राजपूत एक बाग में बागवानी का काम करते हैं। सोमवार की रात करीब 10 बजे उसका पुत्र बागवान (10) पड़ोस में आई बारात देखने गया था। उसके बाद से लातपा था। परिजन रात भर उसकी तलाश करते रहे।
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मंगलवार को सुबह घर से कुछ दूर दउवा महल खंडहर के पास एक निर्माणाधीन मकान में मजदूरों ने बालू हटाई तो बालक का शव दबा मिला। चूंकि आसपास लोगों में बालक के लापता होने की चर्चा थी इसलिए तुरंत ही घरवालों को सूचना दी गई। पिता बाबू राजपूत ने शव देखकर बेटे की शिनाख्त की। शव देखकर सभी के रोंगटे खड़े हो गए।

बालक की हत्या निर्मम तरीके से की गई थी। उसका गला घोटा गया था। बाएं हाथ की हड्डी टूटी थी। कलाई की नसें कटी थीं। बाईं ओर पेट पर घाव था। आगे के दो दांत भी टूटे मिले। माना जा रहा है कि हत्या से पहले उसे बुरी तरह पीटा गया होगा। अथवा बुरी नीयत से उसे दबोचा गया था। पिता ने घटना की सूचना पुलिस को दी।

घटना स्थल पर पहुंचे एसपी राकेश शंकर को पिता ने कुछ सुराग दिए हैं। पिता का आरोप है कि पड़ोसी युवक का बेटा उसके बाग से अमरूद तोड़ रहा था। बागवान ने उसे देख लिया था। अमरूद चोरी की घटना छिपाने के लिए ही उसकी हत्या की गई है।

उधर, कोतवाली एसएसआई केवी सिंह, मर्दननाका चौकी प्र्रभारी अमान सिंह, अलीगंज चौकी प्रभारी महेंद्र सिंह ने आरोपी के घर पर दबिश दी तो उसका फोन घर पर मिला किंतु वह सुबह से ही फरार था। एसपी ने बताया कि आरोपियों की तलाश में टीमें लगाई गई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस का मानना है कि हत्या पेशेवर अपराधी की तर्ज पर की गई है। 

बाग में जन्मा तो नाम पड़ा बागवान
बांदा। मृतक बालक भाइयों में तीसरे नंबर का था। उसका जन्म अमरूद के बाग में 8 नवंबर 2005 को हुआ था। इस पर घर वालों ने उसका नाम ‘बागवान’ रख दिया।

मां थुर्रा ने बताया कि बागवान पड़ोस में स्थित प्राइमरी स्कूल में कक्षा 4 का छात्र था। उधर, पड़ोसियों को भी उसकी मौत का दुख था। रज्जब, निसार, शरीफ, फरहद, रघुवेंद्र आदि ने बताया कि वह बहुत सीधा था।


कुत्ते ने निभाई वफादारी
बांदा। बालू में दफन बागवान राजपूत के शव को सबसे पहले उसके पालतू कुत्ते टॉमी ने तलाशा। कुत्ता सुबह से ही घटनास्थल पर ही मंडराता और भौंकता रहा।

कई बार उसने बालू को पैरों से खोदा भी, लेकिन लोग इस बेजुबान और वफादार कहे जाने वाले जानवर का इशारा समझ नहीं सके। कुछ देर बात जब मजदूरों ने काम शुरू किया और बालू हटाई तो शव बरामद हुआ।

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