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दावा: 86 यूरिया और 93 फीसदी डीएपी वितरित
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बांदा। खाद के लिए भले ही क्रय केंद्रों में किसानों की लंबी कतारें लग रही हों, लेकिन कृषि विभाग का दावा है कि जनपद में खाद की कोई कमी नहीं है। रबी सीजन में किसानों को लक्ष्य के सापेक्ष यूरिया 86 व डीएपी 93 फीसदी वितरण किया गया है। इसके अलावा डीएपी और यूरिया की एक-एक रैक और मंगवाई गई है।
जनपद में खाद के लिए मारामारी है। क्रय केंद्रों में एक-एक बोरी खाद के लिए किसान कड़ाके की ठंड व घने कोहरे के बीच लाइन लगाकर खड़े हो रहे हैं। आलम यह है तमाम किसान देर रात से ही क्रय केंद्रों में डेरा डाल लेते हैं। अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए क्रय केंद्र के बाहर ईंटा तो कोई अंगौछा बिछा देता है। क्रय केंद्र खुलते ही किसान जिस हाल में होता उसी हाल में लाइन में खड़ा हो जाता है।
अब की जनवरी माह में भी किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। इस मौसम में किसान बुआई व प्रथम डेसिंग से फुरसत हो जाता था। किसानों का कहना है कि क्रय केंद्रों में पर्याप्त खाद न होने से मारामारी है। जरूरत दस बोरी की है मिल दो रही है। ऐसे में बार-बार लाइन में लगना पड़ रहा है। उधर, कृषि विभाग दावा कर रहा है कि जनपद में खाद की कोई कमी नहीं है। रबी सीजन में जनपद में डीएपी का लक्ष्य 16,400 मीट्रिक टन था। जिसके सापेक्ष 13,201 मीट्रिक टन (86) फीसदी डीएपी वितरित की जा चुकी है।
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इसी प्रकार जनपद में यूरिया का लक्ष्य 21,800 मीट्रिक टन था। जिसके सापेक्ष 20, 844 मीट्रिक टन (93) फीसदी वितरित की जा चुकी है। इसके अलावा एनपीके का लक्ष्य 400 मीट्रिक टन के सापेक्ष 2,339, एमओपी का लक्ष्य 200 मीट्रिक टन के सापेक्ष 45, एसएसपी का लक्ष्य 250 मीट्रिक टन के सापेक्ष 401 मीट्रिक टन वितरित की गई है।
उन्होंने बताया कि बफर गोदाम में अभी भी यूरिया 3,287, डीएपी 931 मीट्रिक टन उपलब्ध है। खाद की मांग को देखते हुए एक-एक रैक यूरिया व डीएपी की मंगाई जा रही है।
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जनपद में खाद के लिए मारामारी है। क्रय केंद्रों में एक-एक बोरी खाद के लिए किसान कड़ाके की ठंड व घने कोहरे के बीच लाइन लगाकर खड़े हो रहे हैं। आलम यह है तमाम किसान देर रात से ही क्रय केंद्रों में डेरा डाल लेते हैं। अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए क्रय केंद्र के बाहर ईंटा तो कोई अंगौछा बिछा देता है। क्रय केंद्र खुलते ही किसान जिस हाल में होता उसी हाल में लाइन में खड़ा हो जाता है।
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अब की जनवरी माह में भी किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। इस मौसम में किसान बुआई व प्रथम डेसिंग से फुरसत हो जाता था। किसानों का कहना है कि क्रय केंद्रों में पर्याप्त खाद न होने से मारामारी है। जरूरत दस बोरी की है मिल दो रही है। ऐसे में बार-बार लाइन में लगना पड़ रहा है। उधर, कृषि विभाग दावा कर रहा है कि जनपद में खाद की कोई कमी नहीं है। रबी सीजन में जनपद में डीएपी का लक्ष्य 16,400 मीट्रिक टन था। जिसके सापेक्ष 13,201 मीट्रिक टन (86) फीसदी डीएपी वितरित की जा चुकी है।
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इसी प्रकार जनपद में यूरिया का लक्ष्य 21,800 मीट्रिक टन था। जिसके सापेक्ष 20, 844 मीट्रिक टन (93) फीसदी वितरित की जा चुकी है। इसके अलावा एनपीके का लक्ष्य 400 मीट्रिक टन के सापेक्ष 2,339, एमओपी का लक्ष्य 200 मीट्रिक टन के सापेक्ष 45, एसएसपी का लक्ष्य 250 मीट्रिक टन के सापेक्ष 401 मीट्रिक टन वितरित की गई है।
उन्होंने बताया कि बफर गोदाम में अभी भी यूरिया 3,287, डीएपी 931 मीट्रिक टन उपलब्ध है। खाद की मांग को देखते हुए एक-एक रैक यूरिया व डीएपी की मंगाई जा रही है।