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Balrampur News: पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के साथ खोले आर्थिक समृद्धि के द्वार

Wed, 18 Feb 2026 10:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Feb 2026 10:54 PM IST
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Opening the doors to economic prosperity while keeping the environment green
बलरामपुर के रेहरा बाजार में पौधशाला में काम करती महिलाएं ।-संवाद
रेहरा बाजार। ग्रामसभा बैरिया-सुर्जन में महिलाओं ने पर्यावरण को हरा-भरा बनाने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अनूठी पहल की है। श्रीश्याम स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मिलकर एक पौधशाला की स्थापना की है, जिससे न केवल क्षेत्र हरा-भरा हो रहा है, बल्कि आधी आबादी की आर्थिक समृद्धि के द्वार भी खुल रहे हैं।
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इस प्रयास से अन्य महिलाओं को भी प्रेरणा मिल रही है। समूह की सदस्यों ने कड़ी मेहनत से पौधशाला को सफल बनाया है और गांव की चार महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया है। गांव की बिंदावती, सुमित्रा, प्रभावती और बड़का जैसी चार महिलाएं घर का काम निपटाने के बाद खाली समय में पौधशाला में काम करती हैं, जिससे उन्हें प्रतिदिन 200 रुपये की आय होती है।(संवाद)
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रंग लाई समूह की अध्यक्ष नीलम की मेहनत



स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2019 में शादी कर ससुराल आईं तो नीलम के पास खाली समय रहता था। समय का सदुपयोग करते हुए उन्होंने वर्ष 2020-21 में श्रीश्याम स्वयं सहायता समूह का गठन किया और तीन बीघा जमीन में पौधशाला का काम शुरू किया। इससे नीलम अब तक 20 लाख से अधिक पौधों की बिक्री कर चुकी हैं, जो उनकी मेहनत और लगन का प्रमाण है।
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विभिन्न प्रजातियों के औषधीय और फलदार पौधों की नर्सरी



इस पौधशाला में औषधीय पौधों जैसे आंवला, नीम, शतावर, गिलोय, एलोवेरा, सहजन, बहेड़ा, जामुन, शरीफा, काली मिर्च और तुलसी की नर्सरी तैयार की जाती है। इसके साथ ही आम, अमरूद, फरेंदा, पपीता, केला, चीकू, अमरख, अनार, अंगूर, लीची, बेल और कटहल जैसे फलदार पौधे भी उपलब्ध हैं। फूलदार पौधों में गेंदा, चमेली, गुलमोहर, गुलाब, कनेर, गुड़हल और कुमुदिनी भी तैयार किए जाते हैं। इन पौधों की विभिन्न प्रजातियां इस पौधशाला में तैयार की जाती हैं।




खर्च निकालने के बाद हो रहा लाखों का मुनाफा



समूह की वार्षिक आय लगभग छह लाख 28 हजार रुपये होती है। मजदूरी पर दो लाख 28 हजार रुपये तथा खाद, बीज, दवा और रखरखाव पर 1 लाख 50 हजार रुपये खर्च के बाद लगभग तीन लाख 78 हजार रुपये का मुनाफा होता है। इस मुनाफे से उन्होंने एक बैटरी चालित लोडर भी खरीद लिया है, जिससे धानेपुर, बाबागंज, उतरौला, सादुल्लाहनगर, नया नगर, मौर्या गंज, हुसेनाबाद, गौराचौकी, मद्दू बाजार और सराय खास बाजार जैसे विभिन्न स्थानों पर पौधों की बिक्री की जाती है।
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