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ठंड से बचना है तो घर से लाओ रजाई
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घर की रजाई ओढ़े जिला अस्पताल में भर्ती मरीज।
- फोटो : BANDA
बांदा। ‘ठंड से बचना है तो घर से खुद रजाई लेकर आओ’। जिला अस्पताल की फिजाओं में इस तरह के अल्फाज अक्सर गूंजते हैं। हाड़ कंपाने वाली ठंड के बावजूद यहां के वार्डों में भर्ती मरीजों को मात्र एक कंबल दिया जाता है। जाड़ा दूर करने के लिए मरीजों को अपने घर से रजाई अथवा कंबल आदि लाना पड़ रहा है।
नए साल में भी बदहाली ने जिला अस्पताल का पीछा नहीं छोड़ा। करीब सवा सौ बेड के जिला अस्पताल के सभी वार्डों में 3 से 4 ब्लोअर लगे हैं, लेकिन मरीजों को ठंड से छुटकारा दिला पाने में नाकाम हैं। खुली खिड़कियों और कुछेक के टूटे शीशों से बर्फीली हवाएं मरीजों को परेशान करती हैं। जिला अस्पताल से प्रत्येक मरीज को मात्र एक कंबल दिया जाता है। कड़ाके की ठंड में यह नाकाफी है। अलबत्ता मरीजों को ठंड से बचाने
के लिए तीमारदारों को खुद रजाई-कंबल और गैस हीटर आदि की व्यवस्था करना पड़ रही है। इमर्जेंसी वार्ड में भर्ती मरीज के तीमारदार सुनील सिंह (लामा), महिला वार्ड की मरीज के तीमारदार अभिषेक पांडेय (गिरवां) ने बताया कि अतिरिक्त कंबल मांगने पर नहीं दिया गया।
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मजबूरन उन्हें बाजार से कंबल खरीदकर लाना पड़ा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संपूर्णानंद मिश्रा का कहना है कि मरीज को एक कंबल ही दिया जाता है। मांगने पर दूसरा कंबल भी उपलब्ध करा देते हैं। फिलहाल मरीजों को ठंड से बचाने के लिए अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था है।
चोरी हो रहे कंबल, मरीजों पर फोड़ रहे ठीकरा
बांदा। जिला अस्पताल में कंबल चोरी के नाम पर भी खेल हो रहा है। कंबल खो जाने पर ट्रामा सेंटर और अस्पताल प्रशासन मरीजों पर ठीकरा फोड़ते हैं, जबकि असलियत कुछ और है। अब तक लगभग 20 कंबल गायब हो चुके हैं। सीएमएस डॉ. संपूर्णानंद मिश्र ने बताया कि अधिकांश कंबल ट्रामा सेंटर से खोए हैं। मरीजों को रेफर किए जाने पर उनके तीमारदार अस्पताल के कंबल भी साथ ले जाते हैं।
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नए साल में भी बदहाली ने जिला अस्पताल का पीछा नहीं छोड़ा। करीब सवा सौ बेड के जिला अस्पताल के सभी वार्डों में 3 से 4 ब्लोअर लगे हैं, लेकिन मरीजों को ठंड से छुटकारा दिला पाने में नाकाम हैं। खुली खिड़कियों और कुछेक के टूटे शीशों से बर्फीली हवाएं मरीजों को परेशान करती हैं। जिला अस्पताल से प्रत्येक मरीज को मात्र एक कंबल दिया जाता है। कड़ाके की ठंड में यह नाकाफी है। अलबत्ता मरीजों को ठंड से बचाने
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के लिए तीमारदारों को खुद रजाई-कंबल और गैस हीटर आदि की व्यवस्था करना पड़ रही है। इमर्जेंसी वार्ड में भर्ती मरीज के तीमारदार सुनील सिंह (लामा), महिला वार्ड की मरीज के तीमारदार अभिषेक पांडेय (गिरवां) ने बताया कि अतिरिक्त कंबल मांगने पर नहीं दिया गया।
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मजबूरन उन्हें बाजार से कंबल खरीदकर लाना पड़ा। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संपूर्णानंद मिश्रा का कहना है कि मरीज को एक कंबल ही दिया जाता है। मांगने पर दूसरा कंबल भी उपलब्ध करा देते हैं। फिलहाल मरीजों को ठंड से बचाने के लिए अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था है।
चोरी हो रहे कंबल, मरीजों पर फोड़ रहे ठीकरा
बांदा। जिला अस्पताल में कंबल चोरी के नाम पर भी खेल हो रहा है। कंबल खो जाने पर ट्रामा सेंटर और अस्पताल प्रशासन मरीजों पर ठीकरा फोड़ते हैं, जबकि असलियत कुछ और है। अब तक लगभग 20 कंबल गायब हो चुके हैं। सीएमएस डॉ. संपूर्णानंद मिश्र ने बताया कि अधिकांश कंबल ट्रामा सेंटर से खोए हैं। मरीजों को रेफर किए जाने पर उनके तीमारदार अस्पताल के कंबल भी साथ ले जाते हैं।