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Balrampur News: बौड़िहार गांव की सरहद पर पहुंची राप्ती नदी
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बलरामपुर के बौड़िहार गांव के पास की वर्तमान स्थिति।-संवाद
बलरामपुर/गैड़ास बुजुर्ग। राप्ती नदी गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के बौड़िहार गांव की सरहद तक पहुंच चुकी है। नदी व गांव के बीच में अब कोई फासला नहीं रह गया है। इसे लेकर ग्रामीणों में दहशत है। बौड़िहार गांव के 25 किसानों की 95 बीघे जमीन राप्ती नदी में समाहित हो चुकी है। राप्ती नदी की कटान से ग्रामीणों को बेघर होने का डर सता रहा है। यदि बरसात से पहले गांव के पास कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो गावं के 150 परिवार बेघर हो जाएंगे।
राप्ती नदी के बाढ़ का कहर जिले के तीनों तहसीलों में 75 से अधिक गांवों पर हर वर्ष टूटता है। राप्ती नदी की बाढ़ से जिले की तीनों तहसीलों में 350 से अधिक गांव हर वर्ष प्रभावित होते हैं। नदी की बाढ़ व कटान का कहर सबसे अधिक उतरौला तहसील के गांवों पर टूटता है। गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक का बौड़िहार गांव राप्ती नदी के मुहाने पर बसा है। यह गांव बाढ़ में हर वर्ष घिर जाता है। गांव के लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता है।
ग्रामीण दिलीप कुमार बताते हैं कि पहले तो बौड़िहार गांव पर बाढ़ का कहर टूटता था, लेकिन पिछले तीन वर्ष से राप्ती नदी की कटान का कहर भी ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। राप्ती नदी ने वहीदशाह का 10 बीघे, नासिर का 15 बीघे, दिलीप कुमार का पांच बीघे, चिनके की 20 बीघे, साधू का पांच बीघे, सुरेश का पांच बीघे, विजय गुप्ता का 10 बीघे, जफर खान का पांच बीघे, जुहेर का 10 बीघे व एजाज अंसारी का पांच बीघे गांव के 25 किसानों का 95 बीघे खेत कटान से नदी में समा चुका है। राप्ती नदी कटान करके गांव के किनारे पहुंच चुकी है। ग्रामीणों के पक्के मकान राप्ती नदी की सरहद पर पहुंच चुके हैं। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो गांव के 150 परिवार बेघर हो जाएंगे। (संवाद)
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कई बार दिया गया प्रार्थनापत्र
ग्रामीण बताते हैं कि बौड़िहार गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए शासन-प्रशासन से कई बार मांग की गई, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य न कराया गया तो गांव के अस्तित्व पर कटान का खतरा मंडराएगा।
प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश
गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के बौड़िहार गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए ग्रामीणों ने प्रार्थना त्र दिया है। गांव के पास कटानरोधी कार्य कराने का प्रस्ताव तैयार करने के लिए बाढ़ खंड के इंजीनियरों को निर्देश दिया गया है। शासन से बजट मिलने के बाद तुंरत कटानरोधी कार्य कराया जाएगा। -राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला
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राप्ती नदी के बाढ़ का कहर जिले के तीनों तहसीलों में 75 से अधिक गांवों पर हर वर्ष टूटता है। राप्ती नदी की बाढ़ से जिले की तीनों तहसीलों में 350 से अधिक गांव हर वर्ष प्रभावित होते हैं। नदी की बाढ़ व कटान का कहर सबसे अधिक उतरौला तहसील के गांवों पर टूटता है। गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक का बौड़िहार गांव राप्ती नदी के मुहाने पर बसा है। यह गांव बाढ़ में हर वर्ष घिर जाता है। गांव के लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होता है।
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ग्रामीण दिलीप कुमार बताते हैं कि पहले तो बौड़िहार गांव पर बाढ़ का कहर टूटता था, लेकिन पिछले तीन वर्ष से राप्ती नदी की कटान का कहर भी ग्रामीणों को झेलना पड़ रहा है। राप्ती नदी ने वहीदशाह का 10 बीघे, नासिर का 15 बीघे, दिलीप कुमार का पांच बीघे, चिनके की 20 बीघे, साधू का पांच बीघे, सुरेश का पांच बीघे, विजय गुप्ता का 10 बीघे, जफर खान का पांच बीघे, जुहेर का 10 बीघे व एजाज अंसारी का पांच बीघे गांव के 25 किसानों का 95 बीघे खेत कटान से नदी में समा चुका है। राप्ती नदी कटान करके गांव के किनारे पहुंच चुकी है। ग्रामीणों के पक्के मकान राप्ती नदी की सरहद पर पहुंच चुके हैं। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य नहीं कराया गया तो गांव के 150 परिवार बेघर हो जाएंगे। (संवाद)
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कई बार दिया गया प्रार्थनापत्र
ग्रामीण बताते हैं कि बौड़िहार गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए शासन-प्रशासन से कई बार मांग की गई, लेकिन अभी तक कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य न कराया गया तो गांव के अस्तित्व पर कटान का खतरा मंडराएगा।
प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश
गैड़ास बुजुर्ग ब्लॉक के बौड़िहार गांव के पास राप्ती नदी के किनारे कटानरोधी कार्य कराने के लिए ग्रामीणों ने प्रार्थना त्र दिया है। गांव के पास कटानरोधी कार्य कराने का प्रस्ताव तैयार करने के लिए बाढ़ खंड के इंजीनियरों को निर्देश दिया गया है। शासन से बजट मिलने के बाद तुंरत कटानरोधी कार्य कराया जाएगा। -राजेंद्र बहादुर, एसडीएम उतरौला