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Balrampur News: बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, खेतों में भीग रही धान की फसल
Fri, 30 Oct 2026 10:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Fri, 30 Oct 2026 10:47 PM IST
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फोटो-20- पेहर बाजार क्षेत्र में बारिश के कारण गिरी धान की फसल। संवाद
बलरामपुर। अर्नब चक्रवात के असर से शुक्रवार सुबह से ही जिले में मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बादल छाए रहे और अलग-अलग क्षेत्रों में रुक-रुककर हल्की बारिश होती रही। इससे खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल के साथ ही कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसल भी भीग गई। किसान कटी फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और धान की मड़ाई कराने की जल्दबाजी में जुटे रहे। किसानों को चिंता है कि यदि बारिश तेज हुई तो खेतों में पड़ी फसल सड़ सकती है और खड़ी फसल की बालियों को भी नुकसान पहुंच सकता है। दूसरी ओर, सरसों और लाही की बुवाई कर चुके किसानों को बीज के अंकुरण पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका सता रही है।
शुक्रवार सुबह से हुई बारिश के कारण खेती-किसानी का काम प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर खेतों में धान के कटे हुए बोझ पड़े हैं, जबकि अधिकांश खेतों में फसल अभी खड़ी है। रेहराबाजार क्षेत्र के बूधीपुर, डबरिया सहित आसपास के गांवों में किसान बारिश के बीच कटी धान की फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे रहे। किसान सत्यराम वर्मा, रामचरन, लालता प्रसाद और रामलखन ने बताया कि कुछ खेतों में धान की कटाई हो चुकी है। बारिश शुरू होने के बाद कटी फसल को खेतों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। जहां संभव है, वहां मड़ाई का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि तेज बारिश हुई तो खेतों में पड़ी फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
गौरा चौराहा क्षेत्र के किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। यहां धान की फसल पककर तैयार है। कुछ किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, जबकि कई खेतों में फसल अभी खड़ी है। किसान सैयद अली, राजेश तिवारी, अवध बिहारी, धर्मेंद्र पांडे और शनि मिश्रा ने बताया कि खाद, बीज, डीजल और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। ऐसे समय में बारिश होने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। खेतों में कटी फसल भीगने से धान के दानों में नमी बढ़ेगी और मड़ाई में परेशानी होगी। किसानों के मुताबिक, यदि बारिश लगातार जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है।
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खेतों में गिरने लगी धान की फसल
पेहर बाजार क्षेत्र में शुक्रवार को पूरे दिन हुई बारिश से कई खेतों में धान की फसल गिर गई। किसान शशिकरण सिंह, तुलाराम, बंसी, दीना, अरुण वर्मा और राजेंद्र वर्मा ने बताया कि धान की फसल कटाई के करीब पहुंच चुकी थी। अब बारिश के कारण कटाई टालनी पड़ सकती है। खेतों में गिरी फसल को काटने और समेटने में भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। किसानों ने बताया कि बारिश के साथ तेज हवा नहीं चली, जिससे खड़ी फसल को बड़े पैमाने पर गिरने से राहत मिली है। फिर भी किसान मौसम साफ होने और खेतों से पानी निकलने का इंतजार कर रहे हैं।
हरैया सतघरवा क्षेत्र में भी सुबह से रुक-रुककर हो रही बारिश से किसान परेशान हैं। क्षेत्रीय किसान मेवालाल, पीर मोहम्मद, रामबहादुर और माता प्रसाद ने बताया कि अधिकांश खेतों में धान की फसल अभी खड़ी है, जबकि कुछ किसानों ने कटाई के बाद फसल खेतों में ही रखी है। यदि बारिश तेज हुई तो कटी फसल के सड़ने और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। बारिश का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है। रबी सीजन की तैयारी में जुटे किसानों को सरसों और लाही की बुवाई पर भी बारिश के असर की चिंता सता रही है।
जिले में 1.34 लाख हेक्टेयर में हुई है धान की खेती
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जिले में 1,34,005 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई है। इसमें 30,532 हेक्टेयर में ग्रेड-ए और 1,03,473 हेक्टेयर में हाइब्रिड धान की फसल शामिल है। इस वर्ष जिले में 41,55,820 क्विंटल धान उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने बताया कि अब तक करीब 10 से 15 प्रतिशत धान की कटाई ही हो पाई है। अधिकांश फसल अभी खेतों में खड़ी है। ऐसे में तेज बारिश होने पर फसल को नुकसान पहुंच सकता है। जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि शुक्रवार को जिले में करीब तीन मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश हल्की रही और तेज हवा नहीं चली, इसलिए फिलहाल बड़े नुकसान की स्थिति नहीं है।
बारिश से बदला मौसम, दिन के तापमान में चार डिग्री की गिरावट
