{"_id":"75989","slug":"Banda-75989-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"नरैनी में सिर्फ 26 तालाब भरे, 203 में उड़ रही धूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नरैनी में सिर्फ 26 तालाब भरे, 203 में उड़ रही धूल
Banda
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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नरैनी। केन नहर बंद होने को सिर्फ दो दिन बचे हैं। अब तक नहर और नलकूपों से ब्लाक क्षेत्र के 26 तालाब ही भरे गए हैं। 203 तालाब सूखे पड़े हैं। उनमें धूल उड़ रही है। सूखे तालाब लबालब नहीं किए गए तो भीषण गर्मी में मवेशियों की प्यास से मौत तय है।
ब्लाक क्षेत्र में 293 तालाब हैं। नहर शुरू होने से पहले 64 तालाबों में ही पानी बचा था। शेष 229 तालाब सूखे पड़े थे। पहली मई से केन नहर शुरू होने के बाद दिखितवारा, नगवारा, तेरा-ब, पल्हरी, थनैल, ओरहा, सेमरिया कुशल, अतर्रा ग्रामीण, मुकेरा, नसेनी, पड़मई आदि गांवों के तालाब लबालब हो गए। तरहटी कालिंजर, कटरा कालिंजर, बहादुर कालिंजर, चंद्रपुरा, तुर्रा आदि गांव के तालाब निजी नलकूपों से भरे गए। ब्लाक से मिली सूचना के मुताबिक नहर से 93 तालाबों को भरा जा सकता था लेकिन प्रधानों की उदासीनता से सिर्फ 26 तालाब ही भर सके।
प्रधानों की इस लापरवाही का खामियाजा बेजुबान जानवरों को भुगतना पड़ सकता है। भीषण गर्मी में प्यास से उनकी मौतें हो सकती हैं। खंड विकास अधिकारी ने ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों को नहरों से तालाबों को लबालब करने को कहा था। नहरों में कम पंसाल के चलते नहर की नालियों में पानी नहीं चढ़ सका। इसकी वजह से भी कई तालाब नहीं भर सके।
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ब्लाक क्षेत्र में 293 तालाब हैं। नहर शुरू होने से पहले 64 तालाबों में ही पानी बचा था। शेष 229 तालाब सूखे पड़े थे। पहली मई से केन नहर शुरू होने के बाद दिखितवारा, नगवारा, तेरा-ब, पल्हरी, थनैल, ओरहा, सेमरिया कुशल, अतर्रा ग्रामीण, मुकेरा, नसेनी, पड़मई आदि गांवों के तालाब लबालब हो गए। तरहटी कालिंजर, कटरा कालिंजर, बहादुर कालिंजर, चंद्रपुरा, तुर्रा आदि गांव के तालाब निजी नलकूपों से भरे गए। ब्लाक से मिली सूचना के मुताबिक नहर से 93 तालाबों को भरा जा सकता था लेकिन प्रधानों की उदासीनता से सिर्फ 26 तालाब ही भर सके।
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प्रधानों की इस लापरवाही का खामियाजा बेजुबान जानवरों को भुगतना पड़ सकता है। भीषण गर्मी में प्यास से उनकी मौतें हो सकती हैं। खंड विकास अधिकारी ने ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों को नहरों से तालाबों को लबालब करने को कहा था। नहरों में कम पंसाल के चलते नहर की नालियों में पानी नहीं चढ़ सका। इसकी वजह से भी कई तालाब नहीं भर सके।
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