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Banda News: मनमर्जी से चलते हैं खदानों के कैमरे, शाम ढलते ही शुरू होता है खनन

Sat, 10 Oct 2026 11:55 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 11:55 PM IST
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Cameras at the mines operate at will; mining begins as soon as dusk falls
फोटो-20-केन नदी में खनन करती मशीन। आर्काइव
= केन नदी में खनन में नियमों की खुलेआम अनदेखी, एनजीटी के आदेश ने खोली निगरानी व्यवस्था की पोल
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= जिस खदान से जुड़ा एनजीटी का आदेश, वहां भी बीच-बीच में कैमरे किए गए थे बंद

अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। केन नदी की कोख छलनी हो रही है और खदानों की निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे खदान संचालकों की मर्जी से चलते हैं। शाम छह बजे के बाद खनन पर प्रतिबंध है, लेकिन आरोप है कि असली खेल रात के अंधेरे में ही शुरू होता है। पट्टा क्षेत्र से बाहर और नदी की जलधारा में खनन से लेकर प्रतिबंधित मशीनों का प्रयोग भी होता है। नरैनी तहसील के बहादुरपुर स्योढ़ा में खनन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के बाद एक बार फिर निगरानी व्यवस्था और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिले में केन नदी क्षेत्र में 20 से अधिक खदानें खनन के लिए आवंटित हैं। नियमानुसार खनन पट्टे के निर्धारित क्षेत्र में ही किया जा सकता है। नदी की धारा में खनन और सक्शन व लिफ्टर मशीनों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। निगरानी के लिए खदानों में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं, लेकिन कैमरे बंद होने पर निगरानी व्यवस्था ही बेअसर हो जाती है। बहादुरपुर स्योढ़ा में भी खदान के कैमरे कई बार बंद किए जाने की जांच में पुष्टि हुई थी।
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नरैनी तहसील के ग्राम बहादुरपुर स्योढ़ा में केन नदी क्षेत्र के गाटा संख्या 300एम और 316एम के बाहर खनन का मामला सामने आया था। यह क्षेत्र मौरंग खनन के लिए मैसर्स लक्ष्मी प्रसाद गुप्ता, प्रोपराइटर उमेश गुप्ता को आवंटित था। मामले में एनजीटी के आदेश के बाद खनन गतिविधियों की निगरानी और नियमों के अनुपालन को लेकर सवाल उठे हैं। जांच के दौरान खदान में लगे सीसीटीवी कैमरे कई बार बंद पाए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद खनन विभाग ने जुर्माना लगाने और अवैध खनन की प्रतिपूर्ति के आदेश दिए थे।
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नियमों के अनुसार शाम छह बजे के बाद खनन नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद रात में खनन होने की शिकायतें सामने आती हैं। नदी में मानक से अधिक गहराई तक खुदाई और जलधारा में खनन के आरोप भी लगते रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि कैमरों की निगरानी, खनन क्षेत्र की जांच और रात में होने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग आखिर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे हैं।
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हर माह बैठक, फिर भी नहीं थम रहा नियम विरुद्ध खनन
खनन गतिविधियों पर नियंत्रण और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए जिला स्तर पर टास्क फोर्स गठित है। खनन अधिकारी राज रंजन के अनुसार, इसमें जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, खनन अधिकारी, एडीएम (वित्त एवं राजस्व), एआरटीओ और जीएसटी विभाग के अधिकारी शामिल हैं। टास्क फोर्स की हर माह बैठक होती है। इसमें खनन के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की रणनीति बनाई जाती है। इसके बावजूद नियमों के विपरीत खनन की शिकायतें और जांच में सामने आई अनियमितताएं निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती हैं। एनजीटी ने भी टास्क फोर्स को सक्रियता बढ़ाने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। अब चुनौती केवल बैठक करने की नहीं, बल्कि खदानों में कैमरों को लगातार क्रियाशील रखने, निर्धारित क्षेत्र से बाहर खनन रोकने और प्रतिबंधित मशीनों के इस्तेमाल पर प्रभावी कार्रवाई करने की है।
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नदी की जलधारा से बालू खींचती हैं प्रतिबंधित मशीनें

मौरंग खदानों में लिफ्टर और सक्शन मशीनों का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। इन मशीनों के जरिये नदी की जलधारा और तल से बालू खींची जा सकती है। इससे नदी के प्राकृतिक तल और जलप्रवाह पर असर पड़ने का खतरा रहता है। यही वजह है कि खनन में इनका इस्तेमाल प्रतिबंधित है। सक्शन मशीन पंप और पाइप की मदद से पानी के साथ बालू खींचती है। इसका इस्तेमाल नदी की जलधारा या तल से सीधे मौरंग निकालने में किया जा सकता है। वहीं लिफ्टर मशीन का प्रयोग नदी के भीतर से बालू उठाने के लिए किया जाता है। जलधारा में इसका प्रयोग निर्धारित खनन व्यवस्था के विपरीत है। इन मशीनों के अलावा पट्टा क्षेत्र से बाहर खनन, नदी की जलधारा में खुदाई और स्वीकृत सीमा से अधिक गहराई तक खनन भी नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आते हैं। प्रतिबंधित मशीनों के इस्तेमाल पर रोक तभी प्रभावी होगी, जब खदानों की नियमित निगरानी हो और उल्लंघन मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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वर्जन
-खदानों में कैमरे लगाने और उन्हें निरंतर क्रियाशील रखने के आदेश हैं। बहादुरपुर स्योढ़ा की खदान में भी कैमरे कई बार बंद किए गए थे। नियम तोड़ने वालों पर लगातार कार्रवाई भी हो रही है। -राज रंजन, खनन अधिकारी बांदा
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