अर्नब चक्रवात के असर से जिले में बादल और बारिश के कारण मौसम का मिजाज बदल गया है। 29 अक्तूबर को अधिकतम तापमान करीब 29.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं, 30 अक्तूबर को अधिकतम तापमान करीब 25 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिक मिथलेश झा ने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। सुबह और शाम के समय ठंडक महसूस होने लगी है। रविवार को मौसम साफ होने के बाद तापमान में आगे बदलाव की स्थिति बनेगी।
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शुक्रवार सुबह से हुई बारिश के कारण खेती-किसानी का काम प्रभावित हुआ। कई स्थानों पर खेतों में धान के कटे हुए बोझ पड़े हैं, जबकि अधिकांश खेतों में फसल अभी खड़ी है। रेहराबाजार क्षेत्र के बूधीपुर, डबरिया सहित आसपास के गांवों में किसान बारिश के बीच कटी धान की फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे रहे। किसान सत्यराम वर्मा, रामचरन, लालता प्रसाद और रामलखन ने बताया कि कुछ खेतों में धान की कटाई हो चुकी है। बारिश शुरू होने के बाद कटी फसल को खेतों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। जहां संभव है, वहां मड़ाई का काम भी तेजी से कराया जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि तेज बारिश हुई तो खेतों में पड़ी फसल को बचाना मुश्किल हो जाएगा।
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गौरा चौराहा क्षेत्र के किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। यहां धान की फसल पककर तैयार है। कुछ किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, जबकि कई खेतों में फसल अभी खड़ी है। किसान सैयद अली, राजेश तिवारी, अवध बिहारी, धर्मेंद्र पांडे और शनि मिश्रा ने बताया कि खाद, बीज, डीजल और मजदूरी पर पहले ही काफी खर्च हो चुका है। ऐसे समय में बारिश होने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। खेतों में कटी फसल भीगने से धान के दानों में नमी बढ़ेगी और मड़ाई में परेशानी होगी। किसानों के मुताबिक, यदि बारिश लगातार जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है।
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खेतों में गिरने लगी धान की फसल
पेहर बाजार क्षेत्र में शुक्रवार को पूरे दिन हुई बारिश से कई खेतों में धान की फसल गिर गई। किसान शशिकरण सिंह, तुलाराम, बंसी, दीना, अरुण वर्मा और राजेंद्र वर्मा ने बताया कि धान की फसल कटाई के करीब पहुंच चुकी थी। अब बारिश के कारण कटाई टालनी पड़ सकती है। खेतों में गिरी फसल को काटने और समेटने में भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ेगी। किसानों ने बताया कि बारिश के साथ तेज हवा नहीं चली, जिससे खड़ी फसल को बड़े पैमाने पर गिरने से राहत मिली है। फिर भी किसान मौसम साफ होने और खेतों से पानी निकलने का इंतजार कर रहे हैं।
हरैया सतघरवा क्षेत्र में भी सुबह से रुक-रुककर हो रही बारिश से किसान परेशान हैं। क्षेत्रीय किसान मेवालाल, पीर मोहम्मद, रामबहादुर और माता प्रसाद ने बताया कि अधिकांश खेतों में धान की फसल अभी खड़ी है, जबकि कुछ किसानों ने कटाई के बाद फसल खेतों में ही रखी है। यदि बारिश तेज हुई तो कटी फसल के सड़ने और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। बारिश का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है। रबी सीजन की तैयारी में जुटे किसानों को सरसों और लाही की बुवाई पर भी बारिश के असर की चिंता सता रही है।
जिले में 1.34 लाख हेक्टेयर में हुई है धान की खेती
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष जिले में 1,34,005 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई है। इसमें 30,532 हेक्टेयर में ग्रेड-ए और 1,03,473 हेक्टेयर में हाइब्रिड धान की फसल शामिल है। इस वर्ष जिले में 41,55,820 क्विंटल धान उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। जिला कृषि अधिकारी उपेंद्र नाथ खरवार ने बताया कि अब तक करीब 10 से 15 प्रतिशत धान की कटाई ही हो पाई है। अधिकांश फसल अभी खेतों में खड़ी है। ऐसे में तेज बारिश होने पर फसल को नुकसान पहुंच सकता है। जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि शुक्रवार को जिले में करीब तीन मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश हल्की रही और तेज हवा नहीं चली, इसलिए फिलहाल बड़े नुकसान की स्थिति नहीं है।
बारिश से बदला मौसम, दिन के तापमान में चार डिग्री की गिरावट
अर्नब चक्रवात के असर से जिले में बादल और बारिश के कारण मौसम का मिजाज बदल गया है। 29 अक्तूबर को अधिकतम तापमान करीब 29.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं, 30 अक्तूबर को अधिकतम तापमान करीब 25 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिक मिथलेश झा ने बताया कि शनिवार को अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है। सुबह और शाम के समय ठंडक महसूस होने लगी है। रविवार को मौसम साफ होने के बाद तापमान में आगे बदलाव की स्थिति बनेगी।

फोटो-20- पेहर बाजार क्षेत्र में बारिश के कारण गिरी धान की फसल। संवाद