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Balrampur News: मैं दौलत नहीं कमा पाया...तुम्हारा हर ग़म खरीद सकता हूं

Wed, 13 Nov 2024 10:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Wed, 13 Nov 2024 10:41 PM IST
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I couldn't earn wealth...I can buy all your sorrows
बलरामपुर। वीर विनय चौराहे के समीप एमपीपी इंटर कॉलेज के मैदान में मंगलवार की शाम कवियों की महफिल सजी। अमर उजाला के काव्य कैफे में उमड़ी श्रोताओं की भीड़ ने हास्य की रचनाओं पर खूब ठहाके लगाए। प्रेम व श्रृंगार रस की कविताओं पर जमकर तालियां बजीं। हर कोई वाह-वाह, वनस मोर कहता नजर आया।
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अमर उजाला के काव्य कैफे कार्यक्रम का शुभारंभ उदासीन संगत गेल्हापुर के महंत बृजानंद जी महाराज, विधायक सदर पल्टूराम, विधायक तुलसीपुर कैलाश नाथ शुक्ला, जिलाध्यक्ष भाजपा प्रदीप सिंह, नगर पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह वैस, गैसड़ी के पूर्व विधायक प्रतिनिधि अजीज खान, भाजपा अवध क्षेत्र के सह संयोजक विनय कुमार मिश्र, सांसद प्रतिनिधि सुनील चौधरी, एमएलके महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. जेपी पांडेय, एमपीपी इंटर कालेज के प्रधानाचार्य राकेश सिंह के साथ ही एसएसबी जवानों ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसके साथ ही कवि व अतिथियों को सम्मानित किया गया। संचालन अधिवक्ता बृजलाल तिवारी ने किया।
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हम बदले तो बेवफा, वो बदले तो मजबूरी है...
-अलीगढ़ के कवि डा. विष्णु सक्सेना ने तू हवा है तो कर ले अपने हवाले मुझको, इससे पहले कि कोई और बहा ले मुझको, आईना बन के गुज़ारी है ज़िंदगी मैंने, टूट जाऊंगा बिखरने से बचा ले मुझको सुनाकर जमकर तालियां बटोरी। यही नहीं, प्यार का कुछ यूं दर्द बयां किया- ''तन और मन हैं पास बहुत फिर, सोच-सोच में क्यूं दूरी है। हम बदले तो कहा बेवफा, वो बदले तो मजबूरी है।'' सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। श्रोता भी साथ पंक्तियां दोहराते नजर आए। नाता तोड़ चुकी नायिका को नायक ने कुछ यूं मनाना चाहा- ''चांदनी रात में रंग ले हाथ में, जिदगी को नया मोड़ दें। फूल से पंखुड़ी अब न होगी अलग, सारे गुलशन में हम ये मुनादी करें। हमको जितना दिखा सिर्फ तुमको देखा। अब ये पन्ना यहीं मोड़ दें। तुम हमारी कसम...तोड़ दें। ''साथ ही प्यास बुझ जाए तो शबनम ख़रीद सकता हूं, ज़ख़्म मिट जाएं तो मरहम ख़रीद सकता हूं, ये मानता हूं मैं दौलत नहीं कमा पाया, मगर तुम्हारा हर एक ग़म खरीद सकता हूं। सुनाकर जमकर तालियां बटोरी।
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कविताओं में दिखा युवाओं का बयां किया दर्द
उन्नाव के स्वयं श्रीवास्तव जब मंच पर कविता पाठ के लिए खड़े हुए तो चारों तरफ तालियां गूंजने लगी। तराई के युवाओं से जोड़ते हुए सुनाया कि मुश्किल थी संभलना ही पड़ा घर के वास्ते,और घर से निकलना ही पड़ा घर के वास्ते, मजबूरियों का नाम हमने शौक रख दिया,और शौक बदलना ही पड़ा घर के वास्ते। युवाओं को उत्साहित करते हुए पढ़ा कि पत्थर की चमक है न नगीने की चमक है, चेहरे पे सीना तान के जीने की चमक है। पुरखों से विरासत में हमें कुछ न मिला था, जो दिख रही है खून पसीने की चमक है। इस पर खूब तालियां बजीं। हर कोई वाह-वाह कहता नजर आया।

इनसेट
हास्य की रचनाओं पर खूब हंसाया
- कानपुर के हेमंत पांडेय ने पुलिस से लेकर प्रशासन व राजनीति पर हास्य की रचनाएं सुनाकर लोगों को भाव विभोर कर दिया। पढ़ा कि एक-एक प्रेमिका को बांटकर ले गए, जो नहीं माना उसे डांटकर ले गए। जिस पेड़ पे बांधा था मोहब्बत का धागा, नगर निगम वाले उसे भी काटकर ले गए। सुनाकर जमकर तालियां बटोरी। कपड़े सिलकर रंगते हैं वो कीली फेंक कर मारेंगे, कसी हुई न मिल पाई तो ढीली फेंक कर मारेंगे। जो भाला फेंका नीरज ने वो चीन के खातिर रखा है, पाकिस्तान तुमको मो हम तीली फेंक कर मारेंगे सुनाकर लोगों को वाह-वाह करने के लिए विवश कर दिया।


..ये रील बनाने वाले लड़के
- कहां गया हाय मेरा दिन वो सलोना रे, हाथों में थामे माटी का खिलौना रे, वही मेरा चांदी था वही मेरा सोना रे..जहां मन जाते थे जो मन खाते थे और गेंदा के फूल से तितली उड़ाते थे कहां गया मेरे मन का वो खिलौना रे...कवि नीलोत्तपल मृणाल की इन पंक्तियों पर खूब तालियां बजीं। युवाओं को झकझोरते हुए पढ़ा कि- स्कूलों की दीवारों पर जा दिल बनाने वाले लड़के, चलती तीर को हंसके अपने दिल पर खाने वाले लड़के, दिल टूटे तो बिस्तर पर ही झील बनाने वाले लड़के, उस दौर का जादू, क्या जाने, ये रील बनाने वाले लड़के।
क्या खबर थी कि मौसम बदल जाएगा
- कवियत्री मुमताज नसीम ने पढ़ा कि- बदरिया रे वहां जाके बरसो रे जहां मोर सांवरिया जहां मोर सांवरिया, चंदा से पूछा सितारों से पूछा आंखों से पूछा नजरों से पूछा बाहों में जाकर बहारों से पूछा सावन की परती फुहारों से पूछा नदिया भी देख आई पर्वत भी देखा है, उठ उठ कर थक गई नजरिया रे सांवरिया रे सांवरिया रे। कजरा लगाऊं तो बह जाए कजरा बिदियां जमाऊ तो गिर जाए बिदिया। खिड़की ना खोलू कभी मुंह से ना बोलूं कभी जाऊं ना घर से बजरिया वहां जाकर बरसो रे जहां मोरे सांवरिया। सुनाकर खूब तालियां बटोरी। पढ़ा कि क्या खबर थी कि मौसम बदल जाएगा, और रस्ते में बरसात हो जाएगी सुनाकर लोगों की वाह-वाही बटोरी।



इनका हुआ सम्मान
- अमर उजाला के काव्य कैफे में सहयोग करने वाले सेंट जेवियर्स सीनियर सेकंडरी स्कूल, जीसस एंड मैरी स्कूल एंड कॉलेज, पायनियर पब्लिक स्कूल, जिला पंचायत अध्यक्ष आरती तिवारी, सदर विधायक पल्टूराम, तुलसीपुर विधायक कैलाश नाथ शुक्ल, उतरौला विधायक राम प्रताप वर्मा,पूर्व विधायक शैलेश कुमार सिंह शैलू, नगर पालिकाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह, अवध क्षेत्र भाजपा सह संयोजक विनय मिश्र, सांसद राम शिरोमणि वर्मा, विधायक गैसड़ी राकेश यादव, सीएमओ डॉ. मुकेश रस्तोगी, बीएसए शुभम शुक्ला, डीआईओएस मृदुला आनंद, ब्लॉक प्रमुख श्रीदत्तगंज हेमंत जायसवाल, बीडीओ बलरामपुर, पूर्व पालिकाध्यक्ष इशरत जमाल, समाजसेवी शाबान अली, आदित्य प्रकाश साहू, गौरव सिंह, टीइनी टाट्स स्कूल उतरौला, एचआरए इंका उतरौला, स्कालर एकाडमी उतरौला, एमएलके पीजी कॉलेज, बलरामपुर चीनी मिल, तुलसीपुर चीनी मिल, दीप नेत्रालय, सूर्या स्मार्ट व्हीलस, बीटीएम हास्पिटल, एचजेएमएस इंका शेरपुर चमरुपुर, सलिल सिंह टीटू, अल रहमान हास्पिटल, शारदा पब्लिक स्कूल बलरामपुर के प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया।
